ट्रंप ने यूरोप में अशांति के लिए इमिग्रेशन को ठहराया जिम्मेदार, फ्रांस और इटली को दी सीमा नियंत्रण कड़ा करने की सलाह
वाशिंगटन, 20 अक्टूबर (आईएएनएस)। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने यूरोप के कुछ हिस्सों में बढ़ रही अशांति के लिए प्रवासियों को जिम्मेदार ठहराया है। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर फ्रांस और इटली अपनी सीमाओं पर नियंत्रण नहीं बढ़ाते तो उन्हें और ज्यादा अस्थिरता का सामना करना पड़ सकता है।
हालांकि, फ्रांसीसी अधिकारियों का कहना है कि हाल की हिंसा का बड़ा कारण कट्टरपंथी समूह हैं, जो शिक्षा व्यवस्था, बढ़ती महंगाई और जीवन-यापन की बढ़ती लागत को लेकर चल रहे प्रदर्शनों के दौरान सक्रिय हुए।
सोमवार को कंसास में एक चुनावी रैली के लिए रवाना होने से पहले ट्रंप ने कहा कि उन्होंने कई बार फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों को बड़ी संख्या में प्रवासियों को देश में आने देने के खिलाफ चेतावनी दी थी। ट्रंप का दावा था कि यूरोपीय सरकारें अपनी सीमाओं की रक्षा करने में नाकाम रही हैं और अब उन्हें अपनी आव्रजन नीतियों के नतीजे झेलने पड़ रहे हैं।
उन्होंने कहा, "मैंने इमैनुएल से कहा था कि आपको अपनी सीमाएं बंद कर देनी चाहिए।"
ट्रंप ने कहा कि उन्होंने कई साल पहले ही मैक्रों को चेतावनी दी थी कि फ्रांस बड़े पैमाने पर इमिग्रेशन की अनुमति देकर गलती कर रहा है। उन्होंने इटली का भी जिक्र किया और दावा किया कि दोनों देशों में हो रहे विरोध प्रदर्शनों का संबंध इमिग्रेशन से है। उनके अनुसार, यूरोप को राजनीतिक और सामाजिक स्थिरता के मोर्चे पर एक बड़ी चुनौती का सामना करना पड़ रहा है।
ये टिप्पणियां ऐसे समय में आई हैं जब फ्रांस में स्कूलों की बिगड़ती स्थिति, बढ़ती महंगाई और लोगों की घटती क्रय क्षमता को लेकर कई हफ्तों से प्रदर्शन चल रहे हैं। शुरुआत में ये प्रदर्शन छात्रों और शिक्षा से जुड़े समूहों तक सीमित थे, लेकिन बाद में इनमें ट्रेड यूनियन और अन्य संगठन भी शामिल हो गए।
सप्ताहांत में फ्रांस के कई शहरों में हिंसा भड़क गई। कई वाहनों में आग लगा दी गई, दुकानों और व्यवसायों को नुकसान पहुंचाया गया तथा सार्वजनिक इमारतों पर हमले किए गए। ऐतिहासिक शहर लिमोज के टाउन हॉल को भी गंभीर नुकसान पहुंचा, जहां रिपोर्ट के मुताबिक नकाबपोश समूहों ने आगजनी की।
फ्रांसीसी अधिकारियों के अनुसार, अशांति को नियंत्रित करने के दौरान सप्ताहांत में 2,300 से अधिक लोगों को हिरासत में लिया गया। हालांकि, फ्रांस सरकार ने यह निष्कर्ष नहीं निकाला है कि इन प्रदर्शनों के पीछे आव्रजन जिम्मेदार था या कि प्रवासी हिंसा के मुख्य आयोजक थे।
राष्ट्रपति मैक्रों ने हिंसक घटनाओं की निंदा करते हुए कहा कि हिंसा करने वाले लोगों और अपनी वास्तविक समस्याओं को लेकर शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने वालों में फर्क किया जाना चाहिए।
फ्रांस के प्रधानमंत्री सेबेस्टियन लेकोर्नू ने भी कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए अतिरिक्त कदम उठाए। इनमें कुछ क्षेत्रों में सीमित प्रतिबंध लगाए गए ताकि दंगों और लूटपाट को रोका जा सके। इसके बावजूद ट्रंप अपने इस दावे पर कायम रहे कि यूरोप की मौजूदा समस्याओं के केंद्र में इमिग्रेशन ही है।
सोमवार को सोशल मीडिया पर एक अलग बयान में उन्होंने फ्रांस से अपनी सीमाएं बंद करने की अपील की और कहा कि देश की इमिग्रेशन नीतियों ने मौजूदा अशांति को बढ़ावा दिया है। ट्रंप लंबे समय से यह तर्क देते रहे हैं कि यूरोपीय देशों ने बड़ी संख्या में प्रवासियों को स्वीकार किया, लेकिन इससे राष्ट्रीय पहचान, सार्वजनिक सेवाओं और सामाजिक एकता पर पड़ने वाले प्रभावों पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया।
उन्होंने कई बार यूरोप की इमिग्रेशन नीतियों की आलोचना की है और सहयोगी देशों से सीमा सुरक्षा को और सख्त करने का आग्रह किया है। साथ ही, ट्रंप अपनी सरकार की कड़ी इमिग्रेशन नीतियों को यूरोप के मॉडल के विकल्प के रूप में पेश करते रहे हैं।
उनकी ताजा टिप्पणियां ऐसे समय में आई हैं जब 3 नवंबर को होने वाले अमेरिकी मध्यावधि चुनावों से पहले इमिग्रेशन अमेरिका की राजनीति का एक बड़ा मुद्दा बना हुआ है।
--आईएएनएस
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