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केरल एसआईटी ने पूर्व मंत्री वीणा जॉर्ज पर हमले के मामले में केएसयू कार्यकर्ताओं को दी क्लीन चिट

 

तिरुवनंतपुरम, 3 नवंबर (आईएएनएस)। केरल की पूर्व स्वास्थ्य मंत्री वीणा जॉर्ज पर हुए कथित हमले के मामले में एक बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। मंगलवार को विशेष जांच दल (एसआईटी) ने अदालत को बताया कि इस मामले में शामिल केरल स्टूडेंट्स यूनियन (केएसयू) के पांच कार्यकर्ताओं के खिलाफ लगाए गए आरोप टिक नहीं सकते।

एसआईटी प्रमुख यू. प्रेमन ने कन्नूर की ज्यूडिशियल फर्स्ट क्लास मजिस्ट्रेट कोर्ट में अपनी अंतिम रिपोर्ट सौंपी। इसमें कहा गया है कि कार्यकर्ताओं ने चार्जशीट में बताए गए अपराधों में से कोई भी अपराध नहीं किया है।

रिपोर्ट के अनुसार, दंगा करने और रेलवे परिसर में बिना अनुमति घुसने के आरोप टिक नहीं पाएंगे। इसमें यह भी स्पष्ट किया गया है कि प्रदर्शनकारियों ने पुलिस को उनके आधिकारिक कर्तव्यों का पालन करने से नहीं रोका।

एसआईटी का कहना है कि काले झंडे दिखाकर विरोध करना कोई आपराधिक अपराध नहीं है। यह नई रिपोर्ट इस मामले में एक बड़ा मोड़ है।

पुलिस द्वारा केएसयू के पांच कार्यकर्ताओं पर हत्या के प्रयास जैसे गंभीर आरोप लगाए जाने के बाद, यह मामला काफी राजनीतिक चर्चा में आ गया था।

एसआईटी ने पाया है कि कार्यकर्ताओं ने वीना जॉर्ज पर हमला नहीं किया था। इसमें यह भी कहा गया है कि इस साल की शुरुआत में कन्नूर रेलवे स्टेशन पर हुए प्रदर्शन के दौरान, प्रदर्शनकारी उन तक पहुंच ही नहीं पाए थे।

पूर्व मंत्री के गनमैन अभिलाष ने जांच टीम के सामने अपना बयान बदल दिया, जिसके बाद कथित हमले का आरोप साबित नहीं हो सका। उसने एसआईटी को बताया कि उसने प्रदर्शनकारियों को वीना जॉर्ज पर हमला करने की कोशिश करते हुए नहीं देखा था।

शुरुआती मामला मुख्य रूप से उसके इसी बयान पर आधारित था कि प्रदर्शनकारियों ने हथियारों का इस्तेमाल करके मंत्री पर हमला करने की कोशिश की थी। हालांकि, एसआईटी को इस घटना में कथित तौर पर इस्तेमाल किए गए हथियार नहीं मिले। जांच में पता चला है कि केएसयू कार्यकर्ताओं और पुलिस के बीच हाथापाई हुई थी।

इससे पहले, टीम ने पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) को एक रिपोर्ट सौंपी थी, जिसमें बताया गया था कि विरोध-प्रदर्शन को बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया गया था और प्रदर्शनकारी पूर्व मंत्री तक नहीं पहुंच पाए थे।

खबरों के अनुसार, गनमैन ने एसआईटी को यह भी बताया कि उसने वीणा जॉर्ज के कहने पर झूठा बयान दिया था।

अब अदालत के सामने पेश की गई ताजा रिपोर्ट इस पूरे मामले को एक अलग ही रूप में दिखाती है। एसआईटी का निष्कर्ष है कि प्रदर्शनकारियों पर उन अपराधों के लिए मुकदमा नहीं चलाया जा सकता, जिनका आरोप उन पर शुरू में लगाया गया था।

यह मामला एक बड़ा राजनीतिक विवाद बन गया था, जिसमें कांग्रेस और सीपीआई (एम) ने इस घटना को लेकर बिल्कुल विपरीत रुख अपनाए थे। फरवरी में जब यह घटना हुई, तो सीपीआई (एम) ने तुरंत विरोध मार्च निकाले, क्योंकि उस समय चुनाव नजदीक थे।

--आईएएनएस

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