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सौजन्या दुष्कर्म और हत्या मामला: कर्नाटक एसआईटी ने 14 साल पुराने क्राइम सीन को री-क्रिएट किया

 

मंगलुरु, 31 अक्टूबर (आईएएनएस)। सनसनीखेज सौजन्या दुष्कर्म और हत्या मामले की जांच कर रही विशेष जांच टीम (एसआईटी) ने शनिवार को सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर की गई नई जांच के तहत क्राइम सीन को री-क्रिएट किया। इसके साथ ही घटनास्थल से मिट्टी के नमूने एकत्र किए।

वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों की एक टीम ने अपराध स्थल का निरीक्षण किया और 14 साल पहले हुई घटना से संबंधित घटनाक्रम का सीन री-क्रिएट किया। यह अभ्यास नए सबूत जुटाने और अपराध से संबंधित परिस्थितियों की जांच करने के लिए किया गया था।

जांच का नेतृत्व एसआईटी एसपी लोकेश बी. जगलासर और एसीपी मनोज कुमार नाइक ने किया। सौजन्या के रिश्तेदार, पुरंदरा गौड़ा और तुकाराम गौड़ा भी निरीक्षण के दौरान मौजूद थे। पुरंदरा गौड़ा ने अपराध के बाद सबसे पहले सौजन्या का शव देखा था। वह इस मामले में शिकायतकर्ता भी हैं।

पूरे घटनास्थल को बैरिकेड और सुरक्षा टेप से घेर दिया गया था और आम जनता को उस क्षेत्र में प्रवेश करने से रोक दिया गया था। जांच के तहत एसआईटी टीम ने घटनास्थल से सबूत और अन्य सामग्री एकत्र की।

पुलिस ने उस सड़क को भी बैरिकेड कर दिया था जो उस वन क्षेत्र से सटी हुई थी जहां से सौजन्या को बस से उतरकर घर लौटते समय कथित तौर पर अगवा किया गया था। बाद में उसका शव पास के ही वन क्षेत्र में मिला।

अधिकारियों ने सौजन्या का शव मिलने वाले स्थान की मिट्टी को भी संरक्षित कर लिया है।

फोरेंसिक साइंस लेबोरेटरी (एफएसएल) और क्राइम सीन ऑफिसर्स (एसओसीओ) टीम के विशेषज्ञों ने लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) के इंजीनियरों के साथ मिलकर इस जांच में भाग लिया। विशेषज्ञ जांच में एसआईटी की सहायता के लिए बेंगलुरु से आए थे।

संबंधित धर्मस्थल पुलिस स्टेशन के कर्मियों को घटनास्थल पर सुरक्षा प्रदान करने के लिए तैनात किया गया है।

सुप्रीम कोर्ट के 14 साल पुराने मामले की पुन: जांच के निर्देश के बाद यह नई जांच शुरू की गई है।

भारत के सुप्रीम कोर्ट ने अक्टूबर 2012 में कर्नाटक के धर्मस्थल में 17 वर्षीय सौजन्या के दुष्कर्म और हत्या के मामले में 90 दिनों की विशेष जांच टीम (एसआईटी) के गठन का आदेश दिया है।

अक्टूबर 2012 में, धर्मस्थल के पास उजिरे की रहने वाली 17 वर्षीय प्री-यूनिवर्सिटी छात्रा सौजन्या लापता हो गई थी और बाद में नेत्रावती नदी के पास उसका शव मिला था, जिस पर यौन उत्पीड़न और मारपीट के गंभीर निशान थे।

संतोष राव को जांच के शुरुआती दौर में ही गिरफ्तार कर लिया गया था, लेकिन सीबीआई की विशेष अदालत ने जून 2023 में उन्हें अपराध से जोड़ने वाले पर्याप्त सबूतों के अभाव में बरी कर दिया।

कर्नाटक हाई कोर्ट द्वारा 2024 में आगे की जांच की मांग वाली याचिकाओं को खारिज किए जाने के बाद, सौजन्या की मां कुसुमावती गौड़ा ने सुप्रीम कोर्ट में अपील की।

21 सितंबर, 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने पहले के फैसलों को रद्द करते हुए कर्नाटक पुलिस, अपराध शाखा और सीबीआई की लापरवाही की कड़ी आलोचना की और नए सिरे से जांच का निर्देश दिया।

--आईएएनएस

एमएस/