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बांग्लादेश में भगवान राम की तस्वीर के अपमान का आरोप, अल्पसंख्यक संगठन ने जताई नाराजगी

 

ढाका, 15 जून (आईएएनएस)। बांग्लादेश के गायबंधा जिले के पलाशबाड़ी उपजिला स्थित राधा-गोविंद मंदिर में भगवान राम की तस्वीर के कथित अपमान और मंदिर में स्थापित प्रतिमा को तोड़ने की धमकियों को लेकर विवाद गहरा गया है। देश के प्रमुख अल्पसंख्यक अधिकार संगठन बांग्लादेश हिंदू बौद्ध क्रिश्चियन एकता परिषद ने घटना की कड़ी निंदा करते हुए इसे हिंदू समुदाय की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाला बताया है।

संगठन के अनुसार, एक सांप्रदायिक समूह द्वारा निकाले गए जुलूस के दौरान भगवान राम की तस्वीर का अपमान किया गया। परिषद ने आरोप लगाया," पिछले कई दिनों से कुछ कट्टरपंथी तत्व पलाशबाड़ी में भगवान श्रीराम की प्रतिमा को और मंदिर परिसर को नुकसान पहुंचाने की धमकियां दे रहे हैं।"

परिषद का कहना है," इन समूहों द्वारा सोशल मीडिया और अन्य माध्यमों से अल्पसंख्यक समुदायों के खिलाफ नफरत फैलाने का अभियान भी चलाया जा रहा है।" संगठन ने चेतावनी दी कि ऐसी गतिविधियां किसी भी समय व्यापक सांप्रदायिक हिंसा का रूप ले सकती हैं।

परिषद ने कहा, "लोकतांत्रिक और बहुलतावादी समाज में इस प्रकार की उकसावे वाली और भड़काऊ गतिविधियां पूरी तरह अस्वीकार्य हैं।" संगठन ने बांग्लादेश सरकार से मांग की कि सांप्रदायिक शक्तियों पर तत्काल और सख्त कार्रवाई की जाए ताकि सामाजिक सौहार्द और शांति बनी रहे।

संगठन ने भगवान राम की तस्वीर के अपमान और धार्मिक भावनाएं भड़काने में शामिल लोगों की तत्काल गिरफ्तारी तथा कड़ी सजा की भी मांग की है। साथ ही सभी धर्मनिरपेक्ष नागरिकों, सामाजिक संगठनों और लोकतांत्रिक राजनीतिक दलों से इन गतिविधियों के खिलाफ एकजुट होकर आवाज उठाने की अपील की है।

इस बीच, स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, पलाशबाड़ी में प्रस्तावित भगवान राम की विशाल प्रतिमा के निर्माण कार्य को भी प्रशासन ने रोक दिया है। मंदिर के सलाहकार श्यामल कुमार महंत ने हाल ही में इसकी घोषणा की थी। आलोचकों का आरोप है कि यह फैसला इस्लामी कट्टरपंथी समूहों के दबाव में लिया गया।

बांग्लादेशी अखबार ब्लिट्ज के संपादक सलाह उद्दीन शोएब चौधरी ने भी इस घटनाक्रम पर चिंता जताते हुए कहा कि स्थानीय जिहादी और इस्लामवादी संगठनों के विरोध के बाद मंदिर परियोजना की गतिविधियां रोक दी गई हैं। यह मामला अब बांग्लादेश में धार्मिक स्वतंत्रता और अल्पसंख्यकों की सुरक्षा को लेकर नई बहस का विषय बन गया है।

--आईएएनएस

केआर/