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तेलंगाना में बढ़ती मांग के बीच सरकारी दफ्तरों को बिजली बचाने के निर्देश, अल नीनो के प्रभाव से सरकार सतर्क

 

हैदराबाद, 19 अक्टूबर (आईएएनएस)। तेलंगाना में बिजली की बढ़ती मांग और अल नीनो के प्रभाव से उत्पादन में आई कमी को देखते हुए राज्य सरकार ने सरकारी कार्यालयों से बिजली का किफायती उपयोग करने को कहा है।

मुख्य सचिव संजय जाजू ने सोमवार को बताया कि सभी सरकारी कार्यालयों को निर्देश जारी किए गए हैं कि दिन के समय एयर कंडीशनर (एसी) को केवल आवश्यकता पड़ने पर ही 25 डिग्री सेल्सियस के तापमान पर चलाया जाए, जबकि शाम 6 बजे के बाद इनका उपयोग काफी कम कर दिया जाए।

उन्होंने कहा कि हालांकि राज्य में बिजली उत्पादन संतोषजनक नहीं रहा है, फिर भी सरकार कृषि और घरेलू जरूरतों के लिए बिजली की आपूर्ति जारी रखे हुए है। राज्य में उद्योगों पर बिजली कटौती लागू नहीं की जा रही है और औद्योगिक प्रबंधन को बिजली आपूर्ति के बारे में चिंता करने की आवश्यकता नहीं है।

उन्होंने अधिकारियों को राज्य के सभी ताप विद्युत केंद्रों में अधिकतम बिजली उत्पादन सुनिश्चित करने के लिए सभी आवश्यक उपाय करने का निर्देश दिया। उन्होंने यदाद्री ताप विद्युत केंद्र में विशेष रूप से तैनात पांच विशेष अधिकारियों को भी निर्देश दिया कि वे संयंत्र में बिजली उत्पादन को अधिकतम करने के लिए समर्पित उपाय करें।

मुख्य सचिव ने अधिकारियों को अल नीनो के प्रभावों के कारण पेयजल और बिजली की कमी को रोकने के लिए सूक्ष्म स्तर की आपातकालीन योजनाएं तैयार करने का भी निर्देश दिया। उन्होंने सरकार द्वारा पूर्व जिलों में स्थिति की निगरानी के लिए नियुक्त वरिष्ठ अधिकारियों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंस की और अल नीनो के मद्देनजर मौजूदा स्थितियों की समीक्षा की।

बैठक के दौरान मुख्य सचिव ने बताया कि राज्य सरकार ने अल नीनो के कारण उत्पन्न होने वाली गंभीर परिस्थितियों से निपटने के लिए विभागवार आपातकालीन योजनाएं तैयार कर ली हैं और समय-समय पर उचित निर्देश जारी कर रही है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि जमीनी स्तर पर भी इसी तरह की योजनाएं तैयार की जानी चाहिए।

उन्होंने कहा कि अल नीनो के प्रभाव को समझाने के लिए जल्द ही एक सर्वदलीय बैठक आयोजित की जाएगी। कैबिनेट उप-समिति की बैठक भी शीघ्र ही बुलाई जाएगी।

ऊर्जा विभाग के अधिकारियों ने बताया कि कृषि कार्यों के लिए समर्पित मोटर पंपों का उपयोग करके स्थानीय जल स्रोतों से अवैध रूप से पानी निकाला जा रहा है। इस अत्यधिक निकासी से बिजली का भार बढ़ रहा है और स्थानीय ट्रांसफार्मर जल रहे हैं।

मंजिरा और सिंगुर जलाशयों से पानी की आपूर्ति न होने के कारण अधिकारियों ने बताया कि इन जलाशयों से सामान्य रूप से प्रतिदिन 11 करोड़ गैलन (एमजीडी) पानी की आपूर्ति की पूर्ति वैकल्पिक स्रोतों से की जा रही है। इनमें मिशन भागीरथा से 6 करोड़ गैलन (एमजीडी) और कृष्णा नदी तथा अन्य स्रोतों से अतिरिक्त आपूर्ति शामिल है।

सरकार के विशेष मुख्य सचिव जयेश रंजन ने कहा कि हैदराबाद में बोरवेल खोदने की अनुमति केवल पेयजल उद्देश्यों के लिए और स्थापित नियमों के अनुसार ही दी जानी चाहिए। निर्माण या अन्य गतिविधियों के लिए किसी भी नए बोरवेल की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए। हालांकि पेयजल आवश्यकताओं के लिए मौजूदा बोरवेलों को गहरा करने की अनुमति दी जा रही है।

उन्होंने यह भी कहा कि हैदराबाद में नगरपालिका के पानी के नलों पर अवैध रूप से मोटर पंप लगाकर अत्यधिक मात्रा में पानी निकालने के खिलाफ एक विशेष अभियान चलाया जा रहा है। अवैध पानी के पंपों की पहचान और उन्हें हटाने के लिए यह अभियान हैदराबाद नगर निगम और अन्य एजेंसियों के समन्वय से चलाया जा रहा है।

उन्होंने घोषणा की कि 1 नवंबर से सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) से उपचारित जल को हरे पानी के टैंकरों के माध्यम से हैदराबाद के निर्माण स्थलों तक पहुंचाया जाएगा।

विशेष मुख्य सचिव विकास राज ने बताया कि रंगारेड्डी जिले में भूजल स्तर में काफी गिरावट आ रही है। इसलिए पीने के पानी की कमी न हो, इसके लिए वैकल्पिक योजनाएं तैयार की जा रही हैं और उन्हें लागू किया जा रहा है।

--आईएएनएस

एएसएच/वीसी