केरल: टैक्स प्रस्ताव का कांग्रेस नेता सुधीरन ने किया विरोध, अपनी ही सरकार पर उठाए सवाल
तिरुवनंतपुरम, 25 जून (आईएएनएस)। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता वी.एम. सुधीरन एक बार फिर केरल की वी.डी. सतीशन के नेतृत्व वाली यूडीएफ सरकार के लिए असहज स्थिति पैदा करते नजर आ रहे हैं। उन्होंने राज्य बजट में कम अल्कोहल वाले पेय पदार्थों पर प्रस्तावित कर (टैक्स) ढांचे की सार्वजनिक रूप से आलोचना करते हुए मांग की है कि वित्त विधेयक विधानसभा में पेश किए जाने के दौरान इस प्रावधान को वापस लिया जाए।
केरल प्रदेश कांग्रेस कमेटी के पूर्व अध्यक्ष, पूर्व लोकसभा सांसद, विधानसभा अध्यक्ष और मंत्री रह चुके सुधीरन ने दशकों से अपनी राजनीतिक पहचान दो मुद्दों के इर्द-गिर्द बनाई है, शराब के प्रसार का विरोध और खनिज रेत खनन के खिलाफ अभियान।
ये दोनों मुद्दे फिर प्रमुखता से सामने आए, जब उन्होंने कम अल्कोहल वाले पेय पदार्थों पर कर संरचना को लेकर सरकार के रुख पर सवाल उठाए और राज्य की खनन नीति पर अधिक स्पष्टता की मांग की।
सुधीरन ने गुरुवार को कहा कि बजट में इस प्रस्ताव को शामिल करने से पहले कांग्रेस और यूडीएफ के भीतर इस पर चर्चा होनी चाहिए थी।
उन्होंने कहा कि यदि उचित परामर्श के बाद कोई नीतिगत निर्णय लिया गया होता, तो मौजूदा विवाद से बचा जा सकता था।
सुधीरन ने दावा किया कि उन्होंने अपनी चिंताओं से मुख्यमंत्री और आबकारी मंत्री को पहले ही अवगत करा दिया था, लेकिन इस प्रस्ताव को लेकर जनता के मन में मौजूद शंकाओं और आशंकाओं का अब तक समाधान नहीं किया गया है।
उन्होंने कहा, “सरकार को ऐसे फैसले नहीं लेने चाहिए, जिनसे उसकी विश्वसनीयता प्रभावित हो। मामलों को पारदर्शी ढंग से संभाला जाना चाहिए और अनावश्यक विवाद पैदा किए बिना जनता के सामने स्पष्ट रूप से रखा जाना चाहिए।”
सुधीरन के इस हस्तक्षेप को राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि कांग्रेस की सरकार रहने के दौरान भी वह शराब विरोधी रुख को लेकर मुखर रहे हैं।
वर्ष 2011 से 2016 तक ओमन चांडी सरकार के दौरान शराब नीति को लेकर कांग्रेस के भीतर चली तीखी खींचतान में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही थी। उसी दौर में राज्यभर में सैकड़ों बार बंद किए गए थे।
2016 में यूडीएफ सरकार के सत्ता से बाहर होने तक केरल में तीन दर्जन से भी कम बार संचालित हो रहे थे। हालांकि, एक दशक बाद राज्य में शराब कारोबार का परिदृश्य काफी बदल चुका है। पिनराई विजयन के नेतृत्व वाली लगातार दो एलडीएफ सरकारों के कार्यकाल में बारों की संख्या बढ़कर लगभग 900 तक पहुंच गई।
सुधीरन ने इस विस्तार को लेकर कई बार मुख्यमंत्री विजयन को पत्र लिखकर चिंता जताई थी, लेकिन उनकी अपीलों का कोई खास असर नहीं हुआ।
उनकी ताजा आलोचना सरकार की खनिज रेत खनन नीति तक भी पहुंची है।
उन्होंने कहा कि इस नीति को लेकर अब भी अस्पष्टता बनी हुई है और सरकार को स्पष्ट रूप से घोषणा करनी चाहिए कि खनन गतिविधियों की अनुमति नहीं दी जाएगी।
सुधीरन ने यूडीएफ नेतृत्व को भी याद दिलाया कि उसे उन रुखों के प्रति प्रतिबद्ध रहना चाहिए, जिन्हें तत्कालीन विपक्ष के नेता वी.डी. सतीशन ने पिछली एलडीएफ सरकार की आलोचना करते समय अपनाया था।
पार्टी के एक वरिष्ठ नेता द्वारा नीतिगत फैसलों पर सार्वजनिक सवाल उठाए जाने से यूडीएफ सरकार एक बार फिर अपने सबसे मुखर और सिद्धांतवादी नेताओं में से एक की असहमति से निपटने की चुनौती का सामना कर रही है।
--आईएएनएस
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