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बलूच नेता ने कहा, 'यूएस-ईरान बातचीत के लिए सही जगह नहीं था पाकिस्तान'

 

वॉशिंगटन, 13 अप्रैल (आईएएनएस)। अमेरिका और ईरान के बीच उच्च स्तरीय बातचीत बेनतीजा रहने के बाद, 'बलूच अमेरिकन कांग्रेस' के अध्यक्ष तारा चंद ने मध्यस्थ स्थल के तौर पर पाकिस्तान के चुनाव की आलोचना की है। उन्होंने इसे एक “अशांत और बेईमान” देश बताया साथ ही संवेदनशील मुद्दे पर आयोजक की विश्वसनीयता पर सवाल उठाए।

उन्होंने कहा कि पाकिस्तान के पास ऐसी बातचीत में बीच-बचाव करने के लिए जरूरी भरोसे और वैश्विक रसूख की कमी थी।

सोमवार को अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर चंद ने कहा, “पाकिस्तान जैसे परेशान और बेईमान देश में यूनाइटेड स्टेट्स और ईरान के बीच शांति बातचीत का आयोजन उसकी सफलता को लेकर बड़े सवाल खड़े करता है। पाकिस्तान के पास ऐसी बातचीत को असरदार तरीके से आगे बढ़ाने के लिए जरूरी ग्लोबल स्टैंडिंग की कमी है।”

उन्होंने आगे कहा, “अमेरिका और ईरान दोनों ने यह जगह चुनकर शायद बहुत बड़ी गलती की। अगर मकसद सार्थक और विश्वसनीय संवाद था तो इसका आयोजन ज्यादा न्यूट्रल और सम्मानजनक माहौल में किया जाना चाहिए था।”

बातचीत का कोई नतीजा न निकलने के बाद, अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने रविवार को कहा कि इस्लामाबाद में 20 घंटे से ज्यादा चली बातचीत बेनतीजा रही, और चेतावनी दी कि तेहरान का वॉशिंगटन की शर्तों को मानने से इनकार करना "यूनाइटेड स्टेट्स ऑफ अमेरिका से कहीं ज्यादा उसके लिए बुरी खबर है।"

एक और, बलूच मानवाधिकार रक्षक मीर यार बलूच ने अमेरिका-ईरान के बीच इस्लामाबाद के प्रयासों की कड़ी निंदा की और पाकिस्तान को "शांति का शत्रु" बताया।

पाकिस्तान के इरादों पर सवाल उठाते हुए, मीर ने एक्स पोस्ट में लिखा, “क्या आपको सच में लगता है कि पाकिस्तान शांति को लेकर गंभीर है और वह ईरान और यूएस के बीच मध्यस्थता कर रहा था? पाकिस्तान को किस आधार पर इसका हक दिया गया? पाकिस्तान ने 30 लाख बंगालियों का नरसंहार किया, जॉर्डन में 15 हजार फिलिस्तीनियों को मारा, अफगानिस्तान में 5 लाख अफगानों को मारा, रमजान के महीने में काबुल पुनर्वास अस्पताल केंद्र पर बमबारी की थी, जिसमें 400 बेगुनाह मारे गए, और 2 लाख बलूचों को मौत के मुंह में धकेल दिया।”

उन्होंने आगे कहा, “पाकिस्तान शांति का और अमेरिका का, रूस का अफगानिस्तान, बलूचिस्तान, इजरायल और भारत का शत्रु है, और यह अरब देशों की भी भलाई नहीं चाहता है।”

मीर ने आरोप लगाया कि पाकिस्तान बलूचिस्तान में चल रहे विरोध के साथ-साथ आर्थिक, सैन्य और सियासी चुनौतियों से जूझ रहा है।

उन्होंने तर्क दिया कि पाकिस्तान की मध्यस्थता की कोशिशों का मकसद अपने अंदरूनी हालात पर से अंतर्राष्ट्रीय फोकस हटाना है।

बलूच कार्यकर्ता ने बताया, “पाकिस्तान की आर्थिक, सैन्य और राजनीतिक हालत बहुत खराब है; उसे यूनाइटेड बलूचिस्तान रिपब्लिक में बलूचों से बड़े पैमाने पर विरोध का सामना करना पड़ रहा है, और पाकिस्तान की सेना जमीन पर बुरी तरह शिकस्त खा चुकी है। अपनी हार से दुनिया का ध्यान हटाने के लिए, इस्लामाबाद एक बार फिर दुनिया को बेवकूफ बनाने के लिए मध्यस्थता का जाल बुनता दिखा।”

--आईएएनएस

केआर/