मेकेदातु बांध पर तमिलनाडु का सख्त रुख, नए मध्यस्थता पैनल बनाने के प्रस्ताव का मंत्री आधव अर्जुन ने किया बचाव
चेन्नई, 22 जून (आईएएनएस)। तमिलनाडु के मंत्री आधव अर्जुन ने सोमवार को मेकेदातु बांध विवाद पर एक नया मध्यस्थता पैनल बनाने के राज्य सरकार के प्रस्ताव का बचाव किया। उन्होंने तर्क दिया कि पीने के पानी की जरूरतों को पूरा करने के बहाने एक नया जलाशय बनाने से गंभीर कानूनी जटिलताएं पैदा हो सकती हैं और तमिलनाडु के हितों पर बुरा असर पड़ सकता है।
कर्नाटक में प्रस्तावित मेकेदातु बांध परियोजना के विरोध में तमिलनाडु सरकार ने विधानसभा में प्रस्ताव पेश किया है। हालांकि, सरकार के इस फैसले का एआईए़डीएमके और पीएमके समेत विपक्षी दलों ने आपत्ति जताई है।
विरोध के बाद मंत्री आधव अर्जुन ने नए प्रस्ताव पर कहा कि कावेरी प्रबंधन प्राधिकरण (सीएमए), जिसे कावेरी जल-बंटवारे की व्यवस्थाओं के कार्यान्वयन की देखरेख के लिए स्थापित किया गया था, वर्तमान में इस तरह से काम कर रहा है जिससे तमिलनाडु में चिंताएं पैदा हुई हैं।
मंत्री ने कहा, "कर्नाटक सरकार मेकेदातु बांध बनाने की कोशिश कर रही है और दावा कर रही है कि इसका मकसद पीने के पानी की जरूरतों को पूरा करना है। हालांकि, ऐसे उद्देश्यों के लिए एक नया बांध बनाने से कानूनी जटिलताएं पैदा हो सकती हैं और नदी के बहाव की दिशा में आगे पड़ने वाले राज्यों पर दीर्घकालिक प्रभाव पड़ सकते हैं।"
उन्होंने आरोप लगाया कि कावेरी प्रबंधन प्राधिकरण ने प्रस्तावित बांध के लिए विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) जमा करने में मदद करके कर्नाटक के प्रयासों का समर्थन किया है। उन्होंने सदन को बताया, "इस मुद्दे पर तमिलनाडु का कावेरी प्रबंधन प्राधिकरण के कामकाज से भरोसा उठ गया है।"
मंत्री के अनुसार, कानूनी विशेषज्ञों ने राज्य सरकार को सलाह दी है कि वह विवाद की स्वतंत्र रूप से जांच करने के लिए एक नए मध्यस्थता निकाय के गठन की मांग करे। उन्होंने तर्क दिया कि प्रस्तावित परियोजना के संबंध में तमिलनाडु की चिंताओं को दूर करने के लिए मौजूदा ढांचा अपर्याप्त था।
मंत्री अर्जुन ने कहा कि एक नए मध्यस्थता पैनल की मांग राज्य सरकार की उस व्यापक कानूनी रणनीति का हिस्सा है, जिसका मकसद मेकेदातु जलाशय बनाने के कर्नाटक के कदम का मुकाबला करना है। उन्होंने कहा कि एक नई निर्णय लेने वाली व्यवस्था तमिलनाडु को अपना पक्ष अधिक प्रभावी ढंग से रखने और अपने जल अधिकारों की रक्षा करने का अवसर देगी।
मंत्री ने कहा, "अगर सुप्रीम कोर्ट एक नए मध्यस्थता पैनल की स्थापना की अनुमति देता है, तो तमिलनाडु को कर्नाटक की योजनाओं को चुनौती देने और राज्य में किसानों और पीने के पानी के उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा करने के लिए जरूरी समय और कानूनी रास्ता मिल जाएगा।"
बता दें कि मेकेदातु प्रोजेक्ट तमिलनाडु और कर्नाटक के बीच विवाद का विषय बना हुआ है। तमिलनाडु लगातार इस प्रस्ताव का विरोध कर रहा है।
--आईएएनएस
डीसीएच/