☰
×

वेनेजुएला से अधिक कच्चे तेल के आयात और प्रसंस्करण पर रिलायंस के साथ बातचीत करेंगे रूबियो

 

मुंबई, 20 अक्टूबर (आईएएनएस)। अमेरिका के स्टेट सेक्रेटरी मार्को रुबियो ने मंगलवार को कहा कि अमेरिका, वेनेजुएला से अधिक कच्चे तेल के आयात और जामनगर स्थित रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड (आरआईएल) की रिफाइनरी में इसके प्रसंस्करण को लेकर कंपनी के साथ बातचीत करेगा।

यह मुद्दा इसलिए महत्वपूर्ण हो गया है, क्योंकि अमेरिका ने वेनेजुएला के तेल क्षेत्रों का नियंत्रण अपने हाथ में ले लिया है। इन तेल क्षेत्रों से भारी कच्चे तेल का उत्पादन होता है, जिसे अधिकांश रिफाइनरियों में प्रसंस्कृत नहीं किया जा सकता। गुजरात के तट पर स्थित रिलायंस की रिफाइनरी में इस भारी कच्चे तेल के प्रसंस्करण के लिए आवश्यक तकनीकी क्षमता मौजूद है।

रुबियो ने मुंबई पहुंचने के बाद भारत की अपनी तीन दिवसीय यात्रा शुरू की। उन्होंने गेटवे ऑफ इंडिया में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से मुलाकात की।

मुंबई में विदेश मंत्री एस. जयशंकर के साथ उनकी बातचीत में व्यापार वार्ता, ऊर्जा सहयोग, प्रौद्योगिकी साझेदारी, महत्वपूर्ण खनिजों और रूसी तथा वेनेजुएला के कच्चे तेल के आयात से जुड़े नीतिगत मुद्दों पर चर्चा हुई।

भारत और अमेरिका से व्यापार, ऊर्जा, निवेश, रक्षा और महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकियों के क्षेत्रों में सहयोग को आगे बढ़ाने की उम्मीद है।

2026 में रुबियो की यह भारत की दूसरी यात्रा है। उन्होंने हाल ही में कहा था कि दोनों देशों के बीच व्यापक व्यापार समझौता लगभग पूरा हो चुका है। इससे संभावना जताई जा रही है कि उनकी यात्रा के दौरान इस पर हस्ताक्षर हो सकते हैं।

राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पिछले सप्ताह संभावित शुल्कों को माफ कर दिया था। इन शुल्कों का उद्देश्य शुरुआत में रूसी कच्चे तेल की खरीद के लिए भारत पर दंडात्मक कार्रवाई करना था।

ट्रंप ने एक कार्यकारी आदेश के जरिए रूसी तेल के पांच सबसे बड़े आयातक देशों पर लगाए जाने वाले 100 प्रतिशत शुल्क को माफ कर दिया है। इसमें भारत भी शामिल होता, जो चीन के बाद भारत रूसी तेल का दूसरा सबसे बड़ा खरीदार है।

रुबियो ने कहा है कि व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने की कोशिश भी इन शुल्कों को माफ करने के फैसले का एक कारण थी।

अमेरिका के विदेश मंत्री ने पिछले सप्ताह भारत का बचाव करते हुए उसे अमेरिका का एक महत्वपूर्ण सहयोगी बताया था।

रुबियो ने कहा, "उदाहरण के लिए, भारत जैसे देश हैं, जिन्होंने स्वेच्छा से अपने ऊर्जा स्रोतों में विविधता लाई है, लेकिन वे अब भी रूस से काफी मात्रा में ऊर्जा खरीद रहे हैं, क्योंकि एक दिन से दूसरे दिन ऊर्जा आपूर्ति के स्रोत को बदलना मुश्किल है।"

उन्होंने कहा, "लेकिन भारत अमेरिका का एक महत्वपूर्ण सहयोगी और साझेदार भी है।"

--आईएएनएस

एबीएस