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'छात्रों और युवाओं की जीत हुई है', सिद्दारमैया ने धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे का स्वागत किया

 

बेंगलुरु, 25 जुलाई (आईएएनएस)। कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस वर्किंग कमेटी (सीडब्ल्यूसी) के सदस्य सिद्दारमैया ने शनिवार को केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को 'देश के जागरूक छात्रों और युवाओं की जीत' बताया और कहा कि यह घटनाक्रम 'लोकतंत्र और संविधान की जीत' है।

एक बयान में, सिद्दारमैया ने देशभर के उन छात्रों और युवाओं को बधाई दी, जिन्होंने केंद्र सरकार से जवाबदेही की मांग करते हुए विरोध प्रदर्शनों में हिस्सा लिया था।

उन्होंने कहा, "धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा देश के जागरूक और दृढ़ संकल्प वाले छात्रों और युवाओं की जीत है। मैं उन सभी को दिल से बधाई देता हूं।"

इसे 'लोकतंत्र और संविधान की जीत' बताते हुए, सिद्दारमैया ने खराब मौसम, भूख, स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों और पुलिस की कथित ज्यादतियों के बावजूद दिल्ली में शांतिपूर्ण आंदोलन करने के लिए प्रदर्शनकारियों की तारीफ की।

उन्होंने कहा, "लाखों छात्र और युवा दिल्ली में डटे रहे और पुलिस की सख्ती का सामना करने और उकसावे में न आकर शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन किया। उन्होंने देश में उम्मीद की नई किरण जगाई है।"

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता ने आंदोलन का समर्थन करने में पार्टी और लोकसभा में नेता विपक्ष राहुल गांधी की भूमिका की भी सराहना की।

सिद्दारमैया ने कहा, "कांग्रेस पार्टी ने मौके की नजाकत को समझा और एक जिम्मेदार विपक्षी पार्टी के तौर पर अपनी जिम्मेदारियां निभाईं। मैं आंदोलन को समय पर और मजबूत नेतृत्व देने के लिए राहुल गांधी को बधाई देता हूं।"

हालांकि, उन्होंने जोर देकर कहा कि सिर्फ केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे से शिक्षा क्षेत्र की समस्याएं हल नहीं होंगी। जब तानाशाही और कुशासन की पाठशाला के शिक्षक सत्ता में मजबूती से जमे हों, तो एक छात्र के चले जाने से संस्थान में सुधार नहीं हो सकता।

सिद्दारमैया ने यह भी आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री ने शिक्षा समेत कई क्षेत्रों का व्यावसायीकरण कर दिया है और दावा किया कि जब तक केंद्र में नेतृत्व नहीं बदलेगा, तब तक सार्थक सुधार संभव नहीं होंगे। भारत वास्तव में एक लोकतांत्रिक देश के तौर पर काम नहीं कर पाएगा।

पूर्व मुख्यमंत्री ने छात्रों और युवाओं से आग्रह किया कि वे प्रधान के इस्तीफे को अपने संघर्ष का अंत न समझें और केंद्र सरकार को जवाबदेह ठहराने के लिए प्रयास जारी रखने का आह्वान किया।

सिद्दारमैया ने कहा, "यह समय किसी अयोग्य और भ्रष्ट मंत्री के इस्तीफे पर जश्न मनाने का नहीं है। देश के छात्रों और युवाओं को तब तक अपना संघर्ष जारी रखना चाहिए, जब तक कि केंद्र की अयोग्य और भ्रष्ट सरकार को हटा नहीं दिया जाता। कांग्रेस पार्टी लोकतंत्र और संविधान की रक्षा की लड़ाई में हमेशा लोगों के साथ खड़ी रहेगी।"

वहीं, कर्नाटक सरकार के गृह मंत्री प्रियंक खड़गे ने कहा, "यह बिल्कुल साफ है कि धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा जमीर की आवाज पर नहीं है और न ही इसलिए है कि उन्होंने जिम्मेदारी ली है। ऐसा इसलिए हुआ है क्योंकि देश के छात्रों ने उन्हें इस्तीफा देने के लिए मजबूर किया है। उन्हें इसमें 3 महीने लग गए। नीट 5 मई को हुई थी। 15 मई को धर्मेंद्र प्रधान ने माना था कि पेपर लीक हुआ था। 15 मई से 25 जुलाई तक, उन्हें यह बात मानने और इस्तीफा देने में 3 महीने लग गए। ऐसा सिर्फ इसलिए हुआ है क्योंकि छात्र नाराज हैं। यह विरोध अब सिर्फ जंतर-मंतर तक सीमित नहीं है। यह देश के हर राज्य, हर शहर और हर जिले में हो रहा है। भारत सरकार की नींद खुली है, लेकिन बहुत देर से।"

--आईएएनएस

एससीएच/एबीएम