राजेश एक्सपोर्ट्स का मामला अर्ध-न्यायिक मुद्दा है, कानून प्रक्रिया के तहत आदेश का पालन किया जाना चाहिए या इसे चुनौती दी जानी चाहिए: एसईबीआई अध्यक्ष
मुंबई, 8 जून (आईएएनएस)। सेबी यानी भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (एसईबीआई) के चेयरमैन तुहिन कांत पांडे ने सोमवार को राजेश एक्सपोर्ट्स के खिलाफ नियामक की कार्रवाई पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया। उन्होंने कहा कि यह मामला एक अर्ध-न्यायिक (क्वासी-ज्यूडिशियल) प्रक्रिया का हिस्सा है और इसे कानूनी प्रक्रिया के तहत ही निपटाया जाना चाहिए।
मुंबई में आयोजित इंडिया इन्वेस्टर कॉन्फ्रेंस के दौरान पत्रकारों से बातचीत में पांडे ने कहा, "सिद्धांत के तौर पर हम मीडिया में किसी व्यक्तिगत मामले पर टिप्पणी नहीं करते। यह एक अर्ध-न्यायिक प्रक्रिया है, जिसमें आदेश जारी किए जाते हैं और उनका पालन किया जाना चाहिए या फिर कानून में निर्धारित प्रक्रिया के तहत उन्हें चुनौती दी जा सकती है। इसलिए मैं इस मामले पर कोई टिप्पणी नहीं करूंगा।"
बॉन्ड ब्रोकरों के लिए आने वाले नियमों और टोकनाइजेशन पहल पर बोलते हुए सेबी प्रमुख ने कहा कि नियामक का टोकनाइजेशन पायलट प्रोग्राम पूरा होने में अभी 6 से 9 महीने और लग सकते हैं।
पांडे का यह बयान ऐसे समय आया है जब कुछ दिन पहले ही सेबी ने राजेश एक्सपोर्ट्स के प्रमोटर और सीईओ राजेश मेहता को कंपनी के शेयरों में कारोबार करने से रोक दिया था। सेबी ने उन पर वित्तीय अनियमितताओं, फंड डायवर्जन और संबंधित पक्षों के साथ हुए लेनदेन में पर्याप्त जानकारी नहीं देने के आरोप लगाए हैं।
सेबी की कार्रवाई के बाद राजेश एक्सपोर्ट्स के शेयरों पर दबाव बना हुआ है। सोमवार को कंपनी का शेयर बीएसई पर 5 प्रतिशत गिरकर अपने लोअर सर्किट और दिन के निचले स्तर 94.50 रुपए पर पहुंच गया।
पिछले सप्ताह भी सेबी के अंतरिम आदेश के बाद कंपनी का शेयर लगातार दो कारोबारी सत्रों में लोअर सर्किट पर बंद हुआ था।
सेबी की अंतरिम जांच में पहली नजर में यह सामने आया कि कंपनी से जुड़े फंड्स को व्यक्तिगत खातों और संबंधित संस्थाओं के जरिए घुमाया गया। इन लेनदेन के बारे में पर्याप्त जानकारी और दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराए गए।
नियामक ने कहा कि कंपनी को कई बार सही वित्तीय विवरण और फंड्स के अंतिम उपयोग तथा लाभार्थियों की जानकारी देने का मौका दिया गया, लेकिन कंपनी के जवाब संतोषजनक नहीं रहे।
सेबी ने यह भी आरोप लगाया कि कंपनी के वैधानिक ऑडिटरों ने जांच में पूरा सहयोग नहीं किया। नियामक के अनुसार, आश्वासन देने के बावजूद ऑडिट से जुड़े कार्यपत्र (वर्किंग पेपर्स) उपलब्ध नहीं कराए गए।
सेबी का कहना है कि लगातार सहयोग न करना इस बात का संकेत देता है कि महत्वपूर्ण जानकारी छिपाने और जांच में बाधा डालने की कोशिश की गई हो सकती है।
बाजार नियामक ने अपने अवलोकन में कहा कि कंपनी की लगभग 97 से 99 प्रतिशत आय (रेवेन्यू) बढ़ा-चढ़ाकर दिखाई गई प्रतीत होती है। सेबी ने इन कथित अनियमितताओं को "गंभीर और अभूतपूर्व" बताया है।
अंतरिम आदेश में कहा गया कि राजेश मेहता कंपनी के वित्तीय संचालन पर महत्वपूर्ण नियंत्रण रखते थे। इसलिए उन्हें अगले आदेश तक कंपनी के शेयरों की खरीद-बिक्री या किसी भी प्रकार के लेनदेन से प्रतिबंधित किया गया है।
वहीं, राजेश एक्सपोर्ट्स ने सेबी के आरोपों को खारिज किया है और कहा है कि कंपनी में किसी प्रकार की वित्तीय अनियमितता नहीं हुई है।
स्टॉक एक्सचेंज को दी गई जानकारी में कंपनी ने कहा कि उसके राजस्व के आंकड़े सही हैं। कंपनी का यह भी कहना है कि उसके और नियामक के बीच संचार संबंधी कुछ गलतफहमी हो सकती है।
कंपनी ने विश्वास जताया कि प्रमाणित दस्तावेज उसके पक्ष को सही साबित करेंगे और सभी आरोपों का जवाब देंगे।
--आईएएनएस
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