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रोहिणी आचार्य और मुकेश सहनी ने प्रदर्शनकारियों की हिरासत की निंदा की, केंद्र पर साधा निशाना

 

पटना, 10 अक्टूबर (आईएएनएस)। राष्ट्रीय जनता दल (राजद) प्रमुख लालू प्रसाद यादव की बेटी रोहिणी आचार्य और विकासशील इंसान पार्टी (वीआईपी) के संस्थापक मुकेश सहनी ने शनिवार को दिल्ली के जंतर-मंतर पर मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर जमा हुए प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिए जाने की आलोचना की है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, 500 से ज्यादा प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया। हिरासत में लिए गए लोगों में कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के संस्थापक अभिजीत दिपके, आशुतोष रांका, सौरव दास और सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर ध्रुव राठी शामिल थे।

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर कई पोस्ट में रोहिणी आचार्य ने प्रदर्शनकारियों के खिलाफ की गई कार्रवाई की आलोचना की और उनके प्रति समर्थन जताया। उन्होंने कहा, "डराएं या धमकाएं नहीं, देश अब जाग चुका है। देश के युवा तानाशाही के खिलाफ सड़कों पर उतर आए हैं।"

एक अन्य पोस्ट में रोहिणी आचार्य ने कहा, "जब भी आप सच बोलने वाली आवाज को दबाएंगे, देश के हर कोने में आपको कई ध्रुव राठी और सौरव मिल जाएंगे।"

आचार्य ने सीजेपी नेता अभिजीत दिपके, सौरव दास, आशुतोष रांका और ध्रुव राठी को हिरासत में लिए जाने की खबरों पर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि यह कार्रवाई केंद्र सरकार की बढ़ती मनमानी को दिखाती है।

उन्होंने उन खबरों पर भी चिंता जताई जिनके मुताबिक, प्रदर्शन में शामिल होने के लिए दिल्ली जा रहे कुछ युवाओं को एयरपोर्ट पर रोक दिया गया या उन्हें राजधानी में घुसने से रोका गया।

संविधान के अनुच्छेद 19 का जिक्र करते हुए आचार्य ने कहा कि शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर रोक लगाना उनके मौलिक अधिकारों का उल्लंघन हो सकता है। उन्होंने हिरासत में लिए जाने की घटना की निंदा की और प्रदर्शनकारियों को रिहा करने की मांग की।

वीआईपी संस्थापक और बिहार के पूर्व मंत्री मुकेश सहनी ने भी युवाओं के लिए मक्खियों और कॉकरोच जैसे अपमानजनक शब्दों के कथित इस्तेमाल की आलोचना की और उनके अधिकारों तथा संविधान को लेकर सवाल उठाए। सहनी ने कहा कि ऐसी बातें दुर्भाग्यपूर्ण हैं और लोकतांत्रिक मूल्यों का अपमान हैं।

उन्होंने जुब्बा सहनी, भगत सिंह, चंद्रशेखर आजाद और रानी लक्ष्मीबाई जैसे स्वतंत्रता सेनानियों की विरासत को याद किया, जिन्होंने अन्याय और दमन के खिलाफ लड़ाई लड़ी थी।

उन्होंने कहा कि रोजगार, शिक्षा, मौकों, अधिकारों और संवैधानिक मूल्यों को लेकर चिंता जताने वाले युवाओं की बात सुनी जानी चाहिए, न कि उन्हें अपमानित किया जाना चाहिए। साहनी ने इस बात पर जोर दिया कि सवाल पूछने वाले युवा लोकतंत्र की ताकत हैं, न कि 'मक्खियां' या 'कॉकरोच'। सत्ता में बैठे लोगों को युवा पीढ़ी की चिंताओं का सम्मानपूर्वक जवाब देना चाहिए।

उन्होंने आगे कहा कि लोकतंत्र सिर्फ चुनावों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें नागरिकों को अपनी राय रखने और सत्ता में बैठे लोगों से सवाल पूछने का अधिकार भी शामिल है।

उन्होंने केंद्र सरकार से युवाओं की आवाज दबाने के बजाय उनकी चिंताओं पर ध्यान देने का आग्रह किया और कहा कि संवैधानिक मूल्यों और लोकतांत्रिक सिद्धांतों को बनाए रखने के लिए सम्मानजनक बातचीत जरूरी है।

--आईएएनएस

पीएसके