मार्को रुबियो के दौरे से भारत को मिला भरोसा, इंडो-पैसिफिक क्षेत्र पर अमेरिका का फोकस बरकरार
वॉशिंगटन, 27 मई (आईएएनएस)। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने अपनी चार दिन की भारत यात्रा का इस्तेमाल क्वाड सहयोग को मजबूत करने और नई दिल्ली को यह भरोसा दिलाने के लिए किया कि ट्रंप प्रशासन इंडो-पैसिफिक क्षेत्र को अब भी एक अहम रणनीतिक प्राथमिकता मानता है। यह बात विश्लेषकों और बिजनेस जगत के लोगों ने आईएएनएस को बताई।
यह मार्को रुबियो की अमेरिकी विदेश मंत्री के रूप में भारत की पहली यात्रा थी। इस दौरान उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, विदेश मंत्री एस. जयशंकर और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल से मुलाकात की। साथ ही उन्होंने क्वाड विदेश मंत्रियों की बैठक में भी हिस्सा लिया।
जनरल एटॉमिक्स ग्लोबल कॉरपोरेशन के सीईओ डॉ. विवेक लाल ने इस यात्रा को 'बहुत सही समय पर हुई यात्रा' बताया।
उन्होंने आईएएनएस से कहा, “मुझे लगता है कि यह दोनों देशों के लिए एक बार फिर रणनीतिक बातचीत करने और एक साझा रणनीतिक दिशा तय करने का बेहतरीन मौका है।”
उन्होंने कहा कि भारत-अमेरिका संबंध अब 'एक अहम मोड़' पर पहुंच चुके हैं और रक्षा सहयोग, जरूरी समझौते और सैन्य अभ्यासों में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। यह रिश्ता बहुत रणनीतिक है। रक्षा और अंतरिक्ष के क्षेत्र में आगे और भी सहयोग की काफी संभावनाएं हैं।
क्वाड के बारे में बात करते हुए उन्होंने कहा कि यह समूह फिर से रफ्तार पकड़ रहा है। क्वाड में ऑस्ट्रेलिया, भारत, जापान और अमेरिका शामिल हैं।
उन्होंने कहा, “क्वाड में जो नई ऊर्जा वापस आई है और जिन ठोस नतीजों की बात हो रही है, उससे आने वाले समय में इसे और ज्यादा ताकत और ध्यान मिलेगा।”
उन्होंने कहा कि कॉमन ऑपरेटिंग पिक्चर, निगरानी और सुरक्षा सहयोग क्वाड साझेदारी के अहम हिस्से हैं।
यूएस इंडिया स्ट्रैटेजिक एंड पार्टनरशिप फोरम (यूएसआईएसपीएफ) के अध्यक्ष और सीईओ मुकेश आघी ने कहा कि रुबियो की यात्रा से साफ होता है कि वॉशिंगटन की भू-राजनीतिक सोच में इंडो-पैसिफिक क्षेत्र की अहमियत लगातार बढ़ रही है।
उन्होंने आईएएनएस को बताया, “क्वाड विदेश मंत्रियों की बैठक के लिए सचिव रुबियो की भारत यात्रा दिखाती है कि इंडो-पैसिफिक क्षेत्र अमेरिका की रणनीतिक प्राथमिकताओं में बहुत महत्वपूर्ण बन चुका है।”
आघी के मुताबिक, अब क्वाड सिर्फ कूटनीतिक दिखावे तक सीमित नहीं है बल्कि यह आर्थिक और रणनीतिक सहयोग की ओर आगे बढ़ रहा है।
उन्होंने कहा कि समुद्री सुरक्षा, महत्वपूर्ण खनिज, ऊर्जा, मजबूत सप्लाई चेन और नई तकनीकों पर मिलकर काम करने से भारत-अमेरिका साझेदारी और मजबूत होगी और एक 'खुला और स्थिर इंडो-पैसिफिक' बनाने में मदद मिलेगी।
उन्होंने 'क्वाड क्रिटिकल मिनरल्स इनिशिएटिव फ्रेमवर्क' और 'इंडो-पैसिफिक एनर्जी सिक्योरिटी इनिशिएटिव' जैसे कदमों को निजी क्षेत्र के लिए बड़े मौके बताया।
उन्होंने कहा कि इंडो-पैसिफिक समुद्री निगरानी सहयोग इस क्षेत्र की आर्थिक और रणनीतिक स्थिरता को मजबूत करता है और नियमों पर आधारित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था को बनाए रखने में मदद करता है।
हडसन इंस्टीट्यूट की सीनियर फेलो अपर्णा पांडे ने इस यात्रा को 'प्रतीकात्मक और व्यावहारिक दोनों रूप से महत्वपूर्ण' बताया।
उन्होंने कहा, “भारत के लिए, अमेरिका के दूसरे ट्रंप प्रशासन के एक बड़े मंत्री और भारत-अमेरिका संबंधों के लंबे समय से समर्थक का आना यह दिखाता है कि भारत अमेरिका के लिए रणनीतिक रूप से बहुत महत्वपूर्ण बना हुआ है।”
उन्होंने कहा कि भारत की ओर से क्वाड विदेश मंत्रियों की बैठक की मेजबानी करना भी काफी महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा, “अमेरिका के बाहर पहली बार क्वाड विदेश मंत्रियों की बैठक भारत में होना अपने आप में बड़ा संदेश देता है।”
उनके अनुसार, रुबियो का मकसद यह दिखाना था कि अमेरिका की रणनीति में इंडो-पैसिफिक अब भी केंद्र में है, चाहे दुनिया में और भी कई संकट क्यों न चल रहे हों।
--आईएएनएस
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