त्रिपुरा के मुख्यमंत्री ने चुनाव के बाद हुई हिंसा पर कड़ी कार्रवाई के आदेश दिए, प्रभावितों के लिए राहत की घोषणा
अगरतला, 21 अप्रैल (आईएएनएस)। त्रिपुरा के मुख्यमंत्री माणिक साहा ने पुलिस अधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण त्रिपुरा जनजातीय क्षेत्र स्वायत्त परिषद (टीटीएएडीसी) के चुनाव परिणामों की घोषणा के बाद हुई हिंसा में शामिल लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करें।
30 सदस्यों वाली टीटीएएडीसी में 28 चुने हुए प्रतिनिधि और राज्य सरकार द्वारा नामित दो सदस्य शामिल हैं। यह त्रिपुरा के 10,491 वर्ग किलोमीटर के कुल भौगोलिक क्षेत्र के लगभग 70 प्रतिशत हिस्से का प्रशासन संभालती है, जिससे यह विधानसभा के बाद राज्य की दूसरी सबसे महत्वपूर्ण संवैधानिक संस्था बन जाती है।
अगरतला के एक हॉस्टल में हिंसा से प्रभावित भाजपा कार्यकर्ताओं और समर्थकों से मुलाकात करने के बाद मुख्यमंत्री ने कहा कि ऐसी घटनाओं को बिल्कुल भी बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा, "मैं स्थिति की समीक्षा करने के लिए मुख्य सचिव, पुलिस महानिदेशक और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों के साथ एक बैठक करूंगा।"
मीडिया से बात करते हुए साहा ने कहा कि डराने-धमकाने, हिंसा और आतंक फैलाने की तरकीबों से भाजपा को दबाया नहीं जा सकता। लोगों का आशीर्वाद ही हमारी सबसे बड़ी ताकत है।
2018 और 2023 के त्रिपुरा विधानसभा चुनावों के बाद की स्थिति का ज़िक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि राजनीतिक बदले की भावना से ऊपर उठकर राज्य में शांति बहाल करने के प्रयास किए गए थे। उन्होंने कहा, "फिर भी, कुछ समूह अपना दबदबा कायम करने के लिए हिंसा का सहारा लेते रहते हैं। राज्य सरकार कानून-व्यवस्था बिगाड़ने वाले किसी भी व्यक्ति के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई करने के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध है।"
साहा ने आश्वासन दिया कि हिंसा से प्रभावित लोगों के पुनर्वास और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए तत्काल कदम उठाए जाएंगे। उन्होंने कहा, "त्रिपुरा सार्वजनिक संपत्ति नुकसान वसूली अधिनियम 2021 के तहत, सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने के लिए ज़िम्मेदार व्यक्तियों को जवाबदेह ठहराया जाएगा। उनसे मुआवज़ा वसूला जाएगा और प्रभावित परिवारों के बीच वितरित किया जाएगा।"
एक फेसबुक पोस्ट में, मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि पहले चरण में 258 परिवारों को मदद दी जाएगी। उन्होंने कहा, "उन्हें राहत और सहायता देने के लिए मुख्यमंत्री राहत कोष से 64.50 लाख रुपये की राशि मंज़ूर की गई है।"
इससे पहले, राज्य भाजपा अध्यक्ष और राज्यसभा सांसद राजीव भट्टाचार्जी ने भी उन पार्टी कार्यकर्ताओं से मुलाक़ात की, जो कथित तौर पर टीएमपी कार्यकर्ताओं द्वारा की गई हिंसा के कारण अपने घरों से भाग गए थे। उन्होंने बताया कि नतीजों की घोषणा के बाद राज्य के अलग-अलग हिस्सों में सैकड़ों भाजपा कार्यकर्ता और समर्थक बेघर हो गए।
भट्टाचार्जी ने कहा कि मुख्यमंत्री हालात का जायज़ा लेने के लिए एक उच्च-स्तरीय बैठक बुलाएंगे। उन्होंने आगे आरोप लगाया कि पश्चिम त्रिपुरा की जिरानिया सीट से भाजपा उम्मीदवार अभिजीत देबबर्मा के घर में तोड़फोड़ की गई और उनके माता-पिता पर संदिग्ध टीएमपी समर्थकों ने हमला किया।
भाजपा नेता अगरतला में शहीद भगत सिंह यूथ हॉस्टल गए, जहां हिंसा के शिकार लोगों ने पनाह ली हुई है। इन लोगों को भरोसा दिलाया कि उनकी जल्द से जल्द सुरक्षित वापसी सुनिश्चित करने के लिए सभी ज़रूरी कदम उठाए जाएंगे।
नतीजों की घोषणा के बाद टीएमपी प्रमुख प्रद्योत बिक्रम माणिक्य देबबर्मा ने पार्टी कार्यकर्ताओं से हिंसा से दूर रहने की अपील की। पूर्व राजघराने से ताल्लुक रखने वाले देबबर्मा ने मीडिया से कहा, "हमें पाकिस्तान और बांग्लादेश में जमात-ए-इस्लामी के खिलाफ लड़ना चाहिए। हमें आपस में नहीं लड़ना चाहिए। अगर एक समुदाय दूसरे समुदाय से लड़ता है, तो यह हम सभी के लिए नुकसानदायक होगा।"
भाजा के नेतृत्व वाली गठबंधन सरकार में साझीदार टीएमपी ने टीटीएएडीसी चुनावों में 28 में से 24 सीटें जीतीं। भाजपा को सिर्फ चार सीटें मिलीं।
--आईएएनएस
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