पीएम मोदी के जन्मदिन पर ‘दीपोत्सव’ का बचाव, संतोष सुमन बोले- दीये जलाना भारतीय संस्कृति की अभिव्यक्ति
पटना, 17 सितंबर (आईएएनएस)। बिहार के मंत्री संतोष कुमार सुमन ने गुरुवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन के मौके पर प्रस्तावित 'दीपोत्सव' का बचाव किया। उन्होंने कहा कि जश्न के तौर पर दीये जलाने पर आपत्ति करने का कोई कारण नहीं है।
इस पहल पर उठ रहे सवालों का जवाब देते हुए सुमन ने पूछा कि मौजूदा प्रधानमंत्री का जन्मदिन 'दीपोत्सव' के जरिए मनाने को विवादित क्यों माना जाए, जबकि भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू की जयंती लंबे समय से 14 नवंबर को 'बाल दिवस' के रूप में मनाई जाती रही है।
उन्होंने कहा कि जन्मदिन किसी व्यक्ति के जीवन का एक अहम मौका होता है और इसे अलग-अलग तरीकों से मनाया जा सकता है। भारतीय संस्कृति में दीये (मिट्टी के दीपक) का खास महत्व है और पारंपरिक रूप से यह रोशनी, शुभता, ज्ञान और कल्याण का प्रतीक है।
उन्होंने आगे कहा कि इसलिए जन्मदिन पर दीये जलाने को भारतीय सांस्कृतिक परंपराओं और भावनाओं की अभिव्यक्ति के तौर पर देखा जाना चाहिए।
सुमन ने कहा कि पिछले कुछ सालों में केक काटना और मोमबत्तियां बुझाना जन्मदिन मनाने का एक लोकप्रिय तरीका बन गया है।
आधुनिक तौर-तरीकों को अपनाने में कुछ भी गलत न मानते हुए संतोष सुमन ने कहा कि ऐसा करने का मतलब भारत की अपनी सांस्कृतिक परंपराओं को छोड़ना नहीं होना चाहिए।
सुमन के मुताबिक, मोमबत्तियां बुझाने के बजाय दीये जलाना कोई राजनीतिक काम नहीं है, बल्कि भारत की सांस्कृतिक पहचान से जुड़े रहने की एक कोशिश है।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के जन्मदिन पर 'दीपोत्सव' आयोजित करने का मकसद इसी सांस्कृतिक चेतना को बढ़ावा देना था। आधुनिकता और पारंपरिक मूल्यों के बीच संतुलन बनाए रखकर ही भारत तरक्की कर सकता है।
सुमन ने यह भी कहा कि अगर लोग अपने घरों, संस्थानों और सार्वजनिक जगहों पर दीये जलाकर प्रधानमंत्री मोदी के अच्छे स्वास्थ्य, लंबी उम्र और सफल जीवन की कामना करते हैं तो इस काम को विवाद का विषय नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति की सकारात्मक अभिव्यक्ति माना जाना चाहिए।
उन्होंने कहा, "जन्मदिन रोशनी का जश्न होना चाहिए, अंधेरे का नहीं। दीये जलाए जाने चाहिए, शुभकामनाएं दी जानी चाहिए और नई पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़े रहते हुए आगे बढ़ना चाहिए।" उन्होंने इसे ही प्रस्तावित 'दीपोत्सव' के पीछे की मुख्य भावना बताया।
--आईएएनएस
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