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बिहार: भोजपुर मौत मामले में सांसद सुधाकर सिंह ने की लोकसभा अध्यक्ष से हस्तक्षेप की मांग

 

पटना, 19 अक्टूबर (आईएएनएस)। बिहार के भोजपुर जिले के बिलौती गांव में भरत भूषण तिवारी की संदिग्ध हालात में मौत और फर्जी मुठभेड़ को लेकर जारी विवाद अब लोकसभा तक पहुंच गया है। बक्सर से सांसद सुधाकर सिंह ने वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी कुंदन कृष्णन की ओर से मानहानि का नोटिस मिलने के बाद लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से हस्तक्षेप की मांग की है।

लोकसभा अध्यक्ष को लिखे पत्र में राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) के सांसद ने कानूनी नोटिस से संबंधित परिस्थितियों की जांच की मांग की है और अनुरोध किया है कि यदि संसदीय विशेषाधिकार के उल्लंघन का प्रथम दृष्टया मामला बनता है तो मामले को संसद की विशेषाधिकार समिति को भेजा जाए।

सुधाकर सिंह के अनुसार, कृष्णन ने अपने निजी वकील के माध्यम से कानूनी नोटिस भेजा है, जिसमें सार्वजनिक माफी की मांग की गई है और 5 करोड़ रुपए हर्जाने की मांग करने वाले मानहानि के मुकदमे के साथ-साथ संभावित आपराधिक कार्यवाही की चेतावनी दी गई है।

सांसद ने चिंता व्यक्त की है कि यह नोटिस निर्वाचित प्रतिनिधियों को संसद में सार्वजनिक महत्व के मुद्दों को उठाने से हतोत्साहित कर सकता है, हालांकि नोटिस जारी करने के पीछे मंशा की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो पाई है।

यह विवाद बिलौती गांव में भरत भूषण तिवारी की संदिग्ध मौत से जुड़ा है, जहां एक फर्जी मुठभेड़ के आरोप भी लगाए गए हैं।

अपने पत्र में सुधाकर सिंह ने दावा किया कि घटना में शामिल पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया गया है और पीड़ित मां की शिकायत के आधार पर एफआईआर दर्ज की गई है। उन्होंने राज्य सरकार द्वारा गठित न्यायिक जांच का भी जिक्र किया, जिसके निष्कर्ष अभी तक सार्वजनिक नहीं किए गए हैं।

सांसद ने तर्क दिया है कि जांच केवल निचले स्तर के पुलिसकर्मियों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। उन्होंने बताया कि घटना के समय कुंदन कृष्णन बिहार विशेष कार्य बल (एसटीएफ) के महानिदेशक के पद पर कार्यरत थे और उन्होंने कमान शृंखला की निष्पक्ष जांच की मांग की।

उन्होंने जारी किए गए आदेशों, अधिकारियों के बीच संचार, पुलिस मुख्यालय को दी गई सूचनाओं और वरिष्ठ अधिकारियों की भूमिका की जांच की मांग की है, हालांकि व्यक्तिगत अधिकारियों की उत्तरदायित्व का निर्धारण केवल उचित जांच के माध्यम से ही किया जा सकता है।

संविधान के अनुच्छेद 105 का हवाला देते हुए सुधाकर सिंह ने तर्क दिया है कि निर्वाचित प्रतिनिधियों को प्रशासनिक कार्यों और आधिकारिक अधिकार के संभावित दुरुपयोग से संबंधित प्रश्न उठाने में सक्षम होना चाहिए। यह अनुच्‍छेद संसद में भाषण की स्वतंत्रता और उसके सदस्यों के कुछ विशेषाधिकारों का प्रावधान करता है।

उन्होंने अध्यक्ष से यह जांच करने का अनुरोध किया है कि कृष्णन ने किस हैसियत से कानूनी नोटिस जारी किया और क्या उन्होंने बिहार सरकार या केंद्र सरकार से प्राधिकरण प्राप्त किया था।

सांसद ने अखिल भारतीय सेवा (आचरण) नियम, 1968 के नियम 17 का भी उल्लेख किया है और नोटिस से संबंधित परिस्थितियों पर इसकी प्रयोज्यता के संबंध में स्पष्टीकरण मांगा है। पत्र में उठाया गया एक अन्य मुद्दा नोटिस जारी करने वाली निजी लॉ फर्म की भूमिका से संबंधित है।

सुधाकर सिंह ने यह स्पष्टीकरण मांगा है कि क्या फर्म कृष्णन का व्यक्तिगत रूप से प्रतिनिधित्व कर रही थी या उसे बिहार सरकार की ओर से कार्य करने के लिए भी अधिकृत किया गया था। उन्होंने कानूनी कार्रवाई के संबंध में जारी किए गए किसी भी आधिकारिक आदेश या प्राधिकरण का विवरण मांगा है।

कानूनी नोटिस की जांच की मांग के अलावा बक्सर सांसद ने अध्यक्ष से तिवारी की मृत्यु की न्यायिक जांच की स्थिति और उसके निष्कर्षों की उपलब्धता के बारे में जानकारी प्राप्त करने का अनुरोध किया है। उन्होंने अध्यक्ष से पूरे मामले की जांच शुरू करने और पर्याप्त सबूत मिलने पर इसे विशेषाधिकार समिति को सौंपने का आग्रह किया है।

उन्होंने यह भी मांग की है कि यदि ऐसे सबूत सामने आते हैं कि किसी निर्वाचित प्रतिनिधि को संसदीय कर्तव्यों के निर्वहन के लिए दबाव या प्रतिशोध का सामना करना पड़ा है, तो उचित कार्रवाई की जाए।

--आईएएनएस

एएसएच/वीसी