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केरल : सीपीआई(एम) में बढ़ी आत्ममंथन की मांग, चुनावी हार के बाद पी. विजयन पर उठे सवाल

 

तिरुवनंतपुरम, 17 जून (आईएएनएस)। लगभग तीन दशकों तक, पूर्व मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन केरल में सीपीआई(एम) की सबसे प्रभावशाली आवाज बने रहे। वे ऐसे नेता थे जिनकी पार्टी के भीतर राजनीतिक सत्ता पर अक्सर कोई सवाल नहीं उठाया जाता था। लेकिन हालिया चुनावी हार के बाद एक बदलाव दिखने लगा है। जो आलोचना पहले बंद कमरों की बातचीत तक सीमित थी, वह अब सार्वजनिक मंचों पर भी सामने आ रही है।

सीपीआई(एम) के भीतर हालिया घटनाक्रम बताते हैं कि विजयन के आस-पास का राजनीतिक घेरा, जिसे कभी अभेद्य माना जाता था, उसमें अब पहली बार दरारें दिख रही हैं।

चुनाव में हार के बाद पार्टी की आंतरिक समीक्षा चर्चाओं, साथ ही वरिष्ठ नेताओं और युवा विंग की टिप्पणियों से पता चलता है कि संगठन के भीतर पार्टी के काम करने के तरीके, सार्वजनिक छवि और मतदाताओं से दूरी को लेकर बेचैनी बढ़ रही है।

वरिष्ठ सीपीआई(एम) नेता और केंद्रीय समिति के सदस्य थॉमस इसाक की इस टिप्पणी को कि 'कम्युनिस्ट भ्रष्टाचार में शामिल नहीं होते' वाली पारंपरिक धारणा कमजोर हुई है, व्यापक रूप से पूर्व विजयन सरकार की दबी-छिपी आलोचना के तौर पर देखा जा रहा है।

उनकी इस चेतावनी ने कि केवल विकास की उपलब्धियों से चुनाव नहीं जीते जा सकते और कम्युनिस्टों को कम्युनिस्टों की तरह ही रहना चाहिए, पार्टी के भीतर राजनीतिक चर्चाओं को जन्म दिया है।

डीवाईएफआई के पथानामथिट्टा जिला सम्मेलन में यह आलोचना और भी सीधी हो गई, जहां एक प्रतिनिधि ने कथित तौर पर चुनाव प्रचार के दौरान विजयन की विवादास्पद टिप्पणी 'घर जाओ और पूछो' पर सवाल उठाया और कहा कि इस तरह के अंदाज ने पार्टी की छवि को नुकसान पहुंचाया है।

अन्य वरिष्ठ नेताओं की टिप्पणियों ने भी आंतरिक पुनर्विचार की धारणा को और मजबूत किया है।

पूर्व मंत्री पी. राजीव ने माना कि पार्टी के कुछ बयानों ने लोगों के बीच गलत धारणा बनाई है, जबकि सीपीआई(एम) के महासचिव एम.ए. बेबी ने वामपंथी आंदोलन में दक्षिणपंथी प्रवृत्तियों के प्रभाव के खिलाफ आगाह किया।

सीपीआई(एम) के अपने समीक्षा दस्तावेज में, शीर्ष नेतृत्व को सीधे दोष से बचाते हुए, कई राजनीतिक विफलताओं को स्वीकार किया गया है, जिनमें 'ग्लोबल अयप्पा संगमम' मुद्दे को संभालने का तरीका, उम्मीदवार चयन में गलतियां और पारंपरिक समर्थक आधार के कुछ हिस्सों का खिसकना शामिल है।

इन घटनाक्रमों के समय ने राजनीतिक महत्व की एक और परत जोड़ दी है। यह उभरती हुई आलोचना उस दिन सामने आई है जब पिनाराई विजयन की बेटी वीना सीएमआरएल-एक्जिलॉजिक मामले के सिलसिले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के सामने पेश हुईं।

ईडी ने इससे पहले जांच के हिस्से के रूप में तिरुवनंतपुरम में विजयन के किराए के आवास पर तलाशी ली थी।

सालों तक, सीपीआई(एम) के भीतर विजयन के अधिकार को चुनौती देने की घटनाएं दुर्लभ और काफी हद तक दबी हुई थीं। मौजूदा हालात से पता चलता है कि पार्टी के अंदर चल रही बातचीत एक नए दौर में पहुंच गई है, जहां अब चिंताएं सिर्फ बंद दरवाजों के पीछे ही नहीं जताई जा रही हैं। यह देखना अभी बाकी है कि क्या यह किसी बड़े सुधार की प्रक्रिया की शुरुआत है या फिर तेजी से उभरते असंतोष की अभिव्यक्ति।

हालांकि, यह स्पष्ट बरसों बाद पहली बार, पिनाराई विजयन के बारे में राजनीतिक नैरेटिव न सिर्फ पार्टी के बाहर के आलोचक तय कर रहे हैं, बल्कि पार्टी के भीतर से भी ऐसी आवाजें उठ रही हैं।

--आईएएनएस

एससीएच/एएस