बलूचिस्तान के कलात में जबरन बेदखली पर भड़का बलोच मानवाधिकार संगठन, पाकिस्तान पर लगाए गंभीर आरोप
क्वेटा, 23 सितंबर (आईएएनएस)। बलूचिस्तान के कलात जिले में पाकिस्तानी अधिकारियों ने निवासियों को अपने घर खाली करने का निर्देश दिया है। मानवाधिकार संगठन बलोच यकजेहती कमेटी (बीवाईसी) ने पाकिस्तानी अधिकारियों के आदेश की कड़ी निंदा की है। संगठन ने इसे बलोच नागरिकों के खिलाफ 'राज्य दमन, सामूहिक सजा और नरसंहार की नीति' का हिस्सा बताया।
मानवाधिकार संगठन ने कहा कि कलात के सहायक आयुक्त द्वारा 20 सितंबर को जारी आदेश में स्थानीय आबादी को 28 सितंबर तक शोर परोद, खलीली, खलख्ती और शोकी इलाकों को खाली करने का निर्देश दिया गया था।
बीवाईसी ने कहा, "पूरी आबादी को जबरन उनकी पैतृक जमीन, घरों और आजीविका से विस्थापित करना केवल एक प्रशासनिक कदम नहीं है, बल्कि अपनी ही जमीन पर स्थानीय आबादी के जीवन, पहचान और अस्तित्व पर सीधा हमला है।"
मानवाधिकार संगठन ने कहा कि यह कदम सिर्फ स्थानांतरण का उपाय नहीं है, बल्कि सामूहिक सजा थोपने और स्थानीय आबादी में डर फैलाने का एक प्रयास है।
बीवाईसी ने कहा, "किसी व्यक्ति या समूह की कार्रवाइयों के लिए पूरी आबादी को जिम्मेदार ठहराना सामूहिक सजा है और जब यही प्रथा एक विशिष्ट राष्ट्रीय पहचान वाली आबादी को लगातार विस्थापित करने, उन्हें उनके आर्थिक संसाधनों से वंचित करने और उनके सामाजिक ताने-बाने को ध्वस्त करने का रूप ले लेती है, तो यह नरसंहार की व्यापक प्रक्रिया से जुड़ जाती है।"
संगठन ने कहा, "लोगों को उन बस्तियों से बेदखल करना, जहां उनके घर, जमीन, आजीविका और पीढ़ियों का जीवन जुड़ा है, सिर्फ उन्हें बेघर करना नहीं है, बल्कि उन्हें धीमी मौत के हवाले करना है।"
बीवाईसी ने कहा कि राष्ट्रीय पहचान के आधार पर बलोच लोगों को सामूहिक सजा देना और डर, जबरन पलायन और वंचित करने के जरिए समुदायों को विस्थापित करना अस्वीकार्य है।
बलूचिस्तान के कई अन्य इलाकों में जबरन विस्थापन का हवाला देते हुए उसने कहा कि इस तरह के कदम पाकिस्तानी अधिकारियों द्वारा दमन के व्यापक पैटर्न का हिस्सा हैं, जिसने आम लोगों को उनके घरों, जमीन, आजीविका और सामान्य जीवन से वंचित कर दिया है।
बीवाईसी ने कहा, "सामूहिक सजा का उद्देश्य केवल लोगों को विस्थापित करना नहीं है, बल्कि डर पैदा करना, सवालों को खामोश करना, सामूहिक प्रतिरोध को तोड़ना और एक अधीन आबादी पर समर्पण थोपना है।"
मानवाधिकार संगठन ने जबरन बेदखली के आदेश को स्पष्ट रूप से खारिज कर दिया और इसे तुरंत वापस लेने की मांग की। उसने मांग की कि स्थानीय आबादी को सुरक्षा दी जाए और उन्हें अपने घरों और पैतृक इलाकों में स्वतंत्रता, गरिमा और सुरक्षा के साथ जीने का अधिकार दिया जाए।
--आईएएनएस
केके/एबीएम