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अफगान प्रवासियों की जबरन वापसी पर पाकिस्तान की आलोचना, मानवाधिकार आयोग ने जताई चिंता

 

इस्लामाबाद, 10 मई (आईएएनएस)। पाकिस्तान के मानवाधिकार आयोग ने अफगान प्रवासियों को जबरन देश से निकालने की कार्रवाई को 'अमानवीय' बताया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि इस कदम की वजह से हजारों परिवारों की जिंदगी संकट में पड़ गई है।

अपनी सालाना रिपोर्ट में आयोग ने कहा कि पाकिस्तान सरकार की ओर से बिना दस्तावेज वाले प्रवासियों को निकालने की नीति लागू करने के बाद अफगान शरणार्थियों के लिए स्वास्थ्य सेवाएं, इलाज और आर्थिक मदद जैसी जरूरी सुविधाओं तक पहुंच बहुत सीमित हो गई है।

शिया वेव्स की रिपोर्ट के मुताबिक, मानवाधिकार संस्था ने कहा कि पाकिस्तान के इस फैसले ने अफगान शरणार्थियों पर अतिरिक्त दबाव डाल दिया है और उनकी परेशानियां और बढ़ गई हैं।

आयोग ने जरूरी सेवाओं से वंचित किए जाने और अफगान प्रवासियों को जबरन निकाले जाने पर चिंता जताई। उसका कहना है कि इन परिवारों की स्थिति लगातार खराब होती जा रही है।

आयोग ने पाकिस्तान से अपील की कि वह प्रवासियों के साथ व्यवहार करते समय मानवाधिकारों और इंसानी गरिमा का सम्मान करे। रिपोर्ट में कहा गया कि अफगान प्रवासियों को निकालने की पाकिस्तान की नीति को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी चिंता बढ़ी है।

पिछले महीने अमेरिका स्थित मानवाधिकार संगठन ह्यूमन राइट्स वॉच (एचआरडब्‍ल्‍यू) ने कहा था कि अफगानिस्तान के साथ सीमा पर फिर से तनाव बढ़ने के बाद पाकिस्तान में अफगान शरणार्थियों के खिलाफ छापेमारी, मनमानी गिरफ्तारियां और जबरन निर्वासन बढ़ गया है।

एचआरडब्‍ल्‍यू के अनुसार, हजारों कमजोर अफगान शरणार्थियों, जिनमें बच्चे भी शामिल हैं, को पुलिस कार्रवाई की वजह से स्वास्थ्य सेवाओं, शिक्षा और दूसरी जरूरी सुविधाओं तक पहुंचने में गंभीर दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।

एचआरडब्‍ल्‍यू ने यह भी कहा कि अफगानों को जबरन वापस भेजना संयुक्त राष्ट्र के यातना विरोधी समझौते और अंतरराष्ट्रीय कानून के खिलाफ हो सकता है। इन कानूनों के तहत किसी व्यक्ति को ऐसी जगह जबरन नहीं भेजा जा सकता, जहां उसे उत्पीड़न, यातना, बुरे व्यवहार या जान का खतरा हो।

एचआरडब्‍ल्‍यू की शोधकर्ता फरेश्ता अब्बासी ने कहा क‍ि पाकिस्तानी अधिकारी अफगान शरणार्थियों को सुरक्षा की जरूरत वाले लोगों की तरह देखने के बजाय उनके बीच डर फैला रहे हैं।

पुलिस की सख्त कार्रवाई की वजह से लोग खाना और इलाज जैसी बुनियादी जरूरतों से भी दूर हो रहे हैं, जबकि बड़े पैमाने पर निर्वासन उन्हें अफगानिस्तान में संभावित उत्पीड़न और खतरों की तरफ वापस धकेल रहा है।

अब्बासी ने पाकिस्तान से अपील की कि वह पुलिस की ज्यादतियों पर रोक लगाए और अफगान शरणार्थियों को जबरन वापस भेजना तुरंत बंद करे। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से भी कहा कि वह पाकिस्तान सरकार के सामने इन मुद्दों को उठाए और अफगानिस्तान में जारी मानवाधिकार उल्लंघनों की आलोचना करे।

एचआरडब्‍ल्‍यू के बयान के मुताबिक, फरवरी से पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच तनाव बढ़ने के बाद पाकिस्तान पुलिस ने देश के कई हिस्सों में अफगान लोगों के खिलाफ कार्रवाई तेज कर दी है। पुलिस घर-घर छापेमारी, देर रात तलाशी और बिना वारंट गिरफ्तारी कर रही है।

पुलिस ने वैध वीजा रखने वाले और बिना दस्तावेज वाले दोनों तरह के अफगानों को गिरफ्तार किया है। कई अफगानों के पास जरूरी दस्तावेज नहीं हैं, क्योंकि पाकिस्तान सरकार ने 2023 से अफगान शरणार्थियों के 'प्रूफ ऑफ रजिस्ट्रेशन' कार्ड और दूसरे रेजिडेंसी दस्तावेजों का नवीनीकरण बंद कर दिया था। गिरफ्तार किए गए शरणार्थियों को आमतौर पर होल्डिंग सेंटर भेजा जाता है और फिर उन्हें देश से बाहर कर दिया जाता है।

साल 2026 में अब तक 1,46,000 से ज्यादा अफगानों को पाकिस्तान से निर्वासित किया जा चुका है, और एक अप्रैल के बाद से यह संख्या लगातार बढ़ रही है।

--आईएएनएस

एवाई/वीसी