कर्नाटक के सीएम शिवकुमार मिल मालिकों और विरोध कर रहे गन्ना किसानों के साथ करेंगे बातचीत
बेलगावी, 26 अक्टूबर (आईएएनएस)। गन्ने के दाम को लेकर हो रहे विरोध-प्रदर्शनों के बीच सोमवार को मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार बेलगावी पहुंचे, जहां वे चीनी मिल मालिकों और किसानों के साथ कई बैठकें करेंगे।
मुख्यमंत्री शिवकुमार सोमवार सुबह 11 बजे चीनी मिल मालिकों से मुलाकात करेंगे और दोपहर 3:30 बजे गन्ना किसानों के प्रतिनिधियों के साथ एक अलग बैठक करेंगे। ये बैठकें बेलगावी के सुवर्ण विधान सौधा में होंगी।
इस बीच बेलगावी में किसानों ने अपनी गन्ने की फसल का उचित मूल्य और अन्य मांगों को लेकर राज्य राजमार्ग को जाम कर विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया है।
बेलगावी के कित्तूर में मीडिया से बात करते हुए शिवकुमार ने कहा कि कर्नाटक के किसानों का अस्तित्व बचाना उनकी प्राथमिकता है और वह इसी मुद्दे पर किसानों और चीनी मिल मालिकों से चर्चा करने के लिए बेलगावी आए हैं।
उन्होंने कहा, "मैं इस बारे में बात नहीं करूंगा कि दूसरे राज्यों की सरकारें अपने गन्ना किसानों को क्या दे रही हैं। सबसे पहले कर्नाटक के हमारे किसानों का बचना जरूरी है। मैं इस मुद्दे पर चर्चा करूंगा। इसीलिए मैं बेंगलुरु में बैठक करने के बजाय यहां आया हूं।"
उन्होंने कहा, "मैं चीनी मिल मालिकों और किसानों से बात करूंगा। मुझे उनकी बात भी सुननी होगी। इससे पहले हमने किसानों को प्रति क्विंटल 300 रुपये की अतिरिक्त राशि दी थी और पिछली सिद्दारमैया सरकार ने 50 रुपये दिए थे। हमने मिल मालिकों से भी योगदान देने के लिए कहा है। यहां एक समस्या है और मैंने दूसरे राज्यों के साथ भी इस मुद्दे पर चर्चा की है। मैं सभी से बात करूंगा और आगे की राह तय करूंगा।"
मुख्यमंत्री शिवकुमार ने कहा कि उन्हें सबसे पहले मिल मालिकों से बात करनी होगी, क्योंकि अंततः उन्हीं को किसानों को पैसे देने हैं। किसान मुख्य रूप से गन्ने के लिए प्रति टन 1,000 रुपये की सब्सिडी तय करने की मांग कर रहे हैं। इसके अलावा, वे गन्ने का दाम 5,500 रुपये प्रति टन तय करने की भी मांग कर रहे हैं। साथ ही, वे 500 करोड़ रुपये की राशि आरक्षित करने की भी मांग कर रहे हैं।
सोमवार को होने वाली बातचीत का नतीजा यह तय करने में अहम होगा कि चल रहे विरोध-प्रदर्शन खत्म होंगे या नहीं और क्या गन्ने के लिए किसानों की 'लाभदायक कीमत' की मांग पूरी की जाएगी।
उत्तरी कर्नाटक में गन्ना किसानों ने 'कर्नाटक राज्य रैथा संघ' और 'हसिरु सेना' जैसे संगठनों के नेतृत्व में बड़े पैमाने पर विरोध-प्रदर्शन किए हैं और राजमार्गों को जाम किया है। इनमें पुणे-बेंगलुरु और बेंगलुरु-मैसूरु राजमार्ग भी शामिल हैं। उनकी मांग है कि 2026-27 के पेराई सीजन के लिए गन्ने की कीमतें बढ़ाई जाएं और नीतियों में बदलाव किया जाए।
किसान गन्ने के लिए कुल 5,500 रुपये प्रति टन की कीमत, कर्नाटक सरकार से 1,000 रुपये प्रति टन की अतिरिक्त 'स्टेट एडवाइज्ड प्राइस' (एसएपी) और चीनी के लिए उच्च 'न्यूनतम समर्थन मूल्य' (एमएसपी) की मांग कर रहे हैं।
केंद्र सरकार ने 2026-27 के लिए 'फेयर एंड रेमुनरेटिव प्राइस' (एफआरपी) को 355 रुपये से बढ़ाकर 365 रुपये प्रति क्विंटल तय किया है। किसानों का कहना है कि यह राशि खाद, मजदूरी और परिवहन की बढ़ती लागत को कवर करने के लिए नाकाफी है।
हालांकि कुछ किसान समूहों ने अपने विरोध-प्रदर्शनों को फिलहाल रोक दिया है लेकिन किसान नेताओं ने चेतावनी दी है कि अगर कोई ठोस फैसला नहीं लिया गया, तो 27 अक्टूबर को 'कर्नाटक बंद' हो सकता है। इसके अलावा, केंद्र सरकार को एमएसपी और समिति से जुड़ी मांगों पर जवाब देने के लिए 26 नवंबर की समय-सीमा भी तय की गई है।
कर्नाटक भाजपा ने राज्य सरकार से अपील की है कि वह आगे आए और सूखे तथा खेती के कर्ज के कारण भारी संकट से जूझ रहे किसानों की समस्याओं का समाधान करे।
--आईएएनएस
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