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राजस्थान: राज्य सरकार ने 33 अधिकारियों के खिलाफ की कार्रवाई, सैलरी इंक्रीमेंट और पेंशन पर लगाई रोक

 

जयपुर, 28 अक्टूबर (आईएएनएस)। राजस्थान सरकार ने कथित भ्रष्टाचार, अवैध रेत खनन माफिया के साथ मिलीभगत, वित्तीय गड़बड़ियों और ड्यूटी में लापरवाही के लिए 33 मौजूदा और रिटायर्ड अधिकारियों के खिलाफ सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई की है।

इस कार्रवाई में 17 मौजूदा अधिकारियों की सैलरी इंक्रीमेंट रोकना और 16 रिटायर्ड अधिकारियों की पेंशन रोकना या कम करना शामिल है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने भ्रष्टाचार के प्रति अपनी जीरो-टॉलरेंस पॉलिसी के तहत गुड गवर्नेंस, ट्रांसपेरेंसी और अकाउंटेबिलिटी के लिए राज्य सरकार की प्रतिबद्धता दोहराई है।

बड़ी पेनाल्टी वाले 30 डिसिप्लिनरी मामलों के समाधान के बाद सरकार ने 17 मौजूदा राज्य सरकार के अधिकारियों की दो से चार सालाना सैलरी इंक्रीमेंट रोकने की मंजूरी दे दी है। गंभीर गलत काम के दोषी पाए गए 16 रिटायर्ड अधिकारियों की पेंशन रोकने या कम करने के लिए अलग से आदेश भी जारी किए गए हैं।

मौजूदा अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई मुख्य रूप से अपराधियों, अवैध माइनिंग करने वालों के साथ कथित मिलीभगत और पुलिस जांच में लापरवाही से जुड़े मामलों से जुड़ी है। जांच में पाया गया कि उस समय के एक सर्कल ऑफिसर (सीओ) ने अवैध रेत माइनिंग और आपराधिक गतिविधियों से जुड़े लोगों के साथ मिलीभगत की थी और कथित तौर पर गलत फायदे उठाए थे। सरकार ने कुल मिलाकर चार सालाना सैलरी इंक्रीमेंट रोकने की मंजूरी दे दी है।

एक और आपराधिक मामले में उस समय के एक सर्कल इंस्पेक्टर (सीआई), एक असिस्टेंट सब-इंस्पेक्टर (एएसआई), और एक कांस्टेबल को सही जांच न करने के लिए लापरवाह पाया गया। संबंधित कर्मचारियों के खिलाफ सालाना सैलरी इंक्रीमेंट रोकने सहित अनुशासनात्मक कार्रवाई की गई है।

राज्य सरकार ने सरकारी योजनाओं को लागू करने में लापरवाही बरतने और अपने आधिकारिक कामों को पूरा न करने के लिए जिम्मेदार पाए गए अधिकारियों के खिलाफ भी कार्रवाई की है।

राजस्थान एडमिनिस्ट्रेटिव सर्विस (आरएएस) के एक अधिकारी को महात्मा गांधी नेशनल रूरल एम्प्लॉयमेंट गारंटी स्कीम के तहत किए गए कामों के इंस्पेक्शन और मेंटेनेंस में बड़ी लापरवाही के लिए दंडित किया गया है। बिना इजाजत के लंबे समय तक ड्यूटी से गैरहाजिर रहने पर तीन मेडिकल ऑफिसर के खिलाफ डिसिप्लिनरी एक्शन शुरू किया गया है।

गलत तरीके से खून देने से जुड़े एक और गंभीर मामले में एक डॉक्टर को दो सालाना सैलरी इंक्रीमेंट रोककर सजा दी गई है। बर, हॉर्टिकल्चर और सेक्रेटेरिएट सर्विस के अधिकारियों पर भी गलत काम के आरोप साबित होने के बाद डिसिप्लिनरी एक्शन लिया गया है।

भजनलाल शर्मा सरकार ने साफ कर दिया है कि रिटायरमेंट का मतलब यह नहीं है कि अधिकारी अपनी सर्विस के दौरान किए गए गंभीर गलत कामों के लिए जिम्मेदारी से छूट पा जाएंगे।

वित्तीय गड़बड़ियों और दूसरे गंभीर नियमों के उल्लंघन के मामलों में 16 रिटायर्ड अधिकारियों को पेंशन से जुड़ी सजा मिली है। राजस्थान अकाउंट्स सर्विस के एक रिटायर्ड अधिकारी को एक प्राइवेट कंपनी को गलत फायदा पहुंचाने के लिए सरकारी रिकॉर्ड में हेरफेर करने का दोषी पाया गया, जिससे सरकारी खजाने को काफी फाइनेंशियल नुकसान हुआ। सरकार ने अधिकारी की 100 प्रतिशत पेंशन हमेशा के लिए रोकने का आदेश दिया है।

राजस्थान एडमिनिस्ट्रेटिव सर्विस के दो रिटायर्ड अधिकारियों को रेजिडेंशियल और कमर्शियल प्लॉट को गलत तरीके से खेती की जमीन बताकर सरकार को भारी फाइनेंशियल नुकसान पहुंचाने के लिए जिम्मेदार पाया गया। पेनल्टी के तौर पर, उनकी पेंशन का 20 परसेंट पांच साल के लिए रोक दिया गया है।

सरकार ने मेडिकल और हेल्थ, सोशल जस्टिस, माइंस, कॉलेज एजुकेशन और देवस्थान डिपार्टमेंट से जुड़े मामलों में डिसिप्लिनरी फैसले भी लिए हैं। राज्य सरकार ने इस बात पर जोर दिया है कि अनुशासनात्मक कार्रवाई तय नियमों के हिसाब से होनी चाहिए और इसमें पारदर्शिता होनी चाहिए।

राजस्थान सिविल सर्विसेज़ (क्लासिफिकेशन, कंट्रोल और अपील) रूल्स, 1958 के रूल 16 के तहत, आठ मामलों में अधिकारियों को राहत मिली क्योंकि विस्तृत जांच में उनके खिलाफ आरोपों को बनाए रखने के लिए काफी आधार नहीं पाए गए।

सरकार ने कहा है कि अनुशासनात्मक कार्रवाई अलग-अलग मामलों के नतीजों के आधार पर होगा, जिससे यह पक्का होगा कि गलत काम के दोषी पाए गए अधिकारियों को सही सजा मिले, जबकि जिन पर कोई आरोप नहीं है, उन्हें राहत मिले। 33 मौजूदा और रिटायर्ड अधिकारियों के खिलाफ एक्शन लेकर राजस्थान सरकार ने भ्रष्टाचार से लड़ने, गैर-कानूनी माइनिंग पर रोक लगाने, फाइनेंशियल गड़बड़ियों को रोकने और पूरे राज्य प्रशासन में जवाबदेही को मजबूत करने के अपने वादे को और पक्का किया है।

--आईएएनएस

एसडी/पीएम