टैक्स और कस्टम ड्यूटी में बदलाव और वैश्विक स्तर पर अस्थिरता से 2026 की दूसरी छमाही निर्धारित होगी बुलियन की चाल
नई दिल्ली, 2 जुलाई (आईएएनएस)। वर्ष 2026 की दूसरी छमाही में टैक्स में बदलाव, कस्टम ड्यूटी में बढ़ोतरी और दुनिया भर में भू-राजनीतिक तनाव बुलियन की कीमतों को तय करने वाले मुख्य कारक होंगे। हालिया गिरावट के बाद कीमतों में उतार-चढ़ाव बने रहने और फिर कुछ समय के लिए कंसोलिडेशन आने की उम्मीद है। यह जानकारी गुरुवार को जारी एक रिपोर्ट में दी गई।
ऑल इंडिया जेम एंड ज्वैलरी डोमेस्टिक काउंसिल (जीजेसी) की रिपोर्ट के अनुसार, ज्वेलरी की मांग कम रहने की उम्मीद है, हालांकि त्योहारी सीजन में खासकर हल्के वजन वाली ज्वेलरी की कैटेगरी में बिक्री में तेजी आ सकती है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि इंडस्ट्री 'गोल्ड मॉनेटाइजेशन स्कीम' में सुधार और संभावित टैक्स बदलावों पर स्पष्टता का इंतजार कर रही है। साथ ही, भू-राजनीतिक जोखिम एक अहम कारक बने हुए हैं, जिनसे सुरक्षित निवेश के तौर पर सोने की मांग फिर से बढ़ सकती है।
रिपोर्ट में बताया गया कि साल के शुरुआती छह महीनों में सोने-चांदी की कीमतें ऐतिहासिक ऊंचाई पर पहुंच गई थीं, जिसके बाद कीमतों में गिरावट आई। इस उतार-चढ़ाव ने ग्राहकों की सोच और इंडस्ट्री के नजरिए को बदल दिया।
जनवरी 2026 में सोने की कीमतें 1,70,480 रुपए प्रति 10 ग्राम के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई थीं, जो जून के आखिर तक घटकर लगभग 1,42,800 रुपए प्रति 10 ग्राम हो गईं। वहीं, जनवरी में चांदी की कीमत 4,02,490 रुपए प्रति किलोग्राम से ऊपर चली गई थी और जून के आखिर तक घटकर लगभग 2,25,940 रुपए प्रति किलोग्राम रह गई।
रिपोर्ट में कहा गया है कि इन उतार-चढ़ाव ने निवेशकों को सुरक्षित निवेश की ओर प्रेरित किया, लेकिन बजट की सीमाओं के कारण गहनों की मांग में कमी आई।
काउंसिल के मुताबिक, ग्राहक अब हल्के वजन वाले गहनों के डिजाइन की ओर ज्यादा आकर्षित हो रहे हैं, जो बजट और बदलते फैशन ट्रेंड, दोनों को दर्शाता है।
काउंसिल ने बताया कि मई 2026 में कस्टम ड्यूटी में बढ़ोतरी की घोषणा से घरेलू कीमतें बढ़ गईं और खुदरा मांग पर असर पड़ा। जीएसटी का बोझ और नियमों का पालन करने की जरूरतों ने मुनाफे पर दबाव बनाए रखा, जिससे इन नियमों को तर्कसंगत बनाने की मांग उठी है।
काउंसिल ने 'गोल्ड मॉनेटाइजेशन स्कीम' में सुधार की अपनी मांग को भी दोहराया, ताकि घरों में बेकार पड़े सोने की वैल्यू का इस्तेमाल किया जा सके, आयात पर निर्भरता कम हो और घरेलू सप्लाई चेन मजबूत हो सके।
जीजेसी के चेयरमैन राजेश रोकड़े ने कहा, "आने वाले त्योहारों के मौसम और साल की दूसरी छमाही में शादियों के पीक सीजन से ज्वेलरी की मांग को, खासकर हल्के वजन वाली ज्वेलरी की कैटेगरी में, जबरदस्त सहारा मिलने की उम्मीद है।"
उन्होंने कहा कि इन सांस्कृतिक वजहों और सोने के साथ भारत के गहरे भावनात्मक जुड़ाव की वजह से, उतार-चढ़ाव के बावजूद बाजार मजबूत बना रहेगा।
उन्होंने कहा कि बाजार असाधारण रूप से ऊंचे स्तरों के बाद अब एडजस्ट हो रहा है और फ्यूचर्स कीमतों में सुधार के बावजूद रिटेल कीमतें ऊंची बनी हुई हैं।
--आईएएनएस
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