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मॉस्को में प्रिमाकोव फोरम में भारत के छह विशेषज्ञ करेंगे विभिन्न वैश्विक मुद्दों पर चर्चा

 

मॉस्को, 17 जून (आईएएनएस)। रूस के प्रमुख अंतरराष्ट्रीय मंच 'प्रिमाकोव रीडिंग्स इंटरनेशनल फोरम' का 12वां संस्करण अगले सप्ताह मॉस्को में आयोजित होने जा रहा है। इस बार फोरम का विषय 'वर्ल्ड विदाउट रूल्स : पावर गेम?' है। इस दो दिवसीय कार्यक्रम में भारत के छह विशेषज्ञ विभिन्न मुद्दों पर विचार रखेंगे।

23 और 24 जून को होने वाले इस कार्यक्रम को रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव संबोधित करेंगे। इसमें रूस के राष्ट्रपति के सहयोगी यूरी उशाकोव, फेडरेशन काउंसिल के उपाध्यक्ष कॉन्स्टेंटिन कोसाचेव, अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा, वैश्विक राजनीति और अर्थव्यवस्था के क्षेत्र के कई रूसी और विदेशी विशेषज्ञ, सार्वजनिक संगठनों के प्रतिनिधि, राजनेता और राजनयिक भी शामिल होंगे।

फोरम में छह भारतीय विशेषज्ञ मंजीत कृपलानी (डायरेक्टर, गेटवे हाउस: इंडियन काउंसिल ऑन ग्लोबल रिलेशंस), समीर सरन (प्रेसीडेंट, ऑब्जर्वर रिसर्च फाउंडेशन), शिशिर प्रियदर्शी (प्रेसीडेंट, चिंतन रिसर्च फाउंडेशन और 2007-2022 तक विश्व व्यापार संगठन में डायरेक्टर), पंकज सरन (कन्वेनर, नैटस्ट्रेट, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार बोर्ड), अरविंद गुप्ता (हेड, डिजिटल इंडिया फाउंडेशन), और लेफ्टिनेंट जनरल दुष्यंत सिंह (डायरेक्टर जनरल, सेंटर फॉर लैंड वारफेयर स्टडीज) विभिन्न सत्रों को संबोध‍ित करेंगे।

ये विशेषज्ञ कई महत्वपूर्ण सत्रों में हिस्सा लेंगे, जिनमें 'क्षेत्रीय संघर्षों के वैश्विक प्रभाव', "सदी के मध्य तक वैश्विक व्यवस्था की संभावनाएं', 'वैश्विक व्यापार और निवेश के सामने चुनौतियां और जोखिम', 'यूरेशियाई सुरक्षा 2035: सीएसटीओ की अध्यक्षता', 'एआई और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स में वैश्विक प्रतिस्पर्धा' और 'सैन्य-तकनीकी प्रतिस्पर्धा का नया दौर' जैसे विषय शामिल हैं।

आयोजकों के अनुसार, इस फोरम का मुख्य उद्देश्य दुनिया की राजनीति और अर्थव्यवस्था के सामने मौजूद बड़ी चुनौतियों पर चर्चा करना है। इसमें क्षेत्रीय संघर्षों के वैश्विक असर, अमेरिकी विदेश नीति के घरेलू पहलू, मध्य पूर्व का संघर्ष और उसके बदलते स्वरूप, उभरती वैश्विक व्यवस्था, व्यापार और निवेश से जुड़े जोखिम, रूस की सीएसटीओ अध्यक्षता के दौरान यूरेशियाई सुरक्षा, एआई आधारित अंतरराष्ट्रीय प्रतिस्पर्धा और सैन्य तकनीक की नई दौड़ जैसे विषयों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।

विशेषज्ञ मध्य पूर्व में तनाव कम करने की संभावनाओं, क्षेत्रीय सुरक्षा की नई व्यवस्था बनाने के अवसरों और क्षेत्र को स्थिर बनाने में गैर-पश्चिमी देशों की भूमिका पर भी चर्चा करेंगे।

इसके अलावा, न्यू स्टार्ट संधि के समाप्त होने के प्रभाव, हथियार नियंत्रण व्यवस्था के कमजोर पड़ने के खतरे और तेजी से बढ़ती हथियारों की दौड़ के बीच नई सैन्य तकनीकों का वैश्विक रणनीतिक स्थिरता पर क्या असर पड़ सकता है, इन विषयों पर भी विचार-विमर्श होगा।

इस कार्यक्रम के आयोजकों में से एक और रूसी विज्ञान अकादमी के अंतरराष्ट्रीय संबंध संस्थान (आईएमईएमओ) के अध्यक्ष अलेक्जेंडर डिनकिन ने कहा, ''रूल्स-बेस्ड यानी नियमों पर आधारित उदारवादी वैश्विक व्यवस्था की रूस और दुनिया भर में कड़ी और उचित आलोचना हुई है। 2022 से 2026 के बीच यह व्यवस्था धीरे-धीरे इतिहास का हिस्सा बन गई। आज हम वैश्विक राजनीतिक और आर्थिक ढांचे के टूटने, उसके बिखराव और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा के क्षेत्र में ताकत के लगभग पूर्ण प्रभुत्व को देख रहे हैं।"

इस फोरम में भारत, अमेरिका, ब्रिटेन, स्विट्जरलैंड, चीन, तुर्किये, कतर, ईरान, दक्षिण कोरिया, उज्बेकिस्तान समेत लगभग 20 देशों के करीब 50 विशेषज्ञ हिस्सा लेंगे। इनमें भारतीय प्रतिनिधिमंडल सबसे बड़ा विदेशी दल होगा।

इसके अलावा, रूस और अन्य देशों के वैज्ञानिकों, विशेषज्ञों, सरकारी अधिकारियों, राजनीतिक और कारोबारी जगत से जुड़े 400 से अधिक लोगों के इस कार्यक्रम में शामिल होने की उम्मीद है।

--आईएएनएस

एवाई/एबीएम