राजस्थान सरकार का फैसला, एनसीआर के छह जिलों में सिर्फ तीन घंटे फोड़ सकेंगे पटाखे, ग्रीन पटाखों पर क्यूआर कोड अनिवार्य
जयपुर, 4 नवंबर (आईएएनएस)। राजस्थान सरकार ने बुधवार को दीपावली के दौरान वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए नई गाइडलाइंस जारी की हैं। इसके तहत राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) में आने वाले छह जिलों में पटाखों की बिक्री और उनके इस्तेमाल पर रोक लगा दी गई है।
नए नियमों के तहत अलवर, भरतपुर, दौसा, डीग, खैरथल-तिजारा और कोटपूतली-बहरोड़ जैसे जिलों में केवल दो दिनों के लिए पटाखे जलाने की अनुमति होगी, और इन्हें अधिकतम तीन घंटे तक ही जलाया जा सकेगा।
केवल प्रमाणित 'ग्रीन पटाखे' (पर्यावरण के अनुकूल पटाखे) ही इस्तेमाल किए जा सकेंगे, जबकि अन्य सभी तरह के पटाखों पर प्रतिबंध रहेगा।
ग्रीन पटाखों के हर पैकेट पर एक क्यूआर कोड होना अनिवार्य है। ग्राहक इस कोड को स्कैन करके निर्माता का नाम, प्रमाणन और लाइसेंस जैसी जानकारी की जांच कर सकते हैं।
राजस्थान सूचना एवं जनसंपर्क विभाग (डीआईपीआर) ने दीपावली के दौरान वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए राज्य सरकार द्वारा जारी विस्तृत दिशा-निर्देश साझा किए हैं।
निर्देशों के अनुसार, एनसीआर क्षेत्र में केवल सीएसआईआर-एनईईआरआई द्वारा प्रमाणित ग्रीन पटाखों की ही बिक्री और उपयोग की अनुमति होगी।
इन पटाखों को केवल 7 और 8 नवंबर को सुबह 6 बजे से 7 बजे के बीच और रात 8 बजे से 10 बजे के बीच ही जलाया जा सकता है।
राज्य सरकार ने अस्पतालों, स्वास्थ्य केंद्रों और शिक्षण संस्थानों के 300 मीटर के दायरे में पटाखे जलाने पर भी रोक लगा दी है।
इन दिशा-निर्देशों का पालन सुनिश्चित करने के लिए, पटाखों के अवैध निर्माण, भंडारण और बिक्री के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
बिना क्यूआर कोड वाले पटाखों की बिक्री प्रतिबंधित है। इन्हें केवल अधिकृत दुकानों से ही बेचा जा सकता है, और इनकी ऑनलाइन बिक्री पर भी रोक है।
जिला कलेक्टरों और पुलिस अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे अवैध पटाखों की बिक्री, भंडारण और आपूर्ति को रोकें।
दुकानों और गोदामों की जांच के लिए विशेष टीमें गठित की जाएंगी।
दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र से राजस्थान में प्रवेश करने वाले वाहनों की भी जांच की जाएगी।
नियमों का उल्लंघन करने पर पटाखे जब्त कर लिए जाएंगे और कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और जिलास्तरीय अधिकारी दीपावली के दौरान और उसके बाद भी हर दिन प्रदूषण के स्तर की निगरानी करेंगे।
अधिकारी प्रदूषण के स्तर पर रिपोर्ट तैयार करेंगे, जबकि दिशा-निर्देशों का उल्लंघन करने वाले व्यक्तियों, व्यापारियों और निर्माताओं के खिलाफ पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम के तहत कार्रवाई की जाएगी।
--आईएएनएस
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