नए आर्थिक दबाव डाले तो बातचीत की मेज छोड़ सकता है रूस, अपने फैसले का ट्रंप ने किया बचाव
वाशिंगटन, 19 अक्टूबर (आईएएनएस)। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रूस और रूसी ऊर्जा खरीदने वाले बड़े देशों पर नए कड़े प्रतिबंधों और टैरिफ को फिलहाल लागू न करने के अपने फैसले का बचाव किया है। उनका कहना है कि वह यूक्रेन युद्ध को खत्म करने के लिए चल रही शांति वार्ता को नुकसान नहीं पहुंचाना चाहते।
ट्रंप ने यह सफाई उस फैसले के दो दिन बाद दी, जिसमें उन्होंने 'लिंडसे ओ. ग्राहम सैंक्शिनिंग रशिया एंड ईरान एक्ट ऑफ 2026' के कई महत्वपूर्ण प्रावधानों को अस्थायी रूप से लागू न करने का आदेश दिया था। इस कानून के तहत अतिरिक्त टैरिफ लगाए जा सकते थे, जिनका असर भारत पर भी पड़ सकता था, क्योंकि भारत रूस से तेल खरीदता है।
ट्रंप ने कहा कि उनकी सरकार युद्ध को खत्म करने के लिए बातचीत में प्रगति कर रही है। उनके मुताबिक, अगर इस समय रूस पर नए आर्थिक दबाव डाले गए, तो वह बातचीत की मेज छोड़ सकता है।
ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'ट्रुथ सोशल' पर लिखा, "मैं रूस-यूक्रेन युद्ध में शांति स्थापित करने के लिए बातचीत कर रहा हूं और ऐसा कोई कदम नहीं उठाना चाहता जो रूस को बेवजह बातचीत से दूर कर दे।"
उन्होंने अपने फैसले को ईरान और वैश्विक ऊर्जा बाजार से भी जोड़ा। ट्रंप का कहना है कि रूस फिलहाल ईरान की उतनी मदद नहीं कर रहा जितनी वह कर सकता है और वह इस स्थिति को बनाए रखना चाहते हैं।
इसके अलावा, उन्होंने यूक्रेन की ओर से रूस की डीजल रिफाइनरियों पर किए जा रहे हमलों की आलोचना की। ट्रंप के मुताबिक, इससे ईंधन आपूर्ति प्रभावित होती है और दुनिया भर में उपभोक्ताओं और कारोबारों पर असर पड़ता है।
शुक्रवार को हस्ताक्षर किए गए कार्यकारी आदेश के तहत कुछ रूसी सामानों पर 500 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने और रूसी कच्चा तेल व प्राकृतिक गैस खरीदने वाले पांच सबसे बड़े आयातक देशों के सामानों पर 100 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने का प्रावधान रखा गया था।
हालांकि, उसी आदेश में इन अतिरिक्त शुल्कों और अधिकांश नए प्रतिबंधों को फिलहाल लागू न करने की छूट भी दे दी गई। यह छूट पहले से रूस पर लगे अमेरिकी प्रतिबंधों को खत्म नहीं करती। पुराने प्रतिबंध पहले की तरह लागू रहेंगे।
भारत के लिए यह फैसला खास महत्व रखता है क्योंकि नया कानून रूसी ऊर्जा खरीदने वाले देशों पर अतिरिक्त अमेरिकी टैरिफ लगाने का रास्ता खोलता था। फिलहाल मिली छूट का मतलब है कि भारत पर ऐसे नए शुल्क अभी नहीं लगाए जा रहे हैं।
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने शनिवार को कहा कि सरकार को इन प्रतिबंधों और टैरिफ के व्यापक आर्थिक असर का आकलन करने के लिए समय चाहिए।
रुबियो ने खास तौर पर भारत का नाम लेते हुए कहा कि यह कानून कुछ देशों को प्रभावित कर सकता है। उन्होंने बताया कि ट्रंप प्रशासन अगले 60 दिनों तक वैश्विक अर्थव्यवस्था और अमेरिका पर इसके प्रभावों की समीक्षा करेगा और उसके बाद आगे का फैसला लिया जाएगा।
आदेश के अनुसार, यह छूट तब तक जारी रहेगी जब तक राष्ट्रपति या विदेश मंत्री जरूरी सलाह-मशविरे के बाद यह तय नहीं कर लेते कि आगे कोई कार्रवाई की जानी चाहिए।
ट्रंप के इस फैसले की कुछ सांसदों ने आलोचना भी की है। रिपब्लिकन और डेमोक्रेटिक पार्टी के कई नेताओं का मानना है कि प्रतिबंधों को रोकने से रूस पर अमेरिका का दबाव कमजोर पड़ सकता है, जबकि यूक्रेन में युद्ध अभी भी जारी है।
वहीं, व्हाइट हाउस का कहना है कि यह फैसला शांति समझौते की दिशा में चल रहे प्रयासों के अनुरूप है।
ट्रंप की ताजा टिप्पणियों से यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की के साथ उनके मतभेद भी सामने आए हैं। दोनों नेताओं के बीच युद्ध की रणनीति और उसके आर्थिक प्रभावों को लेकर अलग-अलग राय रही है।
गौरतलब है कि ग्राहम अधिनियम पर 18 सितंबर को हस्ताक्षर किए गए थे। इसका उद्देश्य रूस पर आर्थिक दबाव बढ़ाना था। इसमें प्रतिबंध, व्यापारिक रोक और टैरिफ जैसे कदम शामिल हैं। साथ ही, कानून राष्ट्रपति को यह अधिकार भी देता है कि यदि वह इसे अमेरिकी राष्ट्रीय हित में मानें, तो कुछ प्रावधानों को अस्थायी रूप से रोक सकते हैं।
--आईएएनएस
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