पश्चिम बंगाल के लिए वैज्ञानिक कृषि रोडमैप पर काम जारी: शिवराज सिंह चौहान
कोलकाता, 14 जुलाई (आईएएनएस)। केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने मंगलवार को कहा कि भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर), पश्चिम बंगाल के सरकारी कृषि विश्वविद्यालय और कृषि वैज्ञानिक मिलकर पश्चिम बंगाल के लिए एक वैज्ञानिक कृषि रोडमैप तैयार कर रहे हैं।
उन्होंने सबसे पहले कोलकाता में पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी के साथ एक उच्च-स्तरीय समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की। बैठक के बाद, मुख्यमंत्री के साथ एक संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए केंद्रीय मंत्री चौहान ने पश्चिम बंगाल के लिए वैज्ञानिक कृषि रोडमैप तैयार करने की योजनाओं की घोषणा की।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि यह रोडमैप कृषि-जलवायु परिस्थितियों, मिट्टी की विशेषताओं, पानी की उपलब्धता और स्थानीय संसाधनों के आधार पर क्षेत्र-विशिष्ट फसल योजना की पहचान करेगा, साथ ही कृषि उत्पादकता को अधिकतम करने के लिए उपयुक्त तकनीकों और मूल्य-श्रृंखला मॉडल की सिफारिश करेगा।
उन्होंने कहा कि चावल अनुसंधान संस्थानों को उत्कृष्टता केंद्रों (सेंटर ऑफ एक्सीलेंस) के रूप में विकसित करने के प्रयास किए जा रहे हैं, जिससे पश्चिम बंगाल चावल, आलू और मक्का जैसी फसलों में अनुसंधान-संचालित मॉडल के रूप में उभर सके।
इस अवसर पर उन्होंने यह भी घोषणा की कि प्राकृतिक आपदाओं से होने वाले फसल नुकसान से सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए पश्चिम बंगाल के किसानों को बहुत बड़े पैमाने पर प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के दायरे में लाया जाएगा।
चौहान ने कहा कि पश्चिम बंगाल में किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) तक पहुंच सीमित है, इसलिए केसीसी कवरेज का विस्तार करने के लिए नाबार्ड और बैंकों के सहयोग से ग्राम-स्तरीय शिविर आयोजित किए जाएंगे, ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि किसानों को किफायती संस्थागत ऋण मिले और अनौपचारिक ऋणदाताओं पर निर्भरता कम हो।
उन्होंने कहा कि प्राकृतिक खेती पर राष्ट्रीय मिशन, पीएम धन-धान्य कृषि योजना, डिजिटल एग्रीटेक और पोषण संवर्धन कार्यक्रम जैसी पहल पश्चिम बंगाल के कृषि परिदृश्य को काफी हद तक बदल देंगी।
उन्होंने घोषणा की कि दीनदयाल अंत्योदय योजना के तहत पश्चिम बंगाल में महिलाओं द्वारा संचालित स्वयं सहायता समूहों को बेहतर वित्तीय सहायता दी जाएगी। इस पैकेज में बैंक ऋण के रूप में 245 करोड़ रुपए और सामुदायिक निवेश कोष के तहत 50 करोड़ रुपए शामिल हैं।
चौहान ने कहा कि पश्चिम बंगाल की ग्रामीण महिलाएं बचत, ऋण और सूक्ष्म उद्यमों के माध्यम से घरेलू अर्थव्यवस्थाओं को बदल रही हैं। उन्होंने कहा कि अतिरिक्त आर्थिक मदद से प्रोडक्शन, प्रोसेसिंग, वैल्यू एडिशन और मार्केटिंग में उनकी भागीदारी मजबूत होगी, जिससे रोजगार के नए मौके बनेंगे और ग्रामीण आय में बढ़ोतरी होगी।
इस मौके पर उन्होंने यह भी बताया कि पश्चिम बंगाल के लिए 'प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण' के तहत एक लाख घरों को अंतरिम मंजूरी दे दी गई है और 'विकसित भारत-जी रामजी' फ्रेमवर्क के तहत ग्रामीण विकास और रोजगार सुरक्षा के लिए 12,064 करोड़ रुपए मंजूर किए गए हैं।
--आईएएनएस
एएसएच/डीकेपी