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ऑपरेशन ग्लोबल हंट के तहत एनसीबी की बड़ी कामयाबी, चार अंतरराष्ट्रीय ड्रग तस्करों का प्रत्यर्पण

 

नई दिल्ली, 15 अगस्त (आईएएनएस)। नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी) ने अपने विशेष अभियान 'ऑपरेशन ग्लोबल हंट' के तहत चार कुख्यात अंतरराष्ट्रीय ड्रग तस्करों का प्रत्यर्पण कराया है। यह कार्रवाई प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नशामुक्त भारत के संकल्प को साकार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

वरिष्ठ अधिकारियों के मुताबिक केंद्र सरकार के कूटनीतिक प्रयासों के चलते कई देशों को यह भरोसा दिलाया गया कि अंतरराष्ट्रीय ड्रग सिंडिकेट चलाने वाले सरगनाओं को शरण देना सुरक्षा के लिहाज से गंभीर खतरा पैदा कर सकता है।

प्रत्यर्पित किए गए चार बड़े ड्रग तस्करों में वीरेंद्र सिंह बसोया शामिल है। उसे संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) से भारत लाया गया। वीरेंद्र सिंह बसोया को लगभग 13,000 करोड़ रुपए के अंतरराष्ट्रीय ड्रग कार्टेल का मास्टरमाइंड माना जाता है।

इसके अलावा दाऊद इब्राहिम के करीबी सहयोगी सलीम डोला को मलेशिया में गिरफ्तार किया गया और तुर्किये के रास्ते भारत लाया गया। वहीं भारतीय एजेंसियों ने प्रभदीप सिंह का अजरबैजान से तथा सीमा पार लॉजिस्टिक्स सप्लायर ऋतिक बजाज का यूएई से प्रत्यर्पण सुनिश्चित किया।

मोदी सरकार ने मादक पदार्थों के नेटवर्क के खिलाफ सख्त नीति अपनाई है। इसके तहत जांच और प्रवर्तन एजेंसियां अब केवल ड्रग्स की खेप पकड़ने तक सीमित नहीं हैं, बल्कि विदेशों में बैठकर पूरे नेटवर्क का संचालन करने वाले सरगनाओं तक पहुंचने और उन्हें कानून के दायरे में लाने पर विशेष ध्यान दे रही है।

जब से सरकार ने भारत को ड्रग-मुक्त बनाने का लक्ष्य घोषित किया है, तब से इस अभियान का नेतृत्व कर रही एनसीबी ने स्थानीय सप्लायरों, बिचौलियों, डिस्ट्रीब्यूटरों और डीलरों के खिलाफ अपनी कार्रवाई तेज कर दी है। हालांकि, अधिकारियों का कहना है कि नशीले पदार्थों के कारोबार को खत्म करने के लिए एजेंसियों को घरेलू नेटवर्क से आगे बढ़कर विदेशों से इस कारोबार को नियंत्रित करने वाले मुख्य सरगनाओं की पहचान करनी होगी।

एनसीबी ने यह भी सुनिश्चित किया है कि प्रत्यर्पण संबंधी अनुरोध मजबूत साक्ष्यों के साथ भेजे जाएं। इनमें वित्तीय लेनदेन के रिकॉर्ड, डिजिटल सबूत और संगठित मादक पदार्थ तस्करी में आरोपियों की कथित भूमिका से जुड़े विस्तृत दस्तावेज शामिल होते हैं। एक अधिकारी ने कहा, "इससे प्रत्यर्पण की प्रक्रिया को आसान बनाने में मदद मिलती है।

इसके अलावा, भारत ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय को भी यह समझाने में सफलता हासिल की है कि ऐसे अपराधियों को अपने देशों में शरण देना किस प्रकार के दुष्प्रभाव और सुरक्षा संबंधी खतरे पैदा कर सकता है।"

अधिकारियों के अनुसार, हालिया जांचों की सफलता का मुख्य कारण मादक पदार्थों की तस्करी को एक आपस में जुड़े नेटवर्क के रूप में देखना है। स्थानीय स्तर के ड्रग विक्रेताओं, लॉजिस्टिक्स सप्लायरों, बिचौलियों और अंतरराष्ट्रीय सरगनाओं की अलग-अलग जांच करने के बजाय पूरी शृंखला को एक साथ जोड़कर देखा जाता है।

इसी रणनीति के तहत एनसीबी ‘टॉप-टू-बॉटम’ और ‘बॉटम-टू-टॉप’ दोनों तरीके अपनाती है। यानी जांच एजेंसी नेटवर्क के शीर्ष पर बैठे सरगनाओं से लेकर जमीनी स्तर पर काम करने वाले तस्करों तक और निचले स्तर से ऊपर तक पूरे नेटवर्क की कड़ियों को खंगालती है। इस रणनीति का उद्देश्य केवल तस्करों को गिरफ्तार करना नहीं, बल्कि पूरे ड्रग कार्टेल और उसके तंत्र को ध्वस्त करना है।

--आईएएनएस

एसएके/वीसी