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मिठाइयों की आसमान छूती कीमतें भी बंगाल में विजयादशमी के जश्न को फीका नहीं कर पाई

 

कोलकाता, 21 अक्टूबर (आईएएनएस)। विजयादशमी के दिन देवी दुर्गा की प्रतिमाओं का विसर्जन किया जाता है और चार दिनों तक चलने वाले दुर्गा पूजा उत्सव का समापन होता है। इस दौरान रिश्तेदारों, दोस्तों और प्रियजनों के बीच मिठाइयां बांटना दशकों से पारंपरिक बंगाली संस्कृति का एक अभिन्न अंग रहा है।

इस शुभ अवसर पर 'मां दुर्गा' को 'बेटी दुर्गा' के रूप में विदा करने की रस्मों में मिठाइयां एक अहम हिस्सा रही हैं, जो दशकों से बंगाली संस्कृति का पारंपरिक अंग हैं।

हालांकि, इस साल दूध और चीनी की बढ़ती कीमतों ने त्योहार के मौसम में मध्यम वर्गीय बंगाली परिवारों की जेब पर भारी असर डाला है। जो मिठाइयां पिछले साल तक 10 से 15 रुपए प्रति पीस के हिसाब से मिल जाती थी, वे अब 20 से 30 रुपए में बिक रही हैं। यानी उनकी कीमतें लगभग दोगुनी हो गई हैं।

दक्षिण कोलकाता की एक मशहूर मिठाई की दुकान के मालिक बिवु दास ने बताया कि इस मौके पर भारी मांग और त्योहार के माहौल के कारण हर साल मिठाइयों की कीमतें थोड़ी बढ़ जाती हैं। इस बार, दुर्गा पूजा से ठीक पहले दूध और चीनी के दाम बहुत ज्यादा बढ़ जाने की वजह से हमें रसगुल्ला और संदेश जैसी लोकप्रिय मिठाइयों के दाम बढ़ाने पड़े हैं।

दुर्गा पूजा से पहले ही मिठाइयों की कीमतों में 2 से 5 रुपए प्रति पीस की बढ़ोतरी कर दी गई थी। बुधवार को, विजयादशमी के दिन मांग में होने वाली पारंपरिक तेजी का फायदा उठाते हुए दुकानदारों ने कीमतें और बढ़ा दी।

उत्तरी कोलकाता में मिठाई की दुकान चलाने वाले शशि घोष ने कहा कि बुधवार को भारी मांग के कारण कीमतें और बढ़ा दी गई हैं। एक और वजह यह है कि बढ़ती महंगाई को देखते हुए, दुर्गा पूजा से पहले हमें मिठाई बनाने वाले कारीगरों की दिहाड़ी बढ़ानी पड़ी। इसका भी कीमतों में हुई बढ़ोतरी पर काफी असर पड़ा है।

कीमतों में भारी उछाल के बावजूद विजयादशमी पर मिठाइयों के प्रति बंगालियों का पारंपरिक लगाव कम होता नहीं दिख रहा है। लोग अभी भी मिठाइयों के आदान-प्रदान की रस्म के लिए तैयारी कर रहे हैं और इस मौके को अपने रिश्तेदारों और दोस्तों से फिर से जुड़ने के एक अवसर के रूप में देख रहे हैं।

एक गृहिणी डोलन सेनगुप्ता ने कहा कि विजयादशमी एक ऐसा अवसर है जब रिश्तेदार, दोस्त और अपने करीबी लोग एक साथ आते हैं। इस दौरान वे साल भर चले आ रहे मतभेदों और गलतफहमियों को भुला देते हैं। इस दौरान मिठाइयां एक अहम हिस्सा होती हैं। इस साल, बढ़ती कीमतों की वजह से मुझे उत्सव के लिए अपने बजट से ज्यादा खर्च करना पड़ा लेकिन मैंने तैयारियों में कोई कटौती नहीं की। आखिरकार, इस मौके के लिए मुझे एक और साल इंतजार करना पड़ेगा।

--आईएएनएस

डीकेएम/पीएम