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तमिलनाडु में गहराया पेयजल संकट, कई जलाशय सूखे, कई जिलों में 10 दिन में एक बार मिल रहा पानी

 

चेन्नई, 27 जुलाई (आईएएनएस)। तमिलनाडु में दक्षिण-पश्चिम मानसून के लंबे समय तक विफल रहने के कारण पेयजल संकट लगातार गहराता जा रहा है। राज्य के कई हिस्सों में जलाशय, झीलें और भूजल स्रोत गंभीर रूप से सूख चुके हैं।

जल स्तर तेजी से गिरने के बीच शिकायतें बढ़ रही हैं कि तमिलनाडु वाटर सप्लाई एंड ड्रेनेज बोर्ड ने सबसे अधिक प्रभावित जिलों में निर्बाध पेयजल आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए पर्याप्त वैकल्पिक व्यवस्थाएं नहीं की हैं।

आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, राज्य के 90 प्रमुख बांधों और 14,000 से अधिक सिंचाई टैंकों का प्रबंधन करने वाले जल संसाधन विभाग ने उपलब्ध जल में चिंताजनक गिरावट दर्ज की है। राज्य के 90 बांधों में से 59 पूरी तरह सूख चुके हैं, जबकि 16 बांधों में केवल 25 से 50 प्रतिशत तक ही जल भंडारण शेष है।

स्थिति को सिंचाई टैंकों के सूखने से और भी गंभीर बना दिया है। राज्य के 3,489 सिंचाई टैंक पूरी तरह सूख चुके हैं, जबकि 6,158 टैंक तेजी से सूखने की कगार पर पहुंच गए हैं।

दक्षिण-पश्चिम मानसून की विफलता का असर केवल तमिलनाडु तक सीमित नहीं है। पड़ोसी दक्षिणी राज्यों में भी सामान्य से कम वर्षा दर्ज की गई है। इसके चलते जलाशयों में पानी की आवक में भारी गिरावट आई है, जिससे सिंचाई और पेयजल आपूर्ति दोनों प्रभावित हुई हैं।

नगर प्रशासन विभाग और ग्रामीण विकास विभाग के नियंत्रण वाले जल स्रोतों में भी पानी का स्तर काफी घट गया है लेकिन सतही जल स्रोतों के सिकुड़ने और भूजल स्तर में गिरावट के कारण बोर्ड द्वारा स्थापित कई बोरवेल अब पर्याप्त मात्रा में पानी नहीं दे पा रहे हैं। अधिकारियों और स्थानीय निवासियों का कहना है कि सीमित मात्रा में पानी निकालने के लिए पंपों को लंबे समय तक चलाना पड़ रहा है, जिससे बिजली की खपत बढ़ रही है, लेकिन जलापूर्ति में कोई खास सुधार नहीं हो रहा।

राज्य के कई जिले पहले से ही भीषण जल संकट का सामना कर रहे हैं। सबसे अधिक प्रभावित जिलों में विरुधुनगर, तिरुवन्नामलाई, तिरुनेलवेली, तिरुचिरापल्ली (तिरुची), तूतीकोरिन (थूथुकुडी), तंजावुर, नमक्कल, पेरम्बलूर, मदुरै, शिवगंगा, धर्मपुरी, कुड्डालोर और डिंडीगुल शामिल हैं।

कई स्थानों पर जहां पहले सप्ताह में एक बार पेयजल की आपूर्ति होती थी, अब वहां हर 10 दिन में केवल एक बार पानी दिया जा रहा है। इससे लोगों को निजी पानी के टैंकरों और अन्य अस्थायी स्रोतों पर निर्भर रहना पड़ रहा है।

इस बीच, तिरुवल्लूर और कांचीपुरम जिलों में भूजल की बिगड़ती स्थिति को लेकर भी चिंता बढ़ गई है। ये दोनों जिले चेन्नई के लिए पेयजल के प्रमुख स्रोत माने जाते हैं।

--आईएएनएस

एसएके/एएस