एंटी-पेपर लीक बिल पर सुप्रिया सुले की मांग, 'जेपीसी बनाए सरकार, छात्रों पर पुलिस कार्रवाई की हो जांच'
नई दिल्ली, 28 जुलाई (आईएएनएस)। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार गुट) की सांसद सुप्रिया सुले ने एंटी-पेपर लीक कानून को लेकर केंद्र सरकार से संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) गठित करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि इस समिति में विपक्ष के सदस्यों को भी शामिल किया जाना चाहिए, ताकि पेपर लीक रोकने के लिए एक मजबूत और प्रभावी कानून तैयार किया जा सके।
लोकसभा में लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026 पर चर्चा के दौरान सुप्रिया सुले ने हालिया पेपर लीक विरोधी प्रदर्शनों के दौरान देशभर में युवाओं पर कथित पुलिस कार्रवाई की जांच की भी मांग उठाई।
भाजपा सांसद तेजस्वी सूर्या के "डेलुलु" वाले बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए सुप्रिया सुले ने कहा, "आप भी इस भ्रम में मत रहिए कि युवा आपके साथ हैं।" इससे पहले मंगलवार को तेजस्वी सूर्या ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा था कि पेपर लीक के मुद्दे को लेकर विपक्ष यह सोच रहा है कि युवा उनके साथ हैं, इससे बड़ा भ्रम कोई नहीं हो सकता।
सुप्रिया सुले ने लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम, 2024 के मसौदे की सराहना करते हुए कहा कि यह मुद्दा राजनीतिक बहस का नहीं, बल्कि छात्रों के भविष्य से जुड़ा विषय है।
उन्होंने कहा, "मैं विपक्ष में हूं, फिर भी कहूंगी कि यह विधेयक अच्छा था, क्योंकि यह बहस करने का विषय नहीं है।" हालांकि, उन्होंने सवाल उठाया कि अगर 2024 का कानून अपने उद्देश्यों को पूरा कर रहा था तो बाद में समिति बनाने की जरूरत क्यों पड़ी। उन्होंने कहा, "अगर यह विधेयक 2024 में ही प्रभावी तरीके से लागू हो गया होता तो हमें जंतर-मंतर पर प्रदर्शन नहीं देखने पड़ते।"
सुप्रिया सुले ने कहा कि 21 जून 2024 को विधेयक आया और कानून बना, लेकिन 22 जून को सिफारिशों के लिए समिति गठित कर दी गई। उन्होंने पूछा कि जब पहले कोई समिति नहीं थी तो कानून लाने की इतनी जल्दबाजी क्यों की गई।
नीट पेपर लीक के बाद छात्रों की आत्महत्या का मुद्दा उठाते हुए सुप्रिया सुले ने कहा कि जब बच्चों का मामला हो तो सभी सांसदों को संवेदनशीलता, सहानुभूति और विनम्रता के साथ बात करनी चाहिए।
उन्होंने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि नीट को लेकर तमिलनाडु की सत्तारूढ़ डीएमके के साथ बातचीत नहीं की गई। उन्होंने कहा कि देश में अमीर और गरीब के बीच अंतर बढ़ रहा है और कोचिंग संस्थानों का कारोबार बहुत बड़ा हो चुका है।
सुप्रिया सुले ने एनसीपी नेता छगन भुजबल के बयान का भी उल्लेख किया, जिसमें उन्होंने कहा था कि अगर पूर्व शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान 15 दिन पहले इस्तीफा दे देते तो इतना बड़ा विवाद नहीं होता। सुले ने कहा, "सिर्फ मैं नहीं, बल्कि भाजपा के सहयोगी दल भी यह बात कह रहे हैं।"
उन्होंने भुजबल के उस बयान का भी जिक्र किया, जिसमें उन्होंने छात्रों के प्रदर्शन को एक संकेत बताया था। सुले ने कहा कि उम्मीद है केंद्र सरकार इस संदेश को सुनेगी।
सुप्रिया सुले ने देशभर में पेपर लीक विरोधी आंदोलन के दौरान युवाओं पर कथित पुलिस बर्बरता की जांच के लिए विशेष जांच दल (एसआईटी) गठित करने की मांग की।
उन्होंने कहा, "जो दृश्य सामने आए वे भयावह थे। एक पारदर्शी जांच होनी चाहिए कि उस दिन क्या गलत हुआ, ताकि भविष्य में ऐसी घटना दोबारा न हो।" प्रदर्शनों के पीछे विदेशी फंडिंग के आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए उन्होंने कहा कि बच्चे खुद इस पर मीम बना रहे थे।
अपनी पार्टी की दो प्रमुख मांगों को सामने रखते हुए सुप्रिया सुले ने कहा कि अगर सरकार वास्तव में व्यवस्था बदलना चाहती है तो जेपीसी का गठन करे, सभी हितधारकों को बुलाए और ऐसा कानून बनाए जिसे कोई लीक न कर सके। उन्होंने कहा, "सर्वदलीय बैठक बुलाइए, हम सभी एक ही पक्ष में हैं।"
उन्होंने आगे कहा कि दूसरी मांग यह है कि देशभर में जहां भी छात्रों पर कार्रवाई हुई है, वहां की घटनाओं की जांच कराई जाए। उन्होंने कहा कि यह लड़ाई किसी राजनीतिक दल के बीच नहीं, बल्कि व्यवस्था और युवाओं की आकांक्षाओं के बीच है।
--आईएएनएस
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