स्काईवेज एयर सर्विसेज का आईपीओ लिस्टिंग के लिए तैयार, लेकिन आरएचपी में दर्ज प्रमुख जोखिम निवेशकों के लिए चिंता का विषय
नई दिल्ली, 27 अगस्त (आईएएनएस)। स्काईवेज एयर सर्विसेज लिमिटेड का 582.8 करोड़ रुपए का आरंभिक सार्वजनिक निर्गम (आईपीओ) लिस्टिंग की ओर बढ़ रहा है और बोली के अंतिम दिन ग्रे मार्केट में इसके लिए मजबूत उत्साह देखने को मिला, और आईपीओ का ग्रे मार्केट प्रीमियम (जीएमपी) लगभग 33 प्रतिशत तक पहुंच गया। हालांकि, कंपनी के रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (आरएचपी) में दर्ज कुछ महत्वपूर्ण जोखिम निवेशकों के लिए चिंता का विषय बने हुए हैं।
कंपनी ने आईपीओ के लिए 131 रुपए से 138 रुपए प्रति शेयर का प्राइस बैंड तय किया है। इस इश्यू में 2.89 करोड़ नए इक्विटी शेयरों का फ्रेश इश्यू और मौजूदा शेयरधारकों द्वारा 1.33 करोड़ शेयरों की बिक्री पेशकश (ऑफर फॉर सेल) शामिल है।
हालांकि, सेबी को प्रस्तुत रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (आरएचपी) के अनुसार, स्काईवेज एयर सर्विसेज लिमिटेड और उसकी महत्वपूर्ण सहायक कंपनी ब्रेस पोर्ट लॉजिस्टिक्स लिमिटेड वर्तमान में आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू) की जांच का सामना कर रही हैं, जो कथित धोखाधड़ी, अधिक बिलिंग, जालसाजी और आपराधिक साजिश से जुड़े आरोपों के संबंध में है।
कंपनी द्वारा सेबी को उपलब्ध कराए गए दस्तावेजों के अनुसार, यह मामला वर्ष 2025 की एफआईआर संख्या 0172 से जुड़ा है, जिसे 12 दिसंबर 2025 को दिल्ली की आर्थिक अपराध शाखा ने दर्ज किया था। यह कार्रवाई ब्रिटेन स्थित पीजी पेपर कंपनी लिमिटेड की शिकायत के आधार पर की गई थी। एफआईआर में स्काईवेज एयर सर्विसेज को तीसरा आरोपी और ब्रेस पोर्ट लॉजिस्टिक्स को दूसरा आरोपी बनाया गया है। 11 अगस्त 2026 को दाखिल आरएचपी में इस एफआईआर को कंपनी और उसकी सहायक इकाई के खिलाफ लंबित आपराधिक मामले के रूप में दर्ज किया गया है।
दस्तावेजों में उल्लेखित आरोपों के अनुसार, पीजी पेपर का दावा है कि स्काईवेज समूह की इकाइयों, जिनमें ब्रेस पोर्ट, आरआईवी वर्ल्डवाइड लिमिटेड (यूके) और स्काईवेज एसएलएस लॉजिस्टिक जीएमबीएच शामिल हैं, ने कथित रूप से माल ढुलाई कारोबार हासिल करने के लिए समन्वित तरीके से काम किया। आरोप है कि इस प्रक्रिया में बढ़ा-चढ़ाकर मालभाड़ा बिल तैयार किए गए, गलत जानकारी दी गई और धोखाधड़ी की गई।
शिकायतकर्ता का दावा है कि वर्ष 2021 से इन तीन सहायक कंपनियों के माध्यम से 800 करोड़ रुपए से अधिक का कारोबार किया गया और उसे प्रत्यक्ष रूप से कम से कम 44.20 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ। सेबी को सौंपे गए प्रतिनिधित्व में यह भी आरोप लगाया गया है कि ब्रेस पोर्ट और स्काईवेज ने मिलकर कंपनी से लगभग 44.20 करोड़ रुपए की अतिरिक्त वसूली की।
आरोपों के अनुसार, कुछ मामलों में मालभाड़ा शुल्क बाजार दरों की तुलना में 40 प्रतिशत से लेकर 300 प्रतिशत तक अधिक दिखाया गया। यह भी दावा किया गया है कि माल ढुलाई खरीद प्रक्रिया से जुड़े एक कर्मचारी को कथित तौर पर प्रभावित कर आंतरिक नियंत्रण तंत्र को दरकिनार किया गया।
एफआईआर में आपराधिक विश्वासघात, धोखाधड़ी, जालसाजी, जाली दस्तावेजों के उपयोग और आपराधिक साजिश से संबंधित धाराएं लगाई गई हैं।
कंपनी के सामने एक अन्य महत्वपूर्ण जोखिम नियामकीय कार्रवाई का है। एफआईआर दर्ज होने के बाद केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर और सीमा शुल्क बोर्ड (सीबीआईसी) ने 14 मई 2026 को स्काईवेज के अधिकृत आर्थिक परिचालक (एलओ) प्रमाणपत्र को निलंबित करने और रद्द करने के प्रस्ताव से संबंधित नोटिस जारी किया था।
जांच के नतीजे आने तक कंपनी का एईओ-एलओ दर्जा 4 मई 2026 से निलंबित है। स्काईवेज ने 28 जुलाई 2026 को संबंधित प्राधिकरण को अपना जवाब सौंप दिया था, लेकिन मामला अभी भी लंबित है।
इससे पहले इस मामले में आईएएनएस द्वारा पूछे गए सवालों पर कंपनी ने कोई टिप्पणी नहीं की।
--आईएएनएस
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