नागेंद्र का विपक्ष पर आरोप, कहा- ‘दलित मंत्री बना तो मनुवादियों को तकलीफ’
बेंगलुरु, 19 अगस्त (आईएएनएस)। कर्नाटक विधानसभा में भाजपा और जेडीएस द्वारा हंगामा किए जाने और आदिवासी कल्याण मामले में अपने इस्तीफे की मांग को लेकर मंत्री बी नागेंद्र ने बुधवार को विपक्ष की आलोचना की है।
उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष उन्हें निशाना बना रहा है और “मनुवादी” किसी तरह एक दलित और आदिवासी नेता को मंत्रिमंडल से हटाने की साजिश कर रहे हैं। नागेंद्र ने सवाल उठाया कि सरकार की ओर से इस मुद्दे पर विधानसभा में चर्चा के लिए तैयार होने के बावजूद विपक्ष लगातार उनके इस्तीफे की मांग क्यों कर रहा है।
बेंगलुरु में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए नागेंद्र ने कहा, “क्यों? क्योंकि एक दलित फिर से मंत्री बन गया है। एक आदिवासी समुदाय का व्यक्ति फिर से मंत्री बन गया है। ये मनुवादी किसी तरह हमें मंत्रिमंडल से हटाने और पद से बाहर करने की साजिश कर रहे हैं।”
हाल ही में दूसरी बार मंत्रिमंडल में शामिल किए गए नागेंद्र ने कहा कि भाजपा और जेडीएस जानबूझकर विधानसभा की कार्यवाही बाधित कर रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष वाल्मीकि निगम मामले और राज्य से जुड़े अन्य मुद्दों पर चर्चा में हिस्सा लेने के बजाय उनके इस्तीफे की मांग कर रहा है।
नागेंद्र ने कहा कि वह विधानसभा में विपक्ष के सवालों का सामना करने और कर्नाटक महर्षि वाल्मीकि अनुसूचित जनजाति विकास निगम में कथित अनियमितताओं से जुड़े तथ्यों को स्पष्ट करने के लिए तैयार हैं।
उन्होंने दावा किया कि निगम से 187 करोड़ रुपये की राशि बिना बोर्ड की बैठक के और उनकी तथा निगम के अध्यक्ष की जानकारी के बिना स्थानांतरित की गई। नागेंद्र ने कहा कि निगम के कामकाज में उनकी भूमिका सीमित थी और अधिकारियों ने आवश्यक वित्तीय मंजूरी लिए बिना यह राशि स्थानांतरित की थी।
उन्होंने बताया कि निगम के लेखा अधीक्षक पी चंद्रशेखर की मौत के बाद जांच के आदेश दिए गए और 31 मई 2024 को विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया गया।
नागेंद्र के मुताबिक, 187 करोड़ रुपये में से 100 करोड़ रुपये की राशि अनियमितता सामने आने के तुरंत बाद फ्रीज कर दी गई थी। वहीं, बाकी 87 करोड़ रुपये यूनियन बैंक ऑफ इंडिया के जरिए हैदराबाद भेजे गए और बाद में करीब 800 खातों में बांट दिए गए।
उन्होंने दावा किया कि जांचकर्ताओं ने इन लेन-देन का पता लगा लिया है और अब तक करीब 79 करोड़ रुपये बरामद किए जा चुके हैं। उन्होंने कहा कि बाकी राशि या तो बरामद हो चुकी है या उसकी बरामदगी की प्रक्रिया जारी है।
नागेंद्र ने कहा कि उन्होंने पहले स्वेच्छा से मंत्रिमंडल से इस्तीफा दिया था, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि उनके पद का जांच पर किसी भी तरह का प्रभाव न पड़े। उन्होंने कहा कि जब एफआईआर दर्ज की गई थी, तब कथित लेन-देन की एक भी राशि उनके खाते या उनसे जुड़े किसी खाते में नहीं पहुंची थी।
उन्होंने कहा, “मैं निर्दोष हूं और मुझे इस बात का गहरा दुख है कि आप एक दलित को अपराधी के तौर पर पेश करने की कोशिश कर रहे हैं।”
नागेंद्र ने अपने इस्तीफे के बाद प्रवर्तन निदेशालय की कार्रवाई का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि जांच के दौरान उन्हें गिरफ्तार कर जेल भेजा गया था। इसके बाद उन्होंने अदालत का रुख किया और राहत हासिल की। इसके बाद उन्होंने दोबारा मंत्री के रूप में सेवा करने का अवसर मांगा।
गौरतलब है कि कर्नाटक के आदिवासी कल्याण से जुड़ा यह घोटाला राज्य सरकार के कर्नाटक महर्षि वाल्मीकि अनुसूचित जनजाति विकास निगम लिमिटेड से करीब 89 से 94 करोड़ रुपये की अवैध निकासी से जुड़ा है। यह रकम फर्जी खातों और शेल कंपनियों के जरिए कथित तौर पर डायवर्ट की गई थी।
मई 2024 में निगम के एक लेखा अधीक्षक की आत्महत्या के बाद यह मामला सामने आया। उन्होंने एक नोट छोड़ा था, जिसमें निगम के धन को कथित तौर पर अनधिकृत तरीके से स्थानांतरित किए जाने का विवरण दिया गया था।
करीब 89 से 94 करोड़ रुपये की राशि कथित तौर पर आंध्र प्रदेश और तेलंगाना सहित विभिन्न स्थानों पर मौजूद फर्जी खातों में भेजी गई और उसका दुरुपयोग किया गया। घोटाला सामने आने के बाद तत्कालीन आदिवासी कल्याण मंत्री बी. नागेंद्र ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया था।
--आईएएनएस
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