पाकिस्तान में प्रेस की आजादी पर बड़ा हमला, विदेशी मीडिया पर रोक, पीएफयूजे बोला- ग्लोबल रैंकिंग और गिरेगी
कोलंबो, 24 सितंबर (आईएएनएस)। पाकिस्तान सरकार द्वारा विदेशी मीडिया पर लगाए गए नए प्रतिबंध यह दर्शाते हैं कि वह नकारात्मक कवरेज का मुकाबला करने के लिए ऐसे कदम उठा रही है, जिससे स्वतंत्र रिपोर्टिंग ज्यादा मुश्किल हो जाए।
पाकिस्तान सरकार की नई 'विदेशी मीडिया फैसिलिटेशन गाइडलाइंस 2026' के अनुसार, विदेशी मीडिया संगठनों और उनके साथ काम करने वाले लोगों को पंजीकरण कराना और मान्यता प्राप्त करना अनिवार्य होगा।
अंतरराष्ट्रीय मीडिया संगठनों के लिए काम करने वाले पत्रकारों को इस्लामाबाद, लाहौर और कराची से बाहर रिपोर्टिंग के लिए जाने से पहले सरकार से मंजूरी लेनी होगी। श्रीलंकाई अखबार डेली मिरर की एक रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तानी पत्रकार, सहयोगी, फ्रीलांसर और अन्य कर्मचारी भी नियमों का पालन करने के लिए बाध्य होंगे।
रिपोर्ट में बताया गया कि विदेशी मीडिया संस्थानों और उनसे जुड़े कर्मियों को पंजीकरण और मान्यता प्रक्रिया से गुजरना होगा। विदेशी मीडिया संगठनों के लिए काम करने वाले विदेशी नागरिक और पाकिस्तानी नागरिक दोनों ही इस आधिकारिक प्रणाली के दायरे में आएंगे।
मंत्रालय की एक्सटर्नल पब्लिसिटी विंग के साथ पहले से ही पंजीकृत या मान्यता प्राप्त विदेशी पत्रकारों को पाकिस्तान के अन्य हिस्सों में जाकर न्यूज स्टोरी, वीडियो, डॉक्यूमेंट्री, फिल्म या सोशल मीडिया कंटेंट बनाने से पहले 'अनापत्ति प्रमाण पत्र' (एनओसी) लेना होगा।
पाकिस्तानी अधिकारियों ने नई गाइडलाइंस तब घोषित की, जब अंतरराष्ट्रीय मीडिया संगठनों ने पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (पीओके) में अशांति और चुनावों पर रिपोर्टिंग की, जबकि अधिकारियों ने मीडिया संस्थानों पर भ्रामक खबरें पेश करने का आरोप लगाया।
रिपोर्ट में कहा गया, "पाकिस्तान की मीडिया पर नवीनतम कार्रवाई ने खुद ही अपनी छवि की समस्या पैदा कर ली है। स्वतंत्र जांच जितनी मुश्किल होती है, प्रतिबंधों पर उतना अधिक ध्यान आकर्षित होता है।"
पाकिस्तान की नई विदेशी मीडिया फैसिलिटेशन गाइडलाइंस 2026 को लेकर मीडिया संगठनों ने कड़ी आलोचना की और इसे प्रेस की स्वतंत्रता पर सीधा हमला और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर प्रहार करार दिया।
पाकिस्तान फेडरल यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट्स (पीएफयूजे) ने कहा कि पाकिस्तान सरकार द्वारा लागू की गई गाइडलाइंस प्रेस की स्वतंत्रता पर सीधा हमला है और चेतावनी दी कि इन उपायों से वैश्विक मीडिया रैंकिंग में पहले से ही निचले स्तर पर मौजूद पाकिस्तान की स्थिति और खराब होगी।
जुरिस्ट न्यूज की रिपोर्ट के मुताबिक, पीएफयूजे ने कहा, "ये गाइडलाइंस अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर हमला करने और प्रेस की स्वतंत्रता पर अंकुश लगाने के समान हैं।"
वहीं, कमेटी टू प्रोटेक्ट जर्नलिस्ट्स (सीपीजे) ने पाकिस्तान सरकार से इन गाइडलाइंस को वापस लेने का आग्रह किया है। इन उपायों की आलोचना करते हुए सीपीजे के अफगानिस्तान और पाकिस्तान प्रतिनिधि वलीउल्लाह रहमानी ने कहा, "विदेशी मीडिया फैसिलिटेशन गाइडलाइंस पाकिस्तानी अधिकारियों के लिए अंतरराष्ट्रीय मीडिया कवरेज को और प्रतिबंधित करने, पत्रकारों को पाकिस्तान के तीन मुख्य शहरों के बाहर स्वतंत्र रूप से रिपोर्टिंग करने से रोकने और उन्हें प्रशासनिक प्रतिशोध के जोखिम में डालने का दरवाजा खोलती हैं।"
उन्होंने कहा कि ये गाइडलाइंस पाकिस्तान में प्रेस की स्वतंत्रता के लिए एक और "भयावह झटका" हैं, जहां पत्रकार पहले से ही कड़े दमन का सामना कर रहे हैं, खासकर वे जो पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) में अशांति पर रिपोर्टिंग कर रहे हैं।
सीपीजे के अनुसार, नई गाइडलाइंस पाकिस्तान सरकार द्वारा पीओके में चुनावों और विरोध प्रदर्शनों पर अंतरराष्ट्रीय रिपोर्टिंग की आलोचना करने और अंतरराष्ट्रीय मीडिया संस्थान अल जजीरा पर येलो जर्नलिज्म यानी सनसनीखेज रिपोर्टिंग में शामिल होने का आरोप लगाने के कुछ दिनों बाद ही जारी की गई। इसके बाद पाकिस्तान में अल जजीरा की वेबसाइट पर पहुंच प्रतिबंधित कर दी गई।
कई अंतरराष्ट्रीय संगठनों ने पाकिस्तान सरकार से अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के अधिकार पर बढ़ते प्रतिबंधों को समाप्त करने का आग्रह किया है, जिसमें प्रेस की स्वतंत्रता, सूचना तक पहुंच और मानवाधिकारों की वकालत शामिल है।
--आईएएनएस
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