तमिलनाडु : तांबरम को जलभराव से मिलेगी मुक्ति, 111 करोड़ की स्टॉर्म वॉटर ड्रेन परियोजना का प्रस्ताव तैयार
चेन्नई, 27 जुलाई (आईएएनएस)। उत्तर-पूर्व मानसून शुरू होने में अब केवल कुछ महीने ही बचे हैं। ऐसे में तमिलनाडु के तांबरम सिटी म्युनिसिपल कॉरपोरेशन ने मध्यम बारिश के बाद भी गंभीर जलभराव का सामना करने वाले कई निचले इलाकों की पुरानी बाढ़ और जलभराव की समस्या का स्थायी समाधान करने के उद्देश्य से 111.08 करोड़ रुपये की व्यापक स्टॉर्म वॉटर ड्रेन परियोजना का प्रस्ताव तैयार किया है।
निगम ने 30.37 किलोमीटर लंबाई वाले 40 स्टॉर्म वॉटर ड्रेन कार्यों के लिए प्रशासनिक स्वीकृति और वित्तीय मंजूरी प्राप्त करने हेतु तमिलनाडु सरकार को प्रस्ताव भेजा है।
प्रस्तावित ड्रेनेज नेटवर्क से गुडविल नगर, समथुवा पेरियार नगर, जज कॉलोनी, चितलापक्कम के कुछ हिस्सों और निगम सीमा के भीतर स्थित कई अन्य जलभराव प्रभावित इलाकों को लाभ मिलेगा।
गुडविल नगर और आसपास के क्षेत्रों के निवासियों के लिए जलभराव हर साल की बड़ी समस्या बन चुका है। भारी बारिश के कुछ घंटों के भीतर ही सड़कें पानी में डूब जाती हैं, जिससे यातायात बाधित होता है, संपत्तियों को नुकसान पहुंचता है और लोगों का दैनिक जीवन प्रभावित होता है। पिछले कुछ वर्षों में कई स्टॉर्म वॉटर ड्रेन परियोजनाएं पूरी होने के बावजूद, अनेक इलाके हर मानसून में जलभराव का सामना कर रहे हैं।
निगम अधिकारियों के अनुसार, प्रस्तावित परियोजना को दो चरणों में विभाजित किया गया है। पहले चरण में 95.51 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत से 23.1 किलोमीटर लंबाई के 25 स्टॉर्म वॉटर ड्रेन कार्य किए जाएंगे, जबकि दूसरे चरण में 15.57 करोड़ रुपये की लागत से 7.27 किलोमीटर लंबाई के 15 कार्य शामिल हैं।
निगम आयुक्त एस. बालाचंदर ने बताया कि यह नया प्रस्ताव पिछले कुछ मानसून के दौरान किए गए व्यापक फील्ड निरीक्षण और बाढ़ मानचित्रण (फ्लड मैपिंग) के आधार पर तैयार किया गया है।
उन्होंने बताया कि ड्रेनेज सिस्टम की कमियों और जलभराव के पुराने रिकॉर्ड को देखते हुए प्रभावित इलाकों की पहचान की गई है। नए ड्रेनेज सिस्टम का खाका (डिजाइन) इस तरह तैयार किया गया है, जिससे वह मुख्य जल निकासी तंत्र से जुड़ सके। इससे भारी बारिश के दौरान भी पानी का निकास तेजी से होगा और जलभराव की समस्या नहीं होगी।
राज्य सरकार से मंजूरी मिलने के बाद निगम की योजना प्राथमिकता के आधार पर कार्य शुरू करने की है, ताकि उत्तर-पूर्व मानसून के चरम दौर से पहले बाढ़ से निपटने की तैयारियों को मजबूत किया जा सके।
इससे पहले निगम ने राज्य आपदा प्रतिक्रिया कोष (एसडीआरएफ) के तहत 37.59 करोड़ रुपये की लागत से 15 किलोमीटर लंबाई के स्टॉर्म वॉटर ड्रेन का निर्माण पूरा किया था। हालांकि, स्थानीय निवासियों और नागरिक संगठनों का कहना है कि पहले किए गए कार्य अपेक्षित परिणाम नहीं दे सके। उनका आरोप है कि कई ड्रेनों का निर्माण पर्याप्त ढलान (ग्रेडिएंट) के बिना किया गया, जिससे वर्षा जल का प्राकृतिक प्रवाह बाधित हो गया।
नागरिक कार्यकर्ताओं ने निर्माण कार्यों के दौरान कड़ी निगरानी सुनिश्चित करने की मांग की है। साथ ही उन्होंने निगम से नई अवसंरचना विकसित करने के साथ-साथ प्राकृतिक जलमार्गों के पुनर्जीवन, अतिक्रमण हटाने और मौजूदा जल निकासी चैनलों को चौड़ा करने की भी अपील की है। उनका कहना है कि इन उपायों से जल निकासी व्यवस्था अधिक प्रभावी होगी और सार्वजनिक धन का बेहतर उपयोग सुनिश्चित किया जा सकेगा।
--आईएएनएस
एसएके/एएस