बॉम्बे हाईकोर्ट ने समीर वानखेड़े के खिलाफ एनसीबी की जांच पर नाराजगी जताई
मुंबई, 30 जुलाई (आईएएनएस)। बॉम्बे हाई कोर्ट ने गुरुवार को नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी) से सवाल किया कि उसने सिर्फ एक आरोपी के आरोपों और गुमनाम शिकायतों के आधार पर अपने ही जांच अधिकारी समीर वानखेड़े के खिलाफ कार्रवाई क्यों की। कोर्ट ने इसे आपराधिक न्याय व्यवस्था में अव्यवस्था फैलाने वाला कदम बताया।
जस्टिस एएस गडकरी और जस्टिस कमल खाता की बेंच ने इस बात पर चिंता जताई कि एनसीबी ने 2021 के आर्यन खान मामले में शामिल अपने पूर्व जोनल डायरेक्टर के खिलाफ कई जांच शुरू कीं। बेंच ने कहा कि इस तरह के कदम से ईमानदार अधिकारियों का मनोबल गिरेगा।
वानखेड़े की टीम के एक वकील ने बताया कि कोर्ट ने कहा कि अगर आरोपियों को जांच अधिकारियों पर आरोप लगाने की इजाजत दी जाती है और विभाग उन आरोपों पर तुरंत कार्रवाई करता है तो इससे आपराधिक न्याय व्यवस्था में अफरातफरी मच जाएगी।
बेंच ने टिप्पणी की कि इस तरह का कदम एक खतरनाक और गलत मिसाल कायम करेगा, जिससे आरोपी जांच अधिकारियों को सिर्फ इसलिए निशाना बना सकेंगे क्योंकि उन्होंने अपने कानूनी कर्तव्यों का पालन किया था।
जस्टिस गडकरी और जस्टिस खाता उस याचिका पर सुनवाई कर रहे थे जिसमें गुमनाम शिकायतों के आधार पर वानखेड़े के खिलाफ जारी शुरुआती जांच के नोटिस को रद्द करने की मांग की गई थी।
सुनवाई के दौरान, हाई कोर्ट ने अंतिम सुनवाई के लिए रिट याचिका को स्वीकार कर लिया और वानखेड़े के पक्ष में अंतरिम राहत दी, जिससे याचिका पर अंतिम फैसला होने तक उन्हें सुरक्षा मिल गई।
वानखेड़े के लिए विवाद कोई नई बात नहीं है। 2 अक्टूबर 2021 को, उन्होंने कॉर्डेलिया क्रूज द्वारा संचालित एक क्रूज शिप पर तलाशी और जब्ती अभियान का नेतृत्व किया था। इस दौरान सुपरस्टार शाहरुख खान के बेटे आर्यन खान को नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंस एक्ट, 1985 के तहत अपराधों के लिए 19 अन्य लोगों के साथ गिरफ्तार किया गया था।
गुरुवार को हाई कोर्ट में सुनवाई के दौरान, बेंच ने एनसीबी से यह भी पूछा कि क्या आरोपी ने वानखेड़े की शुरुआती गिरफ्तारी के समय या जांच के दौरान उन पर कोई आरोप लगाया था।
कोर्ट ने पूछा कि अधिकारी के खिलाफ ऐसे आरोप बाद में ही क्यों सामने आए और यह स्पष्टीकरण मांगा कि इतने देर से इन आरोपों पर क्यों ध्यान दिया गया।
वकील ने कहा कि वानखेड़े ने लगातार यह बात कही है कि उनके खिलाफ शुरू की गई कार्यवाही मनमानी, दुर्भावनापूर्ण, कानूनी रूप से टिकने लायक नहीं और प्रशासनिक प्रक्रिया का दुरुपयोग है।
--आईएएनएस
एससीएच/डीकेपी