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तीन भाषा अनिवार्य करने वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और सीबीएसई से जवाब मांगा

 

नई दिल्ली, 27 मई (आईएएनएस)। सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) के संशोधित तीन भाषा फॉर्मूले की वैधता की जांच करने पर सहमति जताई। इस फॉर्मूले के तहत कक्षा 9 के छात्रों के लिए मौजूदा शैक्षणिक सत्र से कम से कम दो भारतीय मूल भाषाओं सहित तीन भाषाओं का अध्ययन अनिवार्य है।

भारत के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और विपुल एम. पंचोली की पीठ ने सीबीएसई परिपत्र को चुनौती देने वाली याचिका पर नोटिस जारी किया और केंद्र, सीबीएसई और राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) से विस्तृत जवाब मांगा।

सीजेआई की अध्यक्षता वाली पीठ ने नीति के कार्यान्वयन पर कोई अंतरिम रोक लगाने से इनकार किया और कहा कि ग्रीष्मकालीन अवकाश के बाद शीर्ष अदालत के फिर से खुलने पर जुलाई के दूसरे सप्ताह में इस मामले की अंतिम सुनवाई की जाएगी।

सुनवाई के दौरान, याचिकाकर्ता की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी ने तर्क दिया कि सीबीएसई के सर्कुलर के अनुसार, जमीनी स्तर पर तैयारियों के अभाव के बावजूद, छात्रों के लिए 1 जुलाई से तीन भाषाओं का अध्ययन करना अनिवार्य है।

उन्होंने नीति को लागू करने में आने वाली व्यावहारिक कठिनाइयों को उजागर करते हुए कहा कि 'पाठ्यपुस्तकें भी उपलब्ध नहीं हैं'। एक संबंधित मामले में पेश वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने तर्क दिया कि यह मुद्दा संघवाद और भाषा चुनने के अधिकार सहित महत्वपूर्ण संवैधानिक चिंताओं को उठाता है।

सिब्बल ने कहा कि भाषा पसंद का मामला है और इसे थोपा नहीं जा सकता। उन्होंने नीति को संघीय निहितार्थों वाला बताया।

हालांकि, पीठ ने टिप्पणी की कि सर्वोच्च न्यायालय इस स्तर पर संघीय पहलू की जांच नहीं कर रहा है, बल्कि शिक्षकों और अध्ययन सामग्री की उपलब्धता जैसे कार्यान्वयन संबंधी मुद्दों पर ध्यान केंद्रित कर रहा है।

सुनवाई के दौरान, केंद्र की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने तत्काल अंतरिम राहत की याचिका का विरोध किया और कहा कि इस मामले की विस्तृत सुनवाई बाद में की जा सकती है, क्योंकि कार्यान्वयन सर्वोच्च न्यायालय के अंतिम आदेशों के अधीन रहेगा।

राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 और राष्ट्रीय विद्यालय शिक्षा पाठ्यक्रम ढांचा (एनसीएफ-एसई) 2023 के साथ संक्रमणकालीन संरेखण के तहत जारी सीबीएसई के 15 मई के सर्कुलर के अनुसार, कक्षा 9 के छात्रों को तीन भाषाएं (आर1, आर2 और आर3) पढ़ना अनिवार्य होगा, जिनमें से कम से कम दो भारतीय मूल भाषाएं होनी चाहिए।

बोर्ड ने स्पष्ट किया कि छात्र केवल तीसरी भाषा के रूप में विदेशी भाषा का चयन कर सकते हैं, बशर्ते अन्य दो भारतीय भाषाएं हों, या फिर इसे अतिरिक्त चौथी भाषा के रूप में चुन सकते हैं।

अध्ययन सामग्री की उपलब्धता संबंधी चिंताओं को दूर करने के लिए, सीबीएसई ने कहा कि जब तक समर्पित पाठ्यपुस्तकें जारी नहीं हो जातीं, तब तक कक्षा 9 के छात्रों के लिए तीसरी भाषा की कक्षा 6 की पाठ्यपुस्तकों का उपयोग किया जाएगा।

इसमें यह भी कहा गया है कि कक्षा 10 स्तर पर तीसरी भाषा के लिए कोई बोर्ड परीक्षा आयोजित नहीं की जाएगी, और मूल्यांकन आंतरिक ही रहेगा।

--आईएएनएस

एमएस/एबीएम