दक्षिण कोरिया-अमेरिका रक्षा वार्ता अगले सप्ताह, 'युद्धकालीन ऑपरेशनल कंट्रोल' ट्रांसफर अहम मुद्दा
सोल, 7 मई (आईएएनएस)। दक्षिण कोरिया और अमेरिका अगले हफ्ते वाशिंगटन में अपनी उच्च स्तरीय रक्षा वार्ता करेंगे। सोल के रक्षा मंत्रालय ने गुरुवार को जानकारी देते हुए बताया कि इस बैठक में 'युद्धकालीन ऑपरेशनल कंट्रोल' (ओपीकॉन) यानी सेना की कमान अमेरिका से दक्षिण कोरिया को सौंपने और उत्तर-कोरिया सीमा के पास स्थित असैन्य क्षेत्र तक नागरिकों की पहुंच को नियंत्रित करने जैसे मुद्दे सबसे अहम रह सकते हैं।
मंत्रालय ने बताया कि हर दो साल में होने वाली कोरिया-अमेरिका एकीकृत रक्षा वार्ता (केआईडीडी) मंगलवार से बुधवार (अमेरिकी समय के अनुसार) तक चलेगी।
योनहाप समाचार एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, इस वार्ता में दक्षिण कोरिया की तरफ से रक्षा नीति के उपमंत्री किम होंग-चोल और अमेरिका की तरफ से इंडो-पैसिफिक सुरक्षा मामलों के सहायक रक्षा सचिव जॉन नोह नेतृत्व करेंगे।
मंत्रालय ने कहा, “दोनों पक्ष कई तरह के सुरक्षा मुद्दों पर चर्चा करेंगे, जिनमें युद्धकालीन ओपीकॉन ट्रांसफर और संयुक्त रक्षा व्यवस्था शामिल है, ताकि दोनों देशों का गठबंधन भविष्य में और मजबूत और दोनों के लिए फायदेमंद बन सके।”
यह वार्ता ऐसे समय हो रही है, जब सोल और वाशिंगटन युद्धकालीन ओपीकॉन को अमेरिका से दक्षिण कोरिया को सौंपने पर काम कर रहे हैं। ली जे म्युंग सरकार का लक्ष्य है कि अपने पांच साल के कार्यकाल (2030 तक) के अंदर यह कमान वापस ले ली जाए।
पिछले महीने अमेरिका की कोरिया में तैनात सेना के कमांडर जनरल जेवियर ब्रूनसन ने अमेरिकी कांग्रेस को बताया था कि दोनों देश 2029 की पहली तिमाही तक इस ट्रांसफर की जरूरी शर्तें पूरी करने की कोशिश कर रहे हैं।
दक्षिण कोरिया ने 1950-53 के कोरियाई युद्ध के दौरान अपनी सेना की ऑपरेशनल कमान अमेरिका के नेतृत्व वाले संयुक्त राष्ट्र कमान (यूएनसी) को सौंप दी थी। बाद में 1978 में इसे अमेरिका-दक्षिण कोरिया संयुक्त बल कमान को ट्रांसफर किया गया।
दक्षिण कोरिया ने 1994 में शांति काल की कमान वापस ले ली थी, लेकिन युद्धकालीन ऑपरेशनल कंट्रोल अभी भी अमेरिका के पास है।
इस ट्रांसफर की शर्तों में दक्षिण कोरिया की यह क्षमता शामिल है कि वह अमेरिका के साथ संयुक्त सेना का नेतृत्व कर सके, उसकी मिसाइल और एयर डिफेंस क्षमता मजबूत हो, और क्षेत्रीय सुरक्षा का माहौल भी इसके लिए अनुकूल हो।
इसके अलावा, डीएमजेड (विसैन्यीकृत क्षेत्र) के दक्षिणी हिस्से में नागरिकों की आवाजाही पर नियंत्रण का मुद्दा भी चर्चा में रहेगा। यह क्षेत्र दोनों के बीच लगभग 250 किलोमीटर लंबा और तीन किलोमीटर चौड़ा भारी सुरक्षा वाला इलाका है।
ली सरकार इस क्षेत्र के उस हिस्से पर नियंत्रण चाहती है, जहां नागरिक गतिविधियों की अनुमति दी जा सकती है। फिलहाल इसका प्रशासन संयुक्त राष्ट्र कमान के पास है, जो कोरियाई युद्ध को रोकने वाले समझौते के तहत काम करता है।
सोल ने प्रस्ताव दिया है कि इस क्षेत्र का संयुक्त रूप से प्रबंधन किया जाए। इसके लिए संसद में कुछ विधेयक भी लंबित हैं, जिनमें सरकार को इस क्षेत्र में गैर-सैन्य पहुंच का नियंत्रण देने की बात है। लेकिन संयुक्त राष्ट्र कमान ने इन कदमों का विरोध किया है और कहा है कि ये युद्धविराम समझौते के खिलाफ हैं।
--आईएएनएस
एवाई/एबीएम