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तेलंगाना डीजीपी ने नेपाल और अन्य देशों के घरेलू कामगारों का डेटाबेस तैयार करने का दिया निर्देश

 

हैदराबाद, 8 जून (आईएएनएस)। तेलंगाना के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) सीवी आनंद ने सोमवार को अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे राज्य भर में नेपाल और अन्य देशों से आए घरेलू नौकरों का पूरा डेटा इकट्ठा करें।

उन्होंने दूसरे राज्यों के लोगों, खासकर घरेलू कामगार के तौर पर काम करने वाले नेपालियों से जुड़ी हाल की घटनाओं पर चिंता जताते हुए, उनके रहने की जगह और नौकरी से जुड़ी जानकारी वाला एक व्यवस्थित डेटाबेस बनाए रखने पर जोर दिया।

पिछले महीने नेपाल की एक घरेलू सहायिका ने अपने साथियों के साथ मिलकर हैदराबाद के पॉश इलाके जुबली हिल्स में एक रिटायर्ड आईपीएस अधिकारी की पत्नी की हत्या कर दी और कीमती सामान लेकर भाग गई। एक अन्य घटना में घरेलू सहायिका के तौर पर काम करने वाले एक नेपाली जोड़े ने अपने साथियों के साथ मिलकर अपने मालिक और उनकी पत्नी को बांध दिया, उन्हें बेहोश कर दिया और 60 तोला सोना, 15 किलो चांदी और अन्य कीमती सामान लेकर भाग गए।

इस बीच, डीजीपी ने 'स्टाफ ऑफिसर्स मीटिंग' को फिर से शुरू किया है। यह डीजीपी ऑफिस और विभागों के प्रमुखों के वरिष्ठ अधिकारियों के लिए हर दो हफ्ते में होने वाली एक बैठक है, जिसमें नीतियों, कार्यक्रमों और विभागों के बीच के मुद्दों पर चर्चा की जाती है। यह प्रक्रिया बंद हो गई थी, जिसके कारण विभाग के अलग-अलग विंग्स के बीच तालमेल की कमी साफ दिख रही थी।

डीजीपी ने बैठक के दौरान कई अहम मुद्दों जैसे बेहतर निगरानी और सुरक्षा के लिए विदेशी घरेलू कामगारों का व्यवस्थित डेटाबेस बनाना, सीसीटीएनएस2.0, टेक्नोलॉजी पर आधारित पुलिसिंग, और एआई, ड्रोन व डेटा इंटेलिजेंस सिस्टम को अपनाना आदि पर चर्चा की।

उन्होंने हैदराबाद, साइबराबाद, मलकजगिरी और फ्यूचर सिटी कमिश्नरेट के अधिकार क्षेत्रों, पुलिस स्टेशन की सीमाओं, सीमावर्ती गांवों के डिवीजनों और अधिकार क्षेत्र से जुड़े अन्य मामलों के पुनर्गठन पर वरिष्ठ अधिकारियों और कमिश्नरों के साथ विस्तार से चर्चा और समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे सर्कल, ज़ोन और गांवों के पुनर्गठन के लिए ऐसी व्यापक योजनाएं बनाएं जिससे प्रशासनिक दक्षता और काम करने की क्षमता सुनिश्चित हो सके।

बैठक में सीसीटीएनएस 2.0 को लागू करने, पुलिस व्यवस्था को मजबूत करने, मौजूदा मैनुअल प्रक्रियाओं को आधुनिक बनाने और भविष्य की पुलिसिंग पहलों की भी समीक्षा की गई। शुरुआती तौर पर यह तय किया गया कि नवंबर में 'पुलिस रिट्रीट' और अक्टूबर में 'महिला पुलिस सम्मेलन' आयोजित किया जाएगा।

महिला पुलिस कर्मियों के लिए जेंडर समानता और काम करने की स्थितियों को बेहतर बनाने के लिए, डीजीपी ने महिला पुलिस कर्मियों के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण को प्रभावी ढंग से लागू करने की सलाह दी।

डीजीपी ने आधुनिक पुलिसिंग में टेक्नोलॉजी के महत्व और टेक्नोलॉजी-बेस्ड पुलिसिंग सिस्टम को ज्‍यादा अपनाने की जरूरत पर जोर दिया। सीनियर अधिकारियों ने मुख्य एप्लीकेशन को लागू करने, सीसीटीएनएस 2.0 के विस्तार और टीजी कॉप्‍स प्लेटफॉर्म के ज्‍यादा इस्तेमाल पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि टेक्नोलॉजी पुलिसिंग की क्षमता को काफी बढ़ा सकती है, क्योंकि इससे डायल-100 रिस्पॉन्स, उपद्रवियों, असामाजिक तत्वों, गाड़ियों की तलाशी और डेटाबेस में अपराधियों के इतिहास से जुड़ी जानकारी तेजी से मिल सकती है।

उन्होंने अधिकारियों को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई)-बेस्ड पुलिसिंग, ड्रोन टेक्नोलॉजी, एचआरएमएस, डेटा इंटेलिजेंस सिस्टम और स्मार्ट एप्लीकेशन पर ध्यान देने का निर्देश दिया। उन्होंने अधिकारियों से 'तेलंगाना स्मार्ट पुलिसिंग - टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल' के विजन के साथ आगे बढ़ने को कहा।

मैनपावर मैनेजमेंट, गाड़ियों के ऑडिट, कर्मचारियों के इस्तेमाल और ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम पर भी चर्चा हुई। बैठक में ट्रैफिक मैनेजमेंट और रोड सेफ्टी ब्यूरो के कामकाज के लिए सिस्टम बनाने की भविष्य की जरूरतों, साथ ही खाने-पीने की चीजोंं में मिलावट रोकने के लिए खास तरीकों वगैरह पर भी विचार-विमर्श किया गया।

एक और बैठक में, डीजीपी ने कहा कि तेलंगाना राज्य पुलिस विभाग कभी टेक्नोलॉजी को अपनाने और उसके इस्तेमाल के मामले में देश के अग्रणी पुलिस संगठनों में से एक था। हालांकि, हाल के वर्षों में उपलब्ध टेक्नोलॉजी सिस्टम का ठीक से इस्तेमाल न होने और फील्ड-लेवल पर लागू करने में कमियों के कारण, विभाग कुछ क्षेत्रों में पिछड़ गया है।

वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए अलग-अलग यूनिट के अधिकारियों और एसएचओ को संबोधित करते हुए, डीजीपी ने उपलब्ध टेक्नोलॉजी संसाधनों का असरदार ढंग से इस्तेमाल करने और डेटा-बेस्ड पुलिसिंग सिस्टम को और मजबूत करने की जरूरत पर जोर दिया।

उन्होंने कहा कि टेक्नोलॉजी का मतलब सिर्फ़ सॉफ्टवेयर एप्लीकेशन बनाना नहीं है, बल्कि यह काफी हद तक उनके असरदार इस्तेमाल, लगातार अपडेट करने और रियल-टाइम डेटा मैनेजमेंट पर निर्भर करता है।

--आईएएनएस

एएसएच/डीकेपी