डॉलर के मुकाबले 94.50 के स्तर पर जा सकता है रुपया, पूंजी प्रवाह बढ़ाने के लिए संरचनात्मक उपाय जरूरी: रिपोर्ट
नई दिल्ली, 12 अक्टूबर (आईएएनएस)। विदेशी मुद्रा भंडार मजबूत होने से डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया छोटी अवधि में 94.50 के स्तर तक जा सकता है। हालांकि, सरकार को देश में पूंजी प्रवाह को बढ़ाने के लिए संरचनात्मक उपाय करने होंगे। यह जानकारी सोमवार को जारी रिपोर्ट में दी गई।
एसबीआई रिसर्च की रिपोर्ट में कहा गया कि वित्त वर्ष 27 में बैलेंस-ऑफ-पेमेंट्स (बीओपी) अधिशेष कम होकर लगभग 55-60 अरब डॉलर रह सकता है और भारत का विदेशी मुद्रा भंडार सबसे मुश्किल हालात में भी किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए काफी है।
रुपए को सपोर्ट करने के लिए, रिपोर्ट में उन मॉनेटरी और रेगुलेटरी कदमों के बारे में बताया गया जो रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (आरबीआई) ने उठाए हैं, और साथ ही उन अतिरिक्त राजकोषीय और कर उपायों का भी जिक्र है जिन पर सरकार को निवेशकों का भरोसा बनाए रखने के लिए विचार करना चाहिए।
रिपोर्ट में कहा गया कि अगर रुपए की लिक्विडिटी कम की जाती है, तो रुपए की आपूर्ति कम हो जाएगी। साथ ही, एमएसएफ रेट बढ़ाकर ऊपरी सीमा को बढ़ाने से रुपए की कीमत बढ़ जाएगी। इन उपायों से कम समय के लिए रुपए की वैल्यू को बचाया जा सकता है।
आरबीआई ने सरकारी तेल मार्केटिंग कंपनियों के लिए डॉलर की आपूर्ति का एक सीधा रास्ता (विंडो) खोला है, जिससे हर महीने लगभग 10-12 अरब डॉलर ओपन स्पॉट मार्केट से हटकर इस रास्ते से आएंगे। रोजाना कैश रिजर्व रेश्यो (सीआरआर) बनाए रखने की जरूरत को बढ़ाकर 99 प्रतिशत कर दिया गया है और 25,000 करोड़ रुपए के ओपन मार्केट ऑपरेशन की बिक्री का ऐलान किया गया है।
आरबीआई ने विदेशी मुद्रा हेजिंग सुविधाओं के गलत इस्तेमाल को रोकने के लिए कागजी कार्रवाई को सख्त करने जैसे कदम भी उठाए हैं।
आरबीआई ने कहा, "अधिकृत डीलरों को उन यूजर्स से एक अंडरटेकिंग लेनी होगी और उसे अपने पास रखना होगा जो भारतीय रुपए से जुड़े विदेशी मुद्रा डेरिवेटिव कॉन्ट्रैक्ट कर रहे हैं। इस अंडरटेकिंग में यह पुष्टि करनी होगी कि उसी अंडरलाइंग एक्सपोजर के लिए किसी अन्य अधिकृत डीलर के साथ हेजिंग नहीं की गई है।"
विदेशी मुद्रा बाजार के सुचारू कामकाज को सुनिश्चित करने के लिए, आरबीआई ने रद्द किए गए विदेशी मुद्रा डेरिवेटिव कॉन्ट्रैक्ट्स की रीबुकिंग पर पाबंदियां लगाई हैं।
--आईएएनएस
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