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सुप्रीम कोर्ट ने अदालती कार्यवाही के अनधिकृत इस्तेमाल और व्यावसायिक शोषण पर सख्ती की मांग की

 

नई दिल्ली, 30 अक्टूबर (आईएएनएस)। सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को केंद्र को निर्देश दिया कि न्यायिक कार्यवाही की ऑडियो-वीडियो रिकॉर्डिंग के अनधिकृत उपयोग और व्यावसायिक शोषण पर लगाए गए अंतरिम प्रतिबंधों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कार्रवाई के उपायों को प्रस्तावित नीतिगत ढांचे में शामिल किया जाए।

भारत के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत औरन्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और वी. मोहना की पीठ ने इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (एमईआईटीवाई) को इस वर्ष जुलाई में सर्वोच्च न्यायालय द्वारा जारी अंतरिम निर्देशों का अनुपालन सुनिश्चित करने का निर्देश दिया।

सीजेआई सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने आदेश दिया कि एमईआईटीवाई को अंतरिम निर्देशों का अनुपालन सुनिश्चित करने का निर्देश दिया जाता है... निर्देशों का पालन न करने वालों के खिलाफ कार्रवाई के लिए आवश्यक उपाय भी नीतिगत ढांचे में शामिल किए जाएंगे।

यह निर्देश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता द्वारा शीर्ष न्यायालय को सूचित किए जाने के बाद आया कि केंद्र न्यायिक कार्यवाही की रिकॉर्डिंग के उपयोग को विनियमित करने के लिए एक नीति तैयार करने हेतु विभिन्न उच्च न्यायालयों और विधि समुदाय के सदस्यों से प्राप्त सुझावों पर विचार कर रहा है।

केंद्र के दूसरे सबसे बड़े विधि अधिकारी ने मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली पीठ को बताया कि सुझाव सुप्रीम कोर्ट रजिस्ट्री को भेज दिए गए हैं और इन सुझावों को शामिल करते हुए एक ढांचा तैयार किया जाएगा, जिसे सर्वोच्च न्यायालय के विचारार्थ प्रस्तुत किया जाएगा। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट को अपने पूर्व निर्देशों के उल्लंघन के मामलों से भी अवगत कराया और सुझाव दिया कि अंतरिम प्रतिबंधों का उल्लंघन करते हुए अपलोड की गई सामग्री को हटा दिया जाना चाहिए।

मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली पीठ ने सहमति व्यक्त की कि निर्देशों को प्रभावी ढंग से लागू करना आवश्यक है और कहा कि प्रस्तावित नीतिगत ढांचे में इनका पालन न करने वालों के खिलाफ उचित कार्रवाई का प्रावधान होना चाहिए।

कार्यवाही के दौरान, सुप्रीम कोर्ट ने डिजिटल वॉटरमार्किंग, प्रमाणित रिकॉर्डिंग और लाइव-स्ट्रीम की गई न्यायिक कार्यवाही के अनुमत उपयोग जैसे उपायों पर भी दलीलें सुनीं।

ये नवीनतम निर्देश अदालती कार्यवाही की ऑडियो-वीडियो रिकॉर्डिंग, विशेष रूप से सोशल मीडिया और अन्य डिजिटल प्लेटफार्मों के माध्यम से, अनधिकृत रूप से निकाले जाने, उनमें हेरफेर करने, प्रसारित करने और व्यावसायिक उपयोग को लेकर चिंताओं के बीच आए हैं।

इससे पहले, सुप्रीम कोर्ट ने न्यायिक कार्यवाही की ऑडियो-वीडियो रिकॉर्डिंग को सोशल मीडिया या किसी अन्य डिजिटल प्लेटफॉर्म पर सुप्रीम कोर्ट के महासचिव या अधिकार क्षेत्र वाले उच्च न्यायालयों के रजिस्ट्रार जनरल की पूर्व अनुमति के बिना निकालने, प्रसारित करने, मुद्रीकरण करने, पोस्ट करने, पुनः पोस्ट करने, अपलोड करने, प्रसारित करने, संशोधित करने, संग्रहीत करने या होस्ट करने पर अंतरिम प्रतिबंध लगा दिए थे।

सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया था कि उसके प्रतिबंध मान्यता प्राप्त समाचार माध्यमों द्वारा अदालती कार्यवाही की रिपोर्टिंग को प्रभावित नहीं करेंगे, जबकि बाद में यह स्पष्ट किया गया कि ऐसे संगठन न्यायिक घटनाक्रमों की रिपोर्टिंग जारी रख सकते हैं, लेकिन अपनी कवरेज में अदालती कार्यवाही के ऑडियो या वीडियो क्लिप का उपयोग नहीं कर सकते।

सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में सभी उच्च न्यायालयों और प्रमुख सोशल मीडिया मध्यस्थों और प्रौद्योगिकी प्लेटफार्मों को पक्षकार बनाया था, साथ ही अदालती कार्यवाही की लाइव स्ट्रीमिंग और रिकॉर्डिंग के लिए आदर्श नियमों को अपनाने पर उनके सुझाव मांगे थे।

केंद्र सरकार को याचिका में मांगी गई राहतों को लागू करने के लिए जिम्मेदार नोडल मंत्रालयों की पहचान करने का भी निर्देश दिया गया था।

--आईएएनएस

एमएस/