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आदिवासी छात्र अब विज्ञान, इंजीनियरिंग और मेडिकल की पढ़ाई कर रहे हैं: भूपेंद्र पटेल

 

दाहोद, 24 जून (आईएएनएस)। गुजरात के आदिवासी इलाकों में साइंस, इंजीनियरिंग और मेडिकल की पढ़ाई के अवसर बढ़ रहे हैं। इसे देखते हुए मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने बुधवार को कहा कि दूर-दराज के आदिवासी इलाकों के छात्र अब ऐसे प्रोफेशनल कोर्स और करियर अपना पा रहे हैं, जिन्हें पहले सीमित शिक्षा सुविधाओं की वजह से चुनना मुश्किल होता था।

दाहोद जिले में 24वें 'शाला प्रवेशोत्सव' (स्कूल में दाखिले का अभियान) के दूसरे दिन लोगों को संबोधित करते हुए पटेल ने मोती खराज, राहाडुंगरी और गंगारदा गांवों के स्कूलों में 300 से ज्यादा बच्चों का दाखिला कराया। उन्होंने कहा कि आदिवासी इलाकों से अशिक्षा खत्म करने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की शुरू की गई पहल अब शिक्षा के विकास के लिए एक बड़े आंदोलन में बदल गई है।

पटेल ने कहा कि आदिवासी इलाकों से अशिक्षा का कलंक मिटाने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा शुरू किया गया स्कूल नामांकन उत्सव आज शिक्षा के क्षेत्र में विकास का एक विशाल वटवृक्ष बन गया है।

उन्होंने कहा कि आदिवासी समुदायों की शिक्षा से जुड़ी जो उम्मीदें दशकों से अधूरी थीं, वे अब पूरी हो रही हैं।

पटेल के अनुसार, नामांकन अभियान के पिछले चरणों में जिन बच्चों ने स्कूलों में दाखिला लिया था, वे आगे चलकर डॉक्टर, इंजीनियर और पायलट बने हैं। यह शिक्षा तक पहुंच बेहतर बनाने के लगातार प्रयासों के दीर्घकालिक असर को दिखाता है।

उन्होंने कहा कि शाला प्रवेशोत्सव शिक्षा के क्षेत्र में बदलाव और बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए एक बड़ा जन-अभियान है।

पटेल ने कहा कि राज्य सरकार ने आधुनिक शैक्षिक बुनियादी ढांचा तैयार करने और ग्रामीण व दूरदराज के इलाकों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित करने पर ध्यान केंद्रित किया है।

उन्होंने कहा कि स्कूलों में स्मार्ट क्लासरूम, कंप्यूटर लैब, इंटरनेट कनेक्टिविटी और आधुनिक साइंस लैब की सुविधा दी गई है, जिससे गांवों और दूर-दराज इलाकों के छात्र भी आधुनिक तरीकों से सीख सकें और तेजी से बदलती दुनिया में मुकाबला कर सकें।

उन्होंने कहा कि शिक्षा में गुणात्मक बदलाव लाने के मकसद से शुरू किए गए कई सरकारी अभियानों और योजनाओं की वजह से छात्र पढ़ाई-लिखाई में नई ऊंचाइयां हासिल कर पाए हैं।

स्कूल छोड़ने वाले बच्चों की संख्या कम करने की कोशिशों का जिक्र करते हुए पटेल ने कहा कि जो बच्चे स्कूल छोड़ चुके थे, उन्हें फिर से शिक्षा व्यवस्था से जोड़ने के लिए खास पहल की जा रही थी। अधिकारी और शिक्षा विभाग के कर्मचारी ऐसे बच्चों के घर जा रहे थे, उनकी मुश्किलों को समझ रहे थे और उन्हें स्कूल लौटने के लिए प्रोत्साहित कर रहे थे।

मुख्यमंत्री ने माता-पिता से यह भी अपील की कि वे अपने बच्चों की शिक्षा में सक्रिय भागीदार बनें।

--आईएएनएस

एमएस/