सत्य निकेतन हादसे के बाद पीजी-हॉस्टल के छात्रों में डर, बोले-दरारों वाले कमरों में रहने को मजबूर
नई दिल्ली, 9 सितंबर (आईएएनएस)। पिछले हफ्ते सत्य निकेतन में एक इमारत गिरने से सात लोगों की मौत के बाद, दिल्ली में पेइंग गेस्ट (पीजी) और हॉस्टल में रहने वाले छात्रों ने बुधवार को अपनी मुश्किलों के बारे में बात की। इनमें खराब बिल्डिंग की हालत, ज्यादा किराया और मॉनसून के दौरान पानी का रिसाव जैसी समस्याएं शामिल हैं।
इस दुखद घटना ने उन छात्रों के रहने की स्थितियों पर गंभीर चिंता पैदा कर दी है जो शिक्षा और बेहतर करियर के मौकों की तलाश में राजधानी आते हैं।
आईएएनएस ने कई छात्रों से बात की, जिन्होंने किराए के मकानों में रहने के अपने अनुभव और चिंताएं साझा कीं।
एक छात्र ने आईएएनएस को बताया, "पीजी में कई दरारें थीं और बिल्डिंग की हालत बहुत खराब थी। हम जिस कमरे में रह रहे थे, वह बहुत छोटा था और कभी-कभी कमरे में पानी आ जाता था। किराया भी बहुत ज्यादा था। बारिश के दौरान कमरे में पानी रिसता था।"
सत्य निकेतन की घटना के बाद, कुछ छात्रों को अस्थायी सुरक्षा उपाय के तौर पर कॉलेज कैंपस में शिफ्ट किया गया है।
एक और छात्र ने आईएएनएस को बताया, "हम अभी शहीद भगत सिंह कॉलेज के सेमिनार हॉल में रह रहे हैं। फिलहाल, हमें रहने और खाने की सुविधा दी गई है। यह जानकर बहुत अच्छा लग रहा है कि कॉलेज इस मुश्किल समय में हमारे साथ खड़ा है और हमारा समर्थन कर रहा है।"
'हॉस्टल डेज' पीजी के नाम से जानी जाने वाली यह बिल्डिंग ग्राउंड फ्लोर के अलावा चार मंजिल की थी, जो रविवार को गिर गई। इसमें सात लोगों की मौत हो गई और पांच अन्य घायल हो गए। बताया जा रहा है कि यह बिल्डिंग लगभग 50 साल पुरानी थी।
गुप्ता परिवार ने हाल ही में मरम्मत का काम करवाया था और प्रॉपर्टी को पीजी में बदल दिया था। ऐसा माना जा रहा है कि उन्होंने दिल्ली यूनिवर्सिटी के साउथ कैंपस के पास होने और इलाके में छात्रों के लिए रहने की जगह की मांग का फायदा उठाया था।
सत्य निकेतन की घटना ने दिल्ली हाईकोर्ट का ध्यान भी राजधानी में पीजी की हालत की ओर खींचा है। कोर्ट ने सिविक अधिकारियों को ऐसी प्रॉपर्टीज का निरीक्षण करने और उनकी स्ट्रक्चरल और कानूनी स्थिति की जांच करने का निर्देश दिया है। दो हफ्ते के भीतर रिपोर्ट मांगी गई है।
एफआईआर के अनुसार, मालिकों को कथित तौर पर पता था कि बिल्डिंग की पुरानी नींव अतिरिक्त वजन उठाने में सक्षम नहीं थी। इसके बावजूद, अतिरिक्त मंजिलों के निर्माण को जारी रखने की अनुमति दी गई थी।
एफआईआर में यह भी कहा गया है कि अतिरिक्त निर्माण से बिल्डिंग की स्ट्रक्चरल मजबूती और भार सहने की क्षमता पर काफी दबाव पड़ा, जिससे दशकों पुरानी बिल्डिंग अपनी क्षमता से ज्यादा दबाव झेलने लगी।
दिल्ली पुलिस ने इस मामले में 81 वर्षीय हरिराम गुप्ता को उनकी पत्नी और बेटे के साथ गिरफ्तार किया है। गुप्ता भारतीय वायु सेना के रिटायर्ड सार्जेंट हैं।
--आईएएनएस
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