राजस्थान में डेयरी क्षेत्र को ग्रामीण अर्थव्यवस्था का मजबूत आधार बनाने पर जोर, सीएम ने एक्शन प्लान बनाने का दिया निर्देश
जयपुर, 24 अप्रैल (आईएएनएस)। राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि अधिक से अधिक पशुपालक किसानों को डेयरी क्षेत्र से जोड़ा जाए। उन्होंने इसे राजस्थान की ग्रामीण अर्थव्यवस्था का एक महत्वपूर्ण आधार बताया।
उन्होंने कहा कि डेयरी क्षेत्र राज्य की अर्थव्यवस्था में अहम भूमिका निभा रहा है और इसे और मजबूत करने के लिए नवाचार और प्रभावी क्रियान्वयन की जरूरत है।
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा शुक्रवार को मुख्यमंत्री कार्यालय में राजस्थान कोऑपरेटिव डेयरी फेडरेशन की विभिन्न योजनाओं की प्रगति, विस्तार और क्रियान्वयन की समीक्षा बैठक की अध्यक्षता कर रहे थे।
उन्होंने अधिकारियों को दुग्ध उत्पादों के विपणन को बेहतर बनाने के लिए व्यापक कार्ययोजना तैयार करने और सख्त गुणवत्ता मानकों के साथ उसे प्रभावी ढंग से लागू करने के निर्देश दिए।
उन्होंने 'विकसित ग्राम' और 'विकसित वार्ड' अभियानों के आंकड़ों के आधार पर नए डेयरी बूथ स्थापित करने के भी निर्देश दिए।
मुख्यमंत्री ने दोहराया कि राज्य सरकार दूध उत्पादकों और उपभोक्ताओं दोनों के हितों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है। मुख्यमंत्री दूध उत्पादक संबल योजना जैसी योजनाएं डेयरी किसानों को आर्थिक सहायता दे रही हैं, जबकि ‘सरस’ उत्पाद उपभोक्ताओं के बीच गुणवत्ता और भरोसे का प्रतीक बनकर उभर रहे हैं।
बैठक में ‘सरस’ ब्रांड को आधुनिक आउटलेट्स जैसे सरस स्मार्ट, सरस कैफे और सरस सिग्नेचर प्लाजा के जरिए विस्तार देने पर भी चर्चा हुई।
मुख्यमंत्री ने खाटू श्यामजी, सालासर, नाथद्वारा, पुष्कर और अजमेर जैसे प्रमुख धार्मिक और पर्यटन स्थलों पर ऐसे आउटलेट्स स्थापित कर ब्रांडिंग मजबूत करने के निर्देश दिए। साथ ही वहां उपभोक्ताओं के लिए सभी जरूरी सुविधाएं सुनिश्चित करने को कहा।
उन्होंने राजीविका के माध्यम से सरकारी कार्यालयों, जैसे कलेक्टरेट, में संचालित सरस स्मार्ट पार्लरों की प्रगति की समीक्षा की, साथ ही सरकारी अस्पतालों, राजस्थान रोडवेज बस स्टैंड और पर्यटन विकास निगम के होटलों में सरस आउटलेट्स के विस्तार पर भी चर्चा की।
मुख्यमंत्री ने अन्य राज्यों में ‘सरस’ उत्पादों के प्रचार और विस्तार के लिए प्रतिष्ठित निजी संस्थानों के साथ समझौते (टाई-अप) करने की योजना बनाने के निर्देश भी दिए।
उन्होंने मिलावट पर रोक लगाने के लिए सख्त कदम उठाने और दूध की खरीद से लेकर अंतिम उत्पाद के वितरण तक पूरी प्रक्रिया में गुणवत्ता की निगरानी के लिए मजबूत प्रणाली विकसित करने के निर्देश दिए, ताकि ‘सरस’ उत्पादों की गुणवत्ता बनी रहे।
अधिकारियों ने बताया कि राज्य में वर्तमान में रोजाना लगभग 45 लाख लीटर दूध की खरीद हो रही है। इसे पहले चरण में 65 लाख लीटर प्रतिदिन और दूसरे चरण में 85 लाख लीटर प्रतिदिन तक बढ़ाने की योजना बनाई गई है। इसके लिए जिन क्षेत्रों में डेयरी सहकारी समितियां नहीं हैं, वहां नई समितियां बनाई जा रही हैं और दूध खरीद दर को 50 रुपए से बढ़ाकर 52 रुपए प्रति किलोग्राम फैट किया गया है, जिससे पशुपालकों को लाभ मिल रहा है।
इसके अलावा, करीब 530 करोड़ रुपए के निवेश से नए दूध प्रसंस्करण संयंत्र स्थापित किए जा रहे हैं और मौजूदा इकाइयों का विस्तार किया जा रहा है, ताकि राज्य की प्रसंस्करण क्षमता बढ़ाई जा सके।
बैठक में पशुपालन एवं डेयरी मंत्री जोराराम कुमावत, मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास, अतिरिक्त मुख्य सचिव (मुख्यमंत्री कार्यालय) अखिल अरोड़ा, प्रमुख सचिव (पशुपालन) सीताराम भाले, सहकारिता सचिव डॉ. समीत शर्मा, राजस्थान कोऑपरेटिव डेयरी फेडरेशन के प्रबंध निदेशक और अन्य वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।
--आईएएनएस
एएमटी/वीसी