होर्मुज पर ईरान का नियंत्रण बना तो इंडो-पैसिफिक तक बढ़ेगा खतरा: रुबियो
वॉशिंगटन, 23 जुलाई (आईएएनएस)। अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने गुरुवार को चेतावनी दी कि अगर ईरान को होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले जहाजों पर नियंत्रण करने दिया गया तो यह एक खतरनाक मिसाल बन जाएगी। उनका कहना है कि इसका असर सिर्फ मध्य पूर्व तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि आगे चलकर हिंद-प्रशांत क्षेत्र में भी ऐसा देखने को मिल सकता है।
उन्होंने कहा कि यह मामला सिर्फ क्षेत्रीय तनाव का नहीं, बल्कि समुद्री रास्तों पर आजादी से आवाजाही और पूरी दुनिया की व्यापार व्यवस्था की सुरक्षा का है।
मनीला में 'आसियान' पोस्ट-मिनिस्टीरियल कॉन्फ्रेंस में बोलते हुए रुबियो ने कहा कि ईरान की हरकतें अंतरराष्ट्रीय व्यापार के एक बेहद अहम सिद्धांत के लिए खतरा हैं। उन्होंने कहा कि एशिया के लिए यह और भी ज्यादा महत्वपूर्ण है क्योंकि यहां की अर्थव्यवस्था काफी हद तक समुद्री व्यापार पर निर्भर करती है।
रुबियो ने कहा, "ईरान यह अधिकार मांग रहा है कि वह होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले जहाजों की आवाजाही को नियंत्रित करे, लेकिन मौजूदा किसी भी अंतरराष्ट्रीय कानूनी व्यवस्था के तहत उसे ऐसा कोई अधिकार नहीं है।"
उन्होंने होर्मुज स्ट्रेट को एक अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्ग बताते हुए कहा कि अगर किसी देश को ऐसे रास्ते पर नियंत्रण करने दिया गया, तो इसके नतीजे सिर्फ खाड़ी क्षेत्र तक सीमित नहीं रहेंगे।
उन्होंने कहा, "अगर हम मध्य पूर्व में ऐसी मिसाल बनने देते हैं कि कोई देश यह तय करे कि वह एक अंतरराष्ट्रीय समुद्री रास्ते को नियंत्रित करेगा, उस पर टैक्स या शुल्क वसूलेगा, और अगर कोई भुगतान न करे तो उसके जहाज उड़ा देगा, तो हम एक बहुत खतरनाक मिसाल कायम कर देंगे। फिर यही चीज दुनिया के दूसरे हिस्सों में भी दोहराई जा सकती है, जिनमें यह क्षेत्र भी शामिल है।"
'आसियान' देशों के विदेश मंत्रियों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि यह विवाद सिर्फ ईरान और अमेरिका के बीच का मामला नहीं है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय समुद्री आवाजाही के नियमों की रक्षा का सवाल है।
रुबियो ने कहा, "यह सिर्फ होर्मुज स्ट्रेट का मुद्दा नहीं है। असली सवाल समुद्री रास्तों पर आजादी से आवाजाही का है। अगर इस पर खतरा पैदा होता है, तो पूरी वैश्विक अर्थव्यवस्था पर असर पड़ेगा और पिछले करीब 150 साल से जिस अंतरराष्ट्रीय व्यापार व्यवस्था के आधार पर दुनिया का कारोबार चल रहा है, वह भी खतरे में पड़ जाएगी।"
उन्होंने कहा कि अमेरिका अब भी ईरान के साथ बातचीत के लिए तैयार है, लेकिन उनका आरोप है कि ईरान ने पहले हुई बातचीत में किए गए वादे पूरे नहीं किए, जबकि बातचीत की पहल उसी की तरफ से हुई थी।
रुबियो ने कहा, "अमेरिका हमेशा कूटनीतिक बातचीत के पक्ष में रहा है। हम खुले मन से बातचीत करने और मतभेदों का समाधान बातचीत के जरिए निकालने के लिए हमेशा तैयार हैं।"
उन्होंने कहा कि ईरान ने अमेरिका से सीधे और परोक्ष दोनों तरीकों से संपर्क किया था, लेकिन पहले हुए समझौतों में किए गए अपने वादे पूरे नहीं किए। दुर्भाग्य से अब तक, समझौते होने के बावजूद उन्होंने अपनी प्रतिबद्धताओं का पालन नहीं किया।
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का ज़िक्र करते हुए रुबियो ने कहा कि अगर ईरान ईमानदारी से बातचीत करना चाहता है, तो अमेरिका भी पूरी गंभीरता से बातचीत के लिए तैयार है।
उन्होंने कहा, "अगर वे गंभीर हैं, तो हम भी गंभीर हैं। लेकिन अगर ऐसा नहीं है, तो अपने हितों और अपने सहयोगी देशों के हितों की रक्षा के लिए जो जरूरी होगा, हम वह करेंगे।"
--आईएएनएस
एवाई/डीकेपी