लाल सागर संकट का पाकिस्तान पर असर, हूती संघर्ष से शिपिंग और व्यापार पर बढ़ा दबाव: रिपोर्ट
नई दिल्ली, 6 सितंबर (आईएएनएस)। लाल सागर और बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य क्षेत्र में बढ़ते हूती संघर्ष का असर अब पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था और समुद्री व्यापार पर भी दिखाई देने लगा है। द ग्लोबल कश्मीर में प्रकाशित एक लेख के अनुसार, पाकिस्तान की विदेशी मुद्रा आय का एक बड़ा हिस्सा जहाजों पर काम करने वाले पाकिस्तानी नाविकों की विदेश से आने वाली कमाई और कराची तथा ग्वादर बंदरगाहों से जुड़े व्यापारिक प्रवाह पर निर्भर करता है। इन दोनों के लिए बाब-अल-मंदेब और अदन की खाड़ी का समुद्री मार्ग अत्यंत महत्वपूर्ण है।
रिपोर्ट के अनुसार, पहले इस क्षेत्र में मुख्य चुनौती समुद्री डकैती थी, जिससे निपटने के लिए अंतरराष्ट्रीय नौसैनिक गश्त और सुरक्षा एस्कॉर्ट की व्यवस्था पर्याप्त मानी जाती थी। हालांकि 2023 के अंत से स्थिति काफी बदल गई है। यमन के हूती समूह द्वारा मिसाइल और ड्रोन हमलों के कारण यह समुद्री क्षेत्र कहीं अधिक खतरनाक बन गया है और वैश्विक व्यापारिक जहाजों के लिए गंभीर जोखिम पैदा हो गया है।
लेख में कहा गया है कि बदलती सुरक्षा परिस्थितियों ने समुद्री मार्गों की रक्षा के लिए अत्याधुनिक नौसैनिक क्षमताओं की आवश्यकता बढ़ा दी है। ऐसे जहाजों और प्रणालियों की जरूरत है जो मिसाइलों को रोक सकें, व्यापारिक जहाजों को सुरक्षा प्रदान कर सकें और हमले की स्थिति में तुरंत प्रतिक्रिया दे सकें। पाकिस्तान के पास वर्तमान में ऐसी नौसैनिक क्षमता उपलब्ध नहीं है।
रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान इस समुद्री गलियारे पर काफी निर्भर है, लेकिन इसकी सुरक्षा सुनिश्चित करने की क्षमता उसके पास नहीं है। बाब-अल-मंदेब जैसे रणनीतिक मार्गों में सुरक्षा संचालन मुख्य रूप से कुछ चुनिंदा देशों और उनके नेतृत्व वाले बहुराष्ट्रीय नौसैनिक गठबंधनों के हाथ में है। ऐसे में पाकिस्तान आर्थिक रूप से इस मार्ग पर निर्भर तो है, लेकिन इसके संचालन या सुरक्षा व्यवस्था को प्रभावित करने की स्थिति में नहीं है।
लेखिका मेहक फारूक के अनुसार, पाकिस्तान ऐसी स्थिति में है जहां वह आर्थिक जोखिम तो उठाता है, लेकिन उन जोखिमों को नियंत्रित करने के लिए आवश्यक परिचालन साधन उसके पास नहीं हैं। यही कारण है कि क्षेत्र में बढ़ती अस्थिरता का सीधा असर उसकी अर्थव्यवस्था पर पड़ रहा है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि वर्ष 2023 से इस समुद्री गलियारे की स्थिति कई बार बिगड़ी है, जिसके परिणामस्वरूप बीमा लागत में वृद्धि, शिपिंग शेड्यूल में व्यवधान और पाकिस्तानी नाविकों के लिए कामकाज का अधिक कठिन माहौल पैदा हुआ है। ये सभी कारक पाकिस्तान के व्यापारिक खर्च और वैश्विक प्रतिस्पर्धा को प्रभावित कर रहे हैं।
पाकिस्तानी नौसेना वर्तमान में मुख्य रूप से अपने झंडे वाले जहाजों की सुरक्षा और घरेलू समुद्री मार्गों तक सीमित है। लेकिन पाकिस्तान के आर्थिक हितों का बड़ा हिस्सा उन विदेशी ध्वज वाले जहाजों और समुद्री गतिविधियों से जुड़ा है जो बाब-अल-मंदेब मार्ग से होकर गुजरते हैं। रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान की मौजूदा समुद्री सुरक्षा व्यवस्था इन व्यापक आर्थिक हितों की पर्याप्त सुरक्षा करने में सक्षम नहीं है।
लेख में यह भी कहा गया है कि इतनी दूर स्थित रणनीतिक समुद्री क्षेत्र में स्वतंत्र नौसैनिक उपस्थिति स्थापित करने के लिए भारी वित्तीय संसाधनों और दीर्घकालिक रणनीतिक निवेश की आवश्यकता होगी, जो फिलहाल पाकिस्तान की रक्षा प्राथमिकताओं का हिस्सा नहीं दिखाई देते।
रिपोर्ट का निष्कर्ष यह है कि पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था एक ऐसे समुद्री गलियारे पर अत्यधिक निर्भर है, जिस पर उसका सुरक्षा या संचालन संबंधी नियंत्रण बेहद सीमित है। जब तक आर्थिक निर्भरता और नौसैनिक क्षमता के बीच यह असंतुलन बना रहेगा, तब तक यह जोखिम बढ़ता रहेगा और उसका प्रभाव राष्ट्रीय आर्थिक आंकड़ों में भी दिखाई देता रहेगा।
--आईएएनएस
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