कर्नाटक में गन्ना किसानों का 'जेल भरो' आंदोलन; पुलिस ने बेलगावी में रोका मार्च, नेताओं को हिरासत में लिया
बेलगावी, 5 नवंबर (आईएएनएस)। कर्नाटक में गन्ना किसानों ने गुरुवार को 'जेल भरो' आंदोलन शुरू कर दिया। किसान राज्य सरकार से प्रति टन 1,000 रुपए की सब्सिडी की मांग कर रहे हैं। पुलिस ने उत्तर कर्नाटक के बेलगावी के बाहरी इलाके में उनकी विरोध रैली को रोक दिया और प्रमुख किसान नेताओं को हिरासत में ले लिया।
किसानों की मांग है कि चीनी फैक्ट्रियां प्रति टन 4,500 रुपए दें और राज्य सरकार अतिरिक्त 1,000 रुपए दे, जिससे कुल कीमत 5,500 रुपए प्रति टन हो जाए। वे केंद्र सरकार से चीनी का न्यूनतम विक्रय मूल्य (एमएसपी) मौजूदा 31 रुपए से बढ़ाकर 60 रुपए प्रति किलो करने की भी मांग कर रहे हैं।
पुलिस ने बेलगावी शहर के बाहरी इलाके में मुक्ति मठ के पास प्रदर्शन कर रहे किसानों को रोक दिया। इस दौरान किसानों और पुलिसकर्मियों के बीच तीखी बहस हुई।
विरोध मार्च का नेतृत्व कर रहे किसान नेता चूनप्पा पुजारी को बेलगावी के पास गुरलापुरा में हिरासत में ले लिया गया। विरोध से जुड़े एक अन्य प्रमुख नेता शशिकांत गुरुजी को भी पुलिस ने हिरासत में लिया।
चूनप्पा पुजारी ने कहा कि वह जेल जाने के लिए तैयार हैं लेकिन राज्य सरकार को किसानों को प्रति टन गन्ने पर 1,000 रुपये की सब्सिडी देनी ही होगी।
उन्होंने कहा, "अगर मुझे जेल भेजा जाता है तो ठीक है, लेकिन किसानों को सरकार से 1,000 रुपए की सब्सिडी मिलनी चाहिए। कर्नाटक बंद होगा। कोई भी चीनी मिल नहीं चल पाएगी। समझौता लागू होने के बाद ही वे चल पाएंगी।"
चूनप्पा पुजारी ने मांग की कि मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार कैबिनेट बैठक में प्रति टन 1,000 रुपए की सब्सिडी की घोषणा करें।
उन्होंने चेतावनी दी कि किसान आंदोलन जारी रखेंगे और जहां भी अधिकारी उनकी आवाजाही रोकने की कोशिश करेंगे, वहां सड़क जाम करेंगे।
उन्होंने कहा, "हम डरेंगे नहीं। चीनी मिल मालिकों को सार्वजनिक रूप से घोषणा करनी चाहिए कि वे प्रति टन गन्ने के लिए 3,600 रुपए देने पर सहमत हैं। जब तक सरकार 1,000 रुपए की सब्सिडी की घोषणा नहीं करती, हम मांग करते हैं कि अधिकारी हमें जेल में रखें।"
किसान नेताओं की हिरासत से आंदोलन को लेकर तनाव और बढ़ गया है। राज्य सरकार कैबिनेट बैठक में गन्ना किसानों के मुद्दे पर चर्चा करने वाली है।
बता दें कि बेलगावी जिले के गन्ना किसानों ने सरकार को गन्ने के लिए लाभकारी मूल्य की घोषणा के लिए नई समय सीमा दी थी और मांगें पूरी न होने पर जेल भरो आंदोलन तेज करने और बड़े विरोध की चेतावनी दी थी।
मंगलवार को लोक निर्माण विभाग मंत्री और बेलगावी जिला प्रभारी मंत्री सतीश जारकीहोली द्वारा चीनी मिल मालिकों और किसानों के बीच दो दौर की बैठकें हुईं लेकिन गतिरोध नहीं टूटा। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए जारकीहोली बुधवार को चीनी मिल मालिकों के साथ एक और दौर की चर्चा कर रहे हैं।
मैसूरु, मांड्या, हावेरी और अन्य जिलों में भी विरोध प्रदर्शन हुए हैं। पिछले कई हफ्तों से गन्ना आंदोलन तेज हो रहा है। किसान पदयात्रा, हाईवे जाम, विरोध मार्च और राज्यव्यापी प्रदर्शन कर रहे हैं।
5,500 रुपये प्रति टन की तत्काल मांग के अलावा किसान संगठन केंद्र से चीनी का एमएसपी 31 रुपए से बढ़ाकर 60 रुपए प्रति किलो करने, उचित और लाभकारी मूल्य (एफआरपी) में संशोधन, 14 दिनों के भीतर समय पर भुगतान, घरेलू और वाणिज्यिक चीनी के लिए अलग-अलग कीमत, गन्ना आधारित इथेनॉल खरीद और मूल्य निर्धारण में बदलाव और एक व्यापक चीनी नीति की भी मांग कर रहे हैं।
अक्टूबर के मध्य में मुख्यमंत्री शिवकुमार ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर गन्ना किसानों की मांगों को पूरा करने के लिए तत्काल हस्तक्षेप की मांग की थी।
इससे पहले किसानों ने अपनी उपज के लिए ज्यादा कीमत की मांग को लेकर पुणे-बेंगलुरु राष्ट्रीय राजमार्ग को 30 घंटे से ज्यादा समय तक जाम किया था। 26 अक्टूबर को बेलगावी के सुवर्ण विधान सौध में सरकार, चीनी मिल मालिकों और किसान प्रतिनिधियों के बीच बैठक भी बेनतीजा रही थी।
26 अक्टूबर की चर्चा में सरकार ने चीनी फैक्ट्रियों से किसानों को अतिरिक्त 250 रुपए प्रति टन देने का आग्रह किया था लेकिन कई फैक्ट्रियों ने कथित तौर पर इस प्रस्ताव को लागू नहीं किया।
'जेल भरो' कार्यक्रम के तहत किसानों ने 'कैदी नंबर 5,500' के नारे वाली टी-शर्ट पहनकर प्रदर्शन किया है और बेलगावी की हिंडालगा सेंट्रल जेल की ओर मार्च किया। किसान संगठन अब 6 नवंबर को बेंगलुरु में एक बड़े सम्मेलन की योजना बना रहे हैं, जिसके बाद गांव स्तर पर और लामबंदी होगी।
--आईएएनएस
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