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शिवसेना (यूबीटी) ने 'सामना' में भाजपा को 'चोरी' हुए वोटिंग अधिकारों पर बड़े पैमाने पर विद्रोह की चेतावनी दी

 

मुंबई, 6 अक्टूबर (आईएएनएस)। शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे ने मंगलवार को एसआईआर प्रक्रिया को लागू करने को लेकर भाजपा और चीफ इलेक्शन कमिश्नर (सीईसी) ज्ञानेश कुमार पर निशाना साधा है।

शिवसेना (यूबीटी) ने मुखपत्र 'सामना' में मुंबई में महा विकास अघाड़ी (एमवीए) और उससे जुड़े डेमोक्रेटिक ग्रुप्स की प्रोटेस्ट रैली का बचाव किया। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने विपक्ष की रैली को पॉलिटिकल जमीन तलाशने की एक बेताब कोशिश बताया जबकि राज्य के मंत्री आशीष शेलार ने प्रोटेस्ट को "सस्ती पॉलिटिक्स" और इसकी मांगों को "चिल्लाना" कहा।

इन बातों की कड़ी निंदा करते हुए, ठाकरे खेमे ने भाजपा के इस रवैये को जनता का अपमान बताया और पार्टी पर घमंड करने और सत्ता में बने रहने के लिए "करप्ट इलेक्शन कमीशन" पर भरोसा करने का आरोप लगाया। शिवसेना (यूबीटी) ने आरोप लगाया कि पूरे भारत में अकेले महाराष्ट्र में दो करोड़ से ज्यादा वोटरों सहित लगभग 13 करोड़ वोटरों से बिना किसी पहले से नोटिस या सही सुनवाई के मनमाने ढंग से उनके वोटिंग राइट्स छीन लिए गए।

'सामना' में चेतावनी दी गई, "यह सत्ता का घमंड है और भाजपा ज्ञानेश कुमार जैसों को ताकत देकर इस सत्ता का मजा ले रही है। मुंबई में लाखों लोग तिरंगा लेकर सड़कों पर उतर आए। उनके विरोध को "रोना-धोना" कहना खुद तिरंगे का अपमान है। पीएम मोदी जैसा आदमी हर दिन रोने का नाटक करता है; जब एक आदमी ऐसे रोता है, तो वह रोना-धोना होता है। जब 5 से 10 लाख लोग एक साथ दर्द से रोते हैं, तो यह इतना बड़ा बवाल खड़ा करता है कि जालिमराज को उखाड़ फेंका जा सके। उस 'रोने-धोने' से बगावत की जंगली आग भड़कती है।"

एसआईआर प्रोसेस की हालिया कानूनी और एडमिनिस्ट्रेटिव आलोचना को हाईलाइट करते हुए शिवसेना (यूबीटी) की ओर से मुखपत्र में सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस उज्जवल भुइयां की बात का जिक्र किया गया। जस्टिस भुइयां ने कहा था कि नागरिकों को उनके वोट देने के अधिकार से वंचित करने वाला कोई भी मनमाना प्रोसेस कॉन्स्टिट्यूशनल फ्रेमवर्क का उल्लंघन करता है और कहा था कि किसी नागरिक के वोट देने के अधिकार को छीनना "आत्मा को शरीर से अलग करने" जैसा है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया था कि जिंदा वोटर्स के नाम बिना सही प्रोसेस और पहले से नोटिस दिए नहीं हटाए जा सकते।

मुखपत्र में शिवसेना (यूबीटी) ने पूर्व यूनियन होम सेक्रेटरी और पूर्व केंद्रीय मंत्री आरके सिंह का भी जिक्र किया गया, जिन्होंने पब्लिकली देश भर में एसआईआर ड्राइव को गैरकानूनी बताया था। आर.के. सिंह ने कहा कि बिना सही जांच या सुनवाई के वोटर्स को हटाना सीधे तौर पर रिप्रेजेंटेशन ऑफ द पीपल एक्ट के सेक्शन 22 का उल्लंघन है।

संपादकीय में सवाल किया गया, "अगर एक अनुभवी एडमिनिस्ट्रेटिव ऑफिसर और सुप्रीम कोर्ट के जज दोनों इस प्रोसेस को मनमाना और गैरकानूनी कहते हैं, तो क्या भाजपा भी उनकी बातों को 'चीखना' कहेगी?" "तो फडणवीस और उनकी कंपनी को सबके सामने यह ऐलान करना चाहिए कि क्या इतने काबिल पुराने अधिकारी ने 'एसआईआर' के बारे में जो कहा, वह भी 'चीखना' है।"

संपादकीय में मुंबई की सड़कों पर मार्च करने वाले प्रदर्शनकारियों की मुख्य मांगों को दोहराया गया, एसआईआर प्रोसेस को तुरंत रद्द करना, इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) को खत्म करना और बैलेट पेपर पर वापस आने की बात कही गई।

--आईएएनएस

एसडी/पीएम