स्तन कैंसर इलाज के बाद भी कैंसर दरों में बढ़ोतरी, अध्ययन में चौंकाने वाला खुलासा
नई दिल्ली, 6 अप्रैल (आईएएनएस)। कैंसर ट्रीटमेंट के लिए प्रयोग में लाई जा रही थेरेपी से क्या कैंसर का खतरा बढ़ सकता है? सोमवार को प्रकाशित एक रिपोर्ट ऐसी ही खौफनाक सच्चाई सामने लाती है। जापान में आबादी आधारित एक अध्ययन से पता चला है कि हाल के वर्षों में थेरेपी-रिलेटेड एक्यूट मायलॉइड ल्यूकेमिया (टीएएमएल) की दरों में बढ़ोतरी हुई है। खासकर ब्रेस्ट कैंसर के इलाज के बाद!
अमेरिकन कैंसर सोसाइटी की एक पीयर-रिव्यू पत्रिका, वाइले ऑनलाइन इन कैंसर द्वारा ऑनलाइन प्रकाशित नतीजों से पता चला है कि कैंसर के इलाज के लिए इस्तेमाल की जाने वाली कुछ थेरेपी बाद में कैंसर का खतरा बढ़ा देती हैं जो सीधे रक्त पर असर डालती हैं। यानी इलाज के बाद दूसरे प्रकार के कैंसर (सेकंडरी प्राइमरी कैंसर) का खतरा सामान्य आबादी की तुलना में बढ़ रहा है।
"टीएएमएल" रक्त और बोन मैरो का एक गंभीर कैंसर है जो पहले हुए किसी प्राइमरी कैंसर के लिए की गई कीमोथेरेपी या रेडिएशन के बाद होता है; इसकी एक वजह इन इलाजों से डीएनए को होने वाला नुकसान हो सकता है।"
ओसाका इंटरनेशनल कैंसर इंस्टीट्यूट के मुख्य लेखक केन्जी किशिमोटो ने कहा, "यह स्टडी इस बात को बेहतर ढंग से समझने की दिशा में एक अहम कदम है कि कैंसर से बचने वालों की बढ़ती संख्या के साथ टीएएमएल की प्रकृति कैसे बदल रही है।"
क्या कैंसर सर्वाइवर्स (उत्तरजीवियों) के साथ-साथ कैंसर इलाज के बाद "टीएएमएल" के मामले भी बढ़ रहे हैं? इस सवाल का पता लगाने के लिए शोधकर्ताओं ने ओसाका कैंसर रजिस्ट्री के डेटा का विश्लेषण किया। यह डेटा जापान के उन मरीजों से जुड़ा था जिन्हें 1990 से 2020 के बीच एएमएल होने का पता चला था।
एएमएल के लगभग 9,841 मरीजों में से 636 (6.5 प्रतिशत) को टीएएमएल था। टीएएमएल होने की सालाना दर 1990 में प्रति 100,000 आबादी पर 0.13 से बढ़कर 2020 में प्रति 100,000 आबादी पर 0.36 हो गई। कुल एएमएल मामलों में टीएएमएल मामलों का अनुपात लगभग दोगुना हो गया।
टीएएमएल होने से पहले जिस प्राइमरी कैंसर का इलाज किया गया था, वह खून के कैंसर का ही एक दूसरा रूप था (23.1 प्रतिशत); इसके बाद ब्रेस्ट कैंसर (14.6 प्रतिशत), कोलोरेक्टल कैंसर (11.5 प्रतिशत) और गैस्ट्रिक कैंसर (8.7 प्रतिशत) का नंबर आता है।
स्टडी के मुताबिक, समय के साथ प्राइमरी कैंसर के मामलों में बदलाव साफ दिखा; इसमें ब्रेस्ट कैंसर मामलों में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई, जबकि गैस्ट्रिक कैंसर के मामलों में कमी साफ देखी गई।
--आईएएनएस
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