पहली तिमाही में तमिलनाडु के कुल राजस्व में बढ़ोतरी दर्ज, केंद्र से मिलने वाले अनुदान में आई गिरावट
चेन्नई, 23 जुलाई (आईएएनएस)। वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में तमिलनाडु के कुल राजस्व में बढ़ोतरी दर्ज हुई है। दावा है कि यह बढ़ोतरी मुख्य रूप से बेहतर टैक्स कलेक्शन की वजह से हुई, जबकि केंद्र सरकार से मिलने वाले फंड में कमी आई है।
नियंत्रक व महालेखापरीक्षक (सीएजी) की रिपोर्ट में जारी शुरुआती आंकड़ों के अनुसार, राज्य को अप्रैल और जून 2026 के बीच कुल 64,944.97 करोड़ रुपए का रेवेन्यू मिला। यह पिछले वित्त वर्ष की इसी अवधि में मिले 63,755.70 करोड़ रुपए की तुलना में 1,189.27 करोड़ रुपए की बढ़ोतरी है।
आंकड़ों के अनुसार, इस तिमाही के दौरान तमिलनाडु का अपना टैक्स रेवेन्यू ही आय का मुख्य स्रोत बना रहा। टैक्स से होने वाली आय 60,061.72 करोड़ रुपए रही, जो इस तीन महीने की अवधि में राज्य की कुल कमाई का एक बड़ा हिस्सा था।
राज्य की आय के मुख्य स्रोतों में राज्य वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी), स्टाम्प ड्यूटी और रजिस्ट्रेशन चार्ज, सेल्स टैक्स, स्टेट एक्साइज ड्यूटी, मोटर व्हीकल टैक्स और अन्य लेवी शामिल हैं।
इन राजस्व प्राप्ति से केंद्र से मिलने वाली रकम में आई कमी की भरपाई करने में मदद मिली। टैक्स कलेक्शन के अलावा, तमिलनाडु ने अप्रैल-जून की अवधि में नॉन-टैक्स रेवेन्यू से 3,172 करोड़ रुपए कमाए। इसमें शुल्क, उपयोगकर्ता शुल्क, ब्याज से होने वाली आय, लाभांश और अन्य सरकारी सेवाओं से होने वाली आय शामिल है।
हालांकि, इस तिमाही के दौरान केंद्र सरकार से मिलने वाले फंड में काफी कमी आई। राज्य को केंद्रीय सहायता के तौर पर सिर्फ 1,710 करोड़ रुपए मिले, जो पिछले साल इसी अवधि में मिली राशि से काफी कम है।
केंद्र से मिलने वाली सहायता में कमी ने अधिक कर संग्रह से हुए फायदे को कुछ हद तक कम कर दिया।
पिछले वित्त वर्ष की पहली तिमाही में, तमिलनाडु ने टैक्स रेवेन्यू से 56,366.76 करोड़ रुपए और नॉन-टैक्स स्रोतों से 2,895.70 करोड़ रुपए जुटाए थे। इसके अलावा, राज्य को केंद्र सरकार से ग्रांट के तौर पर 4,493.23 करोड़ रुपए मिले थे, जो इस साल मिले फंड से काफी अधिक थे।
ताजा आंकड़ों से पता चला है कि तमिलनाडु ने बेहतर कर संग्रह और अधिक गैर-कर आय के जरिए अपनी वित्तीय स्थिति को मजबूत किया है, वहीं मौजूदा वित्त वर्ष की पहली तिमाही के दौरान राज्य की वित्तीय प्रवृत्ति में केंद्र से मिलने वाले अनुदान में कमी एक अहम बात रही है।
सीएजी के शुरुआती आंकड़े पब्लिक फाइनेंस को बनाए रखने में राज्य के अपने राजस्व स्रोतों की बढ़ती अहमियत को दर्शाते हैं, जबकि 2026-27 के शुरुआती तीन महीनों के दौरान केंद्र से मिलने वाले वित्तीय हस्तांतरण पर निर्भरता कम होती दिख रही है।
--आईएएनएस
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