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श्रीलंका में 25 लाख डॉलर की साइबर ठगी, सरकार ने शुरू की बहु-एजेंसी जांच

 

कोलंबो, 24 अप्रैल (आईएएनएस)। श्रीलंका सरकार ने 25 लाख अमेरिकी डॉलर (लगभग 2.5 मिलियन डॉलर) की बड़ी साइबर ठगी के मामले में बहु-एजेंसी जांच शुरू की है। यह राशि सरकारी भुगतान के दौरान साइबर अपराधियों द्वारा डायवर्ट कर ली गई।

वित्त मंत्रालय के अनुसार, साइबर अपराधियों ने ईमेल के जरिए एक्सटर्नल रिसोर्सेज डिपार्टमेंट के कंप्यूटर सिस्टम में अनधिकृत पहुंच हासिल कर ली और ऑस्ट्रेलियाई लेनदार को भेजी जाने वाली 25 लाख डॉलर की राशि को दूसरी जगह ट्रांसफर कर दिया।

मंत्रालय ने बताया कि संबंधित एजेंसियां अंतरराष्ट्रीय साझेदारों के साथ मिलकर धन का पता लगाने और आरोपियों की पहचान करने में जुटी हैं।

यह मामला तब सामने आया जब ट्रेजरी अधिकारियों ने भारत से जुड़े एक अन्य भुगतान प्रक्रिया के दौरान अकाउंट डिटेल्स में संदिग्ध बदलाव देखा। समय रहते जांच शुरू होने से एक और संभावित धोखाधड़ी को रोका जा सका।

ट्रेजरी सचिव हर्षना सुरियप्पेरुमा ने कहा कि त्वरित कार्रवाई के चलते जांच प्रभावित हुए बिना धोखाधड़ी का पता लगा लिया गया। मामले की जांच और आगे की सिफारिशों के लिए वरिष्ठ अधिकारियों की एक आंतरिक समिति बनाई गई है, जिसमें दो डिप्टी ट्रेजरी सचिव भी शामिल हैं। साथ ही प्रक्रियागत लापरवाही के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू की गई है।

अधिकारियों ने बताया कि इस घटना की जानकारी ऑस्ट्रेलियाई सरकार, संबंधित लेनदार संस्थानों और देश की कर्ज पुनर्गठन प्रक्रिया से जुड़े पक्षों को दे दी गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि इस घटना से देश की संप्रभु दायित्वों को पूरा करने की प्रतिबद्धता पर कोई असर नहीं पड़ेगा।

ऑस्ट्रेलियाई उच्चायोग ने कहा है कि वह श्रीलंकाई अधिकारियों के साथ समन्वय बनाए हुए है और कर्ज स्थिरता के प्रयासों में सहयोग जारी रखेगा।

गौरतलब है कि साइबर फ्रॉड ऐसे अपराधों को कहा जाता है, जो इंटरनेट के माध्यम से किसी व्यक्ति या संस्था की संवेदनशील जानकारी हासिल कर आर्थिक लाभ कमाने के उद्देश्य से किए जाते हैं। इसके सामान्य रूपों में फिशिंग, बिजनेस ईमेल कम्प्रोमाइज (बीईसी), रैनसमवेयर और ऑनलाइन शॉपिंग धोखाधड़ी शामिल हैं।

विशेषज्ञों के अनुसार, मजबूत और अलग-अलग पासवर्ड का इस्तेमाल तथा मल्टी-फैक्टर ऑथेंटिकेशन जैसे उपाय अपनाकर ऐसे साइबर हमलों से बचाव किया जा सकता है।

--आईएएनएस

डीएससी